छात्राओं से छेड़खानी, महिला प्राध्यापकों व कर्मचारियों के लिए राहत की खबर

अजय शर्मा :

बिलासपुर : बिलासपुर विश्वविद्यालय व संबद्ध कॉलेजों की छात्राएं, महिला प्राध्यापक व कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। यौन उत्पीड़न या प्रताड़ना जैसे मामलों को अब सहन नहीं करना पड़ेगा। छात्राओं से छेड़खानी महिला प्राध्यापकों से बदतमीजी करने वालों की अब खैर नहीं है। यूजीसी सीधी निगाह रखेगा। किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई होगी।

संभाग में 168 कॉलेज हैं। जिनमें हर साल प्रताड़ना व यौन उत्पीड़न की शिकायत होती हैं। जिसे कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दबा दिया जाता है। महिला प्राध्यापकों को खुलकर न्याय के लिए महिला आयोग या पुलिस की शरण में जाना पड़ता है।

देशभर से मिली ऐसी शिकायतों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने गंभीरता से लिया है। विश्वविद्यालय और कालेजों से अनिवार्य रूप से ऐसे मामलों की जानकारी देने को कहा है। अब तक ऐसे सभी मामले में विवि और कालेजों के स्तर पर ही निगरानी में रहते थे।

इनमें अधिकांश में कोई कार्रवाई ही नहीं हो पाती थी। सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से अपने यहां अनिवार्य रूप से आंतरिक शिकायत कमेटी और विशेष सेल गठित करने का भी सुझाव दिया है। ऐसे मामलों की देखरेख के लिए उच्च स्तर पर एक कमेटी गठित की गई है। जहां ऐसे मामलों की प्रगति जाँची जायेगी साथ ही जरूरत समझे जाने पर संस्थानों को सीधे निर्देश भी दिया जा सकेंगे।

महिला आयोग से किनारा

शिक्षकों का कहना है कि अभी तक ऐसे मामलों की शिकायत यूजीसी के पास सीधे आने के बजाए सरकार और महिला आयोग के पास जाती थी। जहां से कार्रवाई की सिफारिश की जाती है। अब यूजीसी की इस पहल से ऐसे मामलों में जल्द ही कार्रवाई की जा सकेगी।

केंद्रीय विवि में भी प्रकरण

छेड़खानी, बदतमीजी, प्रताड़ना की शिकायत सिर्फ डीपी विप्र कॉलेज सीएमडी नलिनी प्रभा देवी कॉलेज तक सीमित नहीं है। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में भी कई मामले हैं। जिनका निपटारा अभी तक नहीं हुआ है।

कॉलेज या यूनिवर्सिटी में किसी भी महिलाओं या छात्राओं को प्रताड़ित करने के मामले में यूजीसी ने त्वरित कार्रवाई की बात कही है। आंतरिक शिकायत सेल के माध्यम से इसका निपटारा किया जाएगा। इससे छेड़खानी करने वालों में डर पैदा होगा।
प्रो. जी डी शर्मा
कुलपति

बिलासपुर विश्वविद्यालय

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