ज्योतिष

नीरव मोदी “डायमंड किंग”- हीरे ने आबाद और बर्बाद किया

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव 8178677715, 9811598848

सिद्धार्थ मल्होत्रा, प्रियंका चोपड़ा, लिसा हेडन, सोनम कपूर जैसे सितारे जिसके ब्रांड का प्रमोशन कर चुके है। जिनके बारे में कहा जाता है कि ये वर्ष में सिर्फ एक बार अपने वस्त्रों की शापिंग करते है, जिसमें ५० शर्ट और ५० सूट ये लेते है। इनकी आनबान शान का स्तर तो देखिए कि भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विश्व स्तर के आर्थिक मंच को शेयर करते हुए देखा गया। जी हां आज हम डायमंड किंग नीरव मोदी की बात करने जा रहे हैं।

नीरव मोदी की चर्चा आज आम है। हर अखबार, हर चैनल पर नीरव मोदी की तस्वीरें देखी जा सकती है। लंदन में नीरव मोदी को एक इंटरव्यू देते हुए देखा गया। इसके साथ ही इनके भारत लाए जाने की खबरें तेज होने लगी।

नीरव मोदी का वास्तविक नाम नीरव दीपक मोदी है। हीरा व्यापारी के रुप में इन्होंने अपनी पहचान बनाई। कालेज की पढ़ाई मध्य में ही छोड़ने वाले नीरव मोदी को पुस्तकें पढ़ने, चित्रकारी करने और यात्रा करने का शौक रहा।

नीरव मोदी का पैतृक घर बनासकांठा, पालनपुर, गुजरात में है और इनका जन्म एंटवर्प, बैल्जियम में हुआ। वर्ष 1971 में इनके जीवन की शुरुआत हुई। नीरव मोदी आज पंजाब नेशनल बैंक के फर्जी लेन-देन मामले में दोषी है, और फरार हैं।

गौरतलब है कि पंजाब नेशनल बैंक देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है। 11400 करोड़ रुपया का इनपर फ्राड ट्रांजेक्शन का आरोप है। डायमंड व्यापार ने नीरव मोदी को फर्श से अर्श और अर्श से वापस फर्श पर पहुंचा दिया।

1940 की बात है जब नीरव के पिता अपनी जन्मभूमि को छोड़कर हीरे का व्यापार करने बेल्जियम चले गए। नीरव मोदी की लगभग पिछली सात पीड़ियां हीरे के कारोबार में संलग्न रही है। मामा मेहुल चौकसी से कारोबार का गुर सीखने वाले नीरव मोदी मात्र 19 वर्ष की आयु में अपनी पढ़ाई मध्य में छोड़कर भारत आ गए। यहां इन्होंने लगभग एक दशक तक हीरा व्यापार किया।

मेहुल चौकसी गीतांजली जेम्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ है और गीतांजली जेम्स दुनिया की सबसे बड़ी जवैलरी रिटेलर्स कम्पनी है। नीरव को हीरे के कारोबार में लाने का कार्य इनके एक मित्र का रहा। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि इनके पहले स्टोर का उद्घाटन डोनाल्ड ट्रंप ने किया, यह बात ओर है कि उस समय डोनाल्ड ट्रंप उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं थे।

1999 में एक हीरे की स्वयं की फर्म खोली, जिसका नाम “फायरस्टार डायमंड इंटरनेशनल” रखा गया। 2005 और उसके बाद 2007 में हीरे के आभूषण का डिस्ट्रीब्यूशन और मार्केटिंग की संस्थाएं खोली। 2010 में इनकी फर्म ने 1300 आभूषण विशेषज्ञों की मदद से एक खास हीरों का हार तैयार किया, जिसकी चर्चा विश्व भर में रही। यह तो थी नीरव मोदी के अब तक के उत्थान की कथा, आईये अब जाने के इनका पतन किस प्रकार हुआ, और आज क्यों इन्हें विदेश में अपनी पहचान छुपाकर रहना पड़ रहा है।

2018, जनवरी माह में पीएनबी बैंक ने नीरव खिलाफ 11400 करोड़ रुपयों के गबन का मुकद्दमा दर्ज कराया। पीएनबी के बाद एक्सिस बैंक, इलाहाबाद बैंक और बैंक आफ इंडिया जैसे अन्य अनेक बैंकों ने भी कुछ इसी तरह के मामले दर्ज कराये। नीरव मोदी आज फरार हैं और विदेश प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा इन्हें देश वापस लाने की मुहिम जोरशोर से चल रही है।

जैसा की सर्वविदित है कि नीरव मोदी हीरे के कारोबार से जुड़े है, और हीरे के बारे में कहा जाता है कि यह जिसे रास आए उसे बना देता है और जिसे रास ना आए उसे मिट्टी में भी मिला देता है अर्थात हीरा उत्थान और पतन दोनों देने का सामर्थ्य रखता है। यहां कोहिनूर हीरे का संदर्भ देना चाहेंगे।

कोहिनूर विश्व का सबसे प्रसिद्ध और बेशकीमती हीरा है। जिसकी उत्पत्ति भारत की खानों से अवश्य हुई, परन्तु आज यह विदेश में हैं, और इस हीरे के बारे में कहा जाता है कि यह हीरा जिस भी व्यक्ति ने इसे धारण किया या तो उसके सिर का ताज उतर गया या फिर उसकी मृत्यु हो गई। इस हीरे को अशुभ हीरे की श्रेणी में रखा गया है।

कुछ इसी तरह की किंवदंतियां नीलम रत्न के विषय में कही जाती रही है, कि नीलम किसी को बना देता है और किसी को तबाह कर देता है, परन्तु हीरा नीलम रत्न से अधिक कष्टकारी सिद्ध हो सकता है। कहा जाता है कि हीरा अपने आकर्षक रुप से पहले अपनी ओर खिंचता है, उन्नति देता है और फिर जमींदोज करने में भी समय नहीं लगाता।

हीरे के विषय में विज्ञान क्या कहता है, ऐश्वर्य का प्रतीक हीरा एक पारदर्शी रत्न है। जो कि कार्बन का सबसे शुद्ध रुप है। यह बहुत ही निष्क्रिय और अघुलनशील होता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार हीरे दैत्यगुरु शुक्र का रत्न माना जाता है।

विष्णु पुराण के अनुसार दैत्य कश्यप ऋषि और दिति के पुत्र और देव कश्यप ऋषि की दूसरी पत्नी अदिति के पुत्र थे। लिहाज़ा देव और दैत्य आपस में सौतेले भाई थे। देवों की प्रवृतियां राजसिक और सात्विक थीं। दैत्यों की प्रवृत्तियां तामसिक और भौतिक और ज्योतिष शास्त्रों में यह उल्लेखित है कि यदि कुंडली में शुक्र षष्ठस अष्टम् या द्वादश भाव में हो तो पतन देता है, और इसके विपरीत यदि शुक्र कुंडली में भाग्य, कर्म और लाभ भाव के साथ स्वग्रही हो तो शुक्र रत्न हीरा क़िस्मत भी चमका देता है।

क्या नीरव मोदी को वापस लाने में विदेश प्रवर्तन निदेशालय कामयाब होगा? क्या नीरव मोदी स्वयं पर लगे मामलों से बरी हो सकेंगे? और क्या नीरव मोदी एक बार फिर से अर्श की ऊंचाईयों तक पहुंच पायेंगे? आज हम इन सभी प्रश्नों का उत्तर नीरव मोदी की कुंडली विश्लेषण कर रहे हैं-

नीरव मोदी को इतना अमीर किसने बनाया? ग्रहों का संयोजन।?
चंद्र कुंड्ली विश्लेषण

नीरव मोदी की कुंडली में चंद्र मीन राशि में हैं। इस प्रकार इनकी जन्मराशि मीन है। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में जन्म होने के फलस्वरुप नीरव को आकर्षक और चुंबकीय व्यक्तित्व मिला। इसने विपरीत लिंग में इन्हें लोकप्रियता दी। चेहरे पर स्मित हास्य, एक अबोधपन दिया। इन्हें बुद्धिमान, ग्यानवान एवं समझदार बनाया। इस नक्षत्र ने इन्हें गुस्सा नाक पर दिया।

इसी के फलस्वरुप अठारह- उन्नीस वर्ष की अवस्था में ही आजीविका कार्य में लगा दिया। धन भाव में नीचस्थ शनि स्थित है। द्वादश भाव में तीन ग्रह राहु, बुध और सूर्य है। एकादश भाव में शुक्र, नवम भाव में गुरु और मंगल एवं छ्ठे भाव में केतु है। इनकी कुंडली में लाभ और आय के स्वामी शनि परिवार भाव में हैं, यह योग इन्हें पैत्रिक कारोबार से जोड़ रहा है।

इसी योग के प्रभाव से इन्होंने अपने पारिवारिक कारोबार को आगे बढ़ाया। दशमेश गुरु भाग्य भाव में स्वराशिस्थ मंगल के साथ होने के फलस्वरुप इन्हें कार्यक्षेत्र में भाग्य का सहयोग भी मिला और इस योग ने इन्हें भाग्यशाली भी बनाया। स्वराशि के मंगल ने इनकी कुंड्ली में रुचक योग निर्मित किया।

रुचक योग से युक्त व्यक्ति पराक्रम, साहस तथा कार्यकुशलता के चलते अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में बहुत धन तथा प्रसिद्धि प्राप्त करता है। इस योग ने इन्हें साहसी और पराक्रमी बनाया। चतुर्थ भाव पर आयेश शनि की तीसरी दृष्टि इन्हें इनके जन्मस्थान से दूर लेकर गई और नीरव जन्म स्थान से दूर अपने पूर्वजों के देश में वापसी कर अपना कारोबार यहां स्थापित किया।

कुंडली में गुरु, मंगल के क्षेत्र में हैं। गुरु शिक्षा विभाग, बैंक, मानसिक कार्य, लेखन आदि से संबंध रखता है तो मंगल अग्नि, बिजली संबंधित कार्य, सेना, पुलिस से संबंधित विभागों का प्रतिनिधित्व करता है। मंगल पाप ग्रह है तो गुरु शुभ ग्रह है।

इस योग ने इन्हें बैंकिंग नियमों की अनदेखी करने का अतिरिक्त साहस दिया। कर्म या करियर का स्वामी बृहस्पति है। देव गुरु पिछले जन्म कर्म भाव के नवम भाव या घर में है इसलिए यह जातक को बहुतायत में धन देता है लेकिन व्यक्ति को सफलता को बनाए रखने के लिए नैतिक और धार्मिक नियमों का पालन भी करना चाहिए।

आयेश और व्ययेश शनि कमजोर अवस्था में धन भाव में है। व्ययेश का धन भाव में स्थित होना, विदेश तक कारोबार का विस्तार और आय वृद्धि के साथ साथ संचित धन में बढ़ोतरी भी देता है। ऋण भाव में केतु की स्थिति और ॠण भाव को ॠण भावेश सूर्य की दृष्टि प्राप्त होने से शत्रु, विरोधी और ॠण भाव बली हो रहा है। बारहवें भाव में राहु विदेश गमन के साथ साथ हानि भी देता है। यह सब घटनायें नीरव मोदी के जीवन को स्पष्ट करती है।

नीचाभिलाषी बुध का बारहवें भाव में होना, ऋण कारणों से विदेश गमन और जेल यात्रा के योग बना रहा है। सूर्य का द्वादश भाव में होना, सरकारी करों के कारण दंड और सजा की स्थिति देता है।

शनि की राशि में सूर्य प्रतिकूल फल तो देता ही है साथ ही सरकारी करों का समय पर भुगतान ना हो पाने के कारण नीरव को कष्ट की स्थिति का सामना भी करना पड़ा। द्वादश भाव से राहु पंचम दॄष्टि से घर भाव को प्रभावित कर सुख-शांति को प्रभावित कर, अशांति देता है।

यह धन प्रवाह को अवरुद्ध करता है। छ्ठे भाव के स्वामी का आठवें भाव में होना, विपरीत राजयोग बना रहा है। यह विपरीत परिस्थितियों में व्यक्ति को सफलता तो देता है, साथ ही इस योग के फलस्वरुप व्यक्ति को परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है।

