एनआईटी के राहुल और डाकेश्वर का कमाल 

इशारे से चलेगा कंप्यूटर और अनोखा विलियन बचाएगा क्षरण से 

घनश्याम साहू
रायपुर एनआईटी का एक स्वर्णिम इतिहास रहा है, यहाँ से पीएचडी करने वाले छात्रों ने कई अनोखे अविष्कार किये हैं, जिनका लाभ समाज को मिल रहा है. इस दफे भी एनआईटी में 23 दिसम्बर 2017 को दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया जिसमें 20 छात्र-छात्राओं को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई. इनमें से दो शोधार्थी ऐसे थे जिनके अविष्कार समाज, वातावरण और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान देंगे. P 300 स्पेलर का निर्माण कर राहुल चौरसिया ने उन लोगों की मदद की है जो हिंदी में पारंपरिक संचार माध्यम का उपयोग नहीं कर पाते. यह न्यू इंडिया में दिव्यांग एवं असक्षम लोगों की भागीदारी बदलेगा एवं उनकी जीवनशैली को बेहतर बनाