निर्भया गैंगरेप: दिल्ली सरकार ने एक आरोपी की दया याचिका खारिज करने की सिफारिश की

निर्भया गैंगरेप केस के दोषियों के सभी विकल्प खत्म

नई दिल्ली: दिल्ली की बेटी निर्भया से गैंगरेप की वारदात को अंजाम देने वालों में से एक आरोपी की दया याचिका को दिल्ली सरकार ने खारिज करने की सिफारिश की है. तिहाड़ जेल प्रशासन ने दया याचिका दिल्ली सरकार को भेज दी है. सरकार इसे राष्ट्रपति के पास भेजेगी.

सिर्फ दोषी विनय शर्मा ने राष्ट्रपति से दया याचिका लगाई

अगर राष्ट्रपति खारिज़ कर देते है तो डेथ वारंट जारी होगा. सिर्फ दोषी विनय शर्मा ने राष्ट्रपति से दया याचिका लगाई है. बाकियों ने नहीं लगाई है. बता दें निर्भया गैंगरेप केस के दोषियों के सभी विकल्प खत्म हो गए हैं.

दिल्ली सरकार ने अपनी सिफारिश में लिखा है कि याचिकाकर्ता ने बेहद जघन्य और क्रूर अपराध किया है. उसे ऐसी सज़ा दी जाना चाहिए ताकि लोग याद रखें. दिल्ली सरकार ने ये सिफारिश उप राज्यपाल को भेजी है.

अब उप राज्यपाल अपनी सिफारिश केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेंगे. केंद्र सरकार राष्ट्रपति के भेजेगी. अगर राष्ट्रपति भी दया याचिका खारिज़ कर देते है तो डेथ वारंट जारी होगा. निर्भया अब इस दुनिया में नहीं है. 7 साल बीत गए हैं लेकिन निर्भया के माता-पिता अब भी अधूरे इंसाफ के लिए कोर्ट के चक्कर काटने को मजबूर हैं.

दिल्ली के निर्भया कांड ने देश ही नहीं पूरी दुनिया को झंकझोर कर रख दिया था. 16 दिसंबर की रात दिल्ली के मुनीरका में 6 लोगों ने चलती बस में पैरामेडिकल की छात्रा से गैंगरेप किया था. इसके बाद दरिंदगी की वो सारी हदें पार की, जिसे सुनकर कोई भी दहशत में आ जाए. 13 दिन बाद निर्भया ने दम तोड़ दिया था.

नाबालिग को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत सजा हुई

दिल्ली के निर्भया केस में एक नाबालिग समेत कुल 6 लोग दोषी करार दिए गए थे. नाबालिग को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत सजा हुई, जबकि 5 व्यस्क दोषियों में से एक ने जेल में खुदकुशी कर ली…जबकि बाकी चारों दोषियों को सुप्रीम कोर्ट से मौत की सज़ा मिल चुकी है. लेकिन अभी तक वो सभी फांसी के फंदे से दूर हैं. सभी दोषी फांसी के फंदे से इसलिए दूर हैं क्योंकि कानूनी पेचिदगियों का फायदा निर्भया के दोषी उठा रहे हैं.

निर्भया के माता-पिता ने बेटी को 7 साल पहले खोया था लेकिन 7 साल में वो न्याय की आस के लिए कोर्ट के चक्कर ही काट रहे हैं. अदालत से सज़ा होने के बाद भी अभी तक दोषी सूली पर नहीं चढ़ सके हैं. सवाल है कि आखिर ऐसे कानून क्यों हैं जिससे तय वक्त पर दोषियों को सज़ा नहीं मिल पाती.

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