आय भाव में शनि की राशि में शुक्र का होना, व्यक्ति के कार्यक्षेत्र को भूमि से प्राप्त होने वाले रत्नों से संबंधित करता है। शुक्र का रत्न हीरा है, और हीरे के कारोबार ने इन्हें दिनोंदिन उन्नति दी और शुक्र ने इनके जीवन की दिशा को मोड़ भी दिया।

वर्तमान गोचर 2019

इस समय गोचर में शनि इनके दशम भाव पर गोचर कर रहे हैं। यहां से शनि तीसरी दॄष्टि से व्यय भाव को सक्रिय कर व्यय और हानि की स्थिति बना रहा है। इनके कर्मभाव पर इस वर्ष केतु, शनि और गुरु का प्रभाव मुख्य रुप से रहने वाला है, यह प्रभाव इनके कार्यक्षेत्र में दिक्कतें और तनाव तो देगा ही साथ ही आय में कमी कर व्ययों का विस्तार भी करेगा।

गोचर में दशम भाव से केतु नवम दृष्टि से रोग, ॠण और शत्रु भाव को भी सक्रिय कर रहे हैं, जन्म केतु पर गोचर के केतु की दॄष्टि ॠण विषयों से संबंधित परेशानियां बढ़ायेंगे। गोचर में गुरु धनु राशि से इनके चतुर्थ भाव को दॄष्टि देंगे और इसी समय पैत्रिक भाव अर्थात दूसरे भाव को भी प्रभावित करेंगे। परन्तु इस भाव पर राहु का गोचर इन्हें घर से दूर ही रखेगा। ऐसे में नीरव की भारत वापसी इस साल में संभव नहीं दिखती।

कुंडली में गुरु, मंगल के क्षेत्र में हैं। गुरु शिक्षा विभाग, बैंक, मानसिक कार्य, लेखन आदि से संबंध रखता है तो मंगल अग्नि, बिजली संबंधित कार्य, सेना, पुलिस से संबंधित विभागों का प्रतिनिधित्व करता है।

मंगल पाप ग्रह है तो गुरु शुभ ग्रह है। इस योग ने इन्हें बैंकिंग नियमों की अनदेखी करने का अतिरिक्त साहस दिया। कर्म या करियर का स्वामी बृहस्पति है। देव गुरु पिछले जन्म कर्म भाव के नवम भाव या घर में है इसलिए यह जातक को बहुतायत में धन देता है लेकिन व्यक्ति को सफलता को बनाए रखने के लिए नैतिक और धार्मिक नियमों का पालन भी करना चाहिए।

आयेश और व्ययेश शनि कमजोर अवस्था में धन भाव में है। व्ययेश का धन भाव में स्थित होना, विदेश तक कारोबार का विस्तार और आय वृद्धि के साथ साथ संचित धन में बढ़ोतरी भी देता है। ऋण भाव में केतु की स्थिति और ॠण भाव को ॠण भावेश सूर्य की दृष्टि प्राप्त होने से शत्रु, विरोधी और ॠण भाव बली हो रहा है। बारहवें भाव में राहु विदेश गमन के साथ साथ हानि भी देता है। यह सब घटनायें नीरव मोदी के जीवन को स्पष्ट करती है।

नीचाभिलाषी बुध का बारहवें भाव में होना, ऋण कारणों से विदेश गमन और जेल यात्रा के योग बना रहा है। सूर्य का द्वादश भाव में होना, सरकारी करों के कारण दंड और सजा की स्थिति देता है। शनि की राशि में सूर्य प्रतिकूल फल तो देता ही है साथ ही सरकारी करों का समय पर भुगतान ना हो पाने के कारण नीरव को कष्ट की स्थिति का सामना भी करना पड़ा।

द्वादश भाव से राहु पंचम दॄष्टि से घर भाव को प्रभावित कर सुख-शांति को प्रभावित कर, अशांति देता है। यह धन प्रवाह को अवरुद्ध करता है। छ्ठे भाव के स्वामी का आठवें भाव में होना, विपरीत राजयोग बना रहा है। यह विपरीत परिस्थितियों में व्यक्ति को सफलता तो देता है, साथ ही इस योग के फलस्वरुप व्यक्ति को परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है।

Tags
Back to top button