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इस्लामिक उपदेशक डॉ. ज़ाकिर नाइक के खिलाफ एनआईए ने दायर की चार्जशीट

मुंबई: अपने जहरीले भाषणों के लिए जाने जाने वाले इस्लामिक उपदेशक डॉ. ज़ाकिर नाइक भले ही फरार हैं लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने उनके खिलाफ गुरुवार को मुंबई सत्र न्यायालय में आरोप पत्र दायर कर दिया. डॉ ज़ाकिर के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 153ए, 295ए, 298 और 505(2) के साथ यूएपीए कानून की धारा 10 के तहत भी आरोप लगाये गए हैं. मतलब एनआईए की जांच में डॉ. ज़ाकिर नाइक एक साजिश के तहत अपने भाषणों से धार्मिक विद्वेष फैलाने, युवकों को बरगलाने, समाज मे तनाव फैलाने के आरोपी पाये गये हैं.

अदालत में एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि एजेंसी के लिए गुरुवार को आरोपपत्र दायर करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि डॉ. ज़ाकिर नाइक के वकील मुबीन सोलकर ने पूर्व सूचना ना देने के साथ फरार आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दायर करने पर आपत्ति की. अदालत ने भी उन्हें भी अर्जी देने को कहा. हालांकि बाद में एनआईए के वकील ने पत्रकारों को बताया कि जज ने चार्जशीट सबमिट करने की इजाजत देदी है.

तकरीबन 4000 पेज की चार्जशीट में एनआईए ने डॉ. ज़ाकिर नाइक के साथ उनकी 2 कंपनियों को भी आरोपी दिखाया है. पहली इस्लामिक रिसर्च फॉउंडेशन और दूसरी हारमोनी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड. जांच एजेंसी के मुताबिक डॉ. ज़ाकिर नाइक ने धार्मिक तनाव उत्पन्न करने के इरादे से एक साजिश के तहत उपरोक्त दोनों कंपनियों का इस्तेमाल किया. जिनके जरिये अपने समारोह आयोजन कराना, फिर अपने भड़काउ भाषणों का सीडी और डीवीडी के जरिये प्रचार प्रसार किया जाता था. एजेंसी के मुताबिक डॉ. ज़ाकिर की पीस टीवी भी नियमों का उलंघन करने में दोषी पाई गई है.

एजेंसी ने हिंदुओं के देवता श्री गणेश पर डॉ. ज़ाकिर के दिये हुए भाषण का उल्लेख कर बताया है कि डॉ. जानबूझकर दूसरे धर्मों को नीचा दिखाने का काम करते थे. चार्जशीट के अनुसार डॉ. ज़ाकिर नाइक ने अपनी करतूतों को अंजाम देने के लिए अपनी बहन नाइला नौशाद नूरानी के नाम का भी इस्तेमाल किया. उसे कंपनी में डायरेक्टर बनाया. चेक पर नाइला के सही भी होते थे लेकिन पर्दे के पीछे क्या होता था वो उसे पता नहीं होता था. जांच में ये भी पता चला है कि साल 2003 से 2006 के बीच बहन नाइला को 29 करोड़ रुपये मिले थे जो ज़ाकिर नाईक ने परिवार के बैंक अकाउंट के जरिये दिए थे. बाद में वही रकम हार्मनी मीडिया और लॉन्‍गलस्ट कंस्ट्रक्शन कंपनी में निवेश कर दिए गए. मामले में 150 के करीब लोगों के बयान लिए गए हैं जिनमें से ज्यादातर का बयान मजिस्ट्रेट के सामने लिए गए ताकि बाद में अगर मुकर भी जाएं तो भी बयान सबूत माना जाए.

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