‘एक देश एक चुनाव’ को लेकर नीतीश ने जताई असहमती

नेशनल डेस्क: विधानसभा और लोकसभा चुनाव को एक साथ कराने का मुद्दा इस समय जोड़ पकड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी वकालत लंबे समय से करते आ रहे हैं। पिछले दिनों भाजपा ने भी अपनी राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों को लेटर लिख इस आइडिया पर एक राय बनाने को कहा था। हालांकि पीएम के इस आइडिया से उनके कुछ सहयोगी नाखुश दिखाई दे रहे हैं। बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘एक देश एक चुनाव’ के विचार पर असहमती जताई है। सीएम के अनुसार गुजरात या कर्नाटक जैसे राज्यों में लोकसभा चुनावों के साथ विधानसभा का चुनाव कराना संभव नहीं है।

निर्धारित समय पर होंगे विधानसभा चुनाव
पटना में पार्टी जनता दल यूनाइटेड की बैठक को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि विधानसभा चुनाव निर्धारित समय अक्‍टूबर-नंबर 2020 में ही होंगे। उन्होंने कहा कि क्‍या आप यह सोचते हैं कि गुजरात में भी चुनाव होंगे जहां हाल में ही विधानसभा चुनाव हुए हैं? दरअसल जदयू नेता आरसीपी सिंह ने कुछ दिन पहले ही दोनों चुनाव एक साथ कराने के संकेत दिए थे। हालांकि सीएम के इस बयान ने इस तरह की संभावना से इंकार कर दिया है।

एक देश, एक चुनाव का पीएम ने दिया था सुझाव
गौरतलब हो कि 19 मार्च को भाजपा कार्यकारणी बैठक में ‘एक देश एक चुनाव’ पर सुझाव पेश किया गया था। बजट से पहले सर्वदलीय बैठक में भी पीएम ने इस पर सुझाव दिया था। 1967 तक लोकसभा, विधानसभा चुनाव साथ-साथ होते थे। कानून और कार्मिक मंत्रालय की स्टैंडिंग कमिटी ने सुझाव दिया था। जिस पर दिसंबर 2015 में रिपोर्ट संसद में पेश हुई थी। भाजपा ने 2014 में अपने घोषणापत्र में एक साथ चुनाव का वादा किया। इससे पहले 2012 में लाल कृष्ण आडवाणी ने एक साथ चुनाव का सुझाव दिया था। चुनाव आयोग के मुताबिक लोकसभा, विधानसभा चुनावों पर करीब 4,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाते है। 2014 लोकसभा चुनाव में करीब 30,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।

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