सोनिया के भोज में शामिल ना होने पर बोले नीतीश

सोनिया के भोज में शामिल ना होने पर बोले नीतीश.

बिहार:बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोनिया गांधी द्वारा आयोजित दोपहर के भोज में शामिल ना होने और कल दोपहर के भोज में शामिल होने का प्रधानमंत्री का आमंत्रण स्वीकार करने को लेकर शुरू हुई अटकलों को आज तवज्जो ना देते हुए कहा कि इसका गलत अर्थ निकाला जा रहा है। प्रधानमंत्री कल मॉरिशस के प्रधानमंत्री के सम्मान में भोज की मेजबानी करेंगे।

नीतीश ने संवाददाताओं से इसका गलत मतलब ना निकालने की बात करते हुए कहा, इसका गलत अर्थ निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा, जाने या ना जाने जैसी कोई बात ही नहीं है।

चार-पांच दिन पहले अहमद पटेल (कांग्रेस नेता) ने जब दोपहर भोज पर बैठक की खातिर जदयू को निमंत्रित करने के लिए मुझे फोन किया तो मैंने तब ही उन्हें इसके बारे में बता दिया था।

मुख्यमंत्री ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक से निकलने के बाद कहा, जदयू को निमंत्रण दिया गया था और पार्टी प्रतिनिधि के तौर पर उसमें शरद यादव शामिल हुए।

विपक्ष की बैठक से आज नीतीश के नदारद रहने को राष्ट्रपति पद के आगामी चुनाव में गैर भाजपा दलों द्वारा एक साक्षा उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिशों को लगे क्षटके की तरह देखा जा रहा है, इसे लेकर नीतीश ने कहा, मैं पहले ही इसपर सोनिया गांधी से मिल चुका हूं और दूसरे दलों के प्रमुख नेताओं से फोन पर बात की है।

कल प्रधानमंत्री के भोज में शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा कि उन्होंने यह निमंत्रण बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार किया। मुख्यमंत्री ने कहा, मॉरिशस के लंबे समय से बिहार से भावनात्मक संबंध हैं।

आज मॉरिशस की 52 प्रतिशत से ज्यादा आबादी का मूल बिहार में हैं। उन्होंने साथ ही कहा, मॉरिशस के पूर्व एवं मौजूदा प्रधानमंत्री की जड़ें बिहार में हैं। नीतीश ने कहा कि दोपहर के भोज के बाद वह प्रधानमंत्री के साथ बैठेंगे और गंगा नदी पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री के भोज में हिस्सा ले सकते हैं नीतीश.

विपक्षी पार्टियों की आज हुई बैठक में हिस्सा नहीं लेने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित भोज में शामिल होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री भारत यात्रा पर आए मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ के सम्मान में कल दोपहर के भोज का आयोजन कर रहे हैं।

जद (यू) और भाजपा के बीच गठबंधन की अटकलों का बाजार गर्म होता रहा है। हालांकि, कुमार इसका बार—बार खंडन करते रहे हैं। जद (यू) ने भाजपा के साथ अपना 17 साल पुराना गठबंधन तब तोड़ लिया था जब भगवा पार्टी ने नरेंद्र मोदी को भाजपा की ओर से 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था।

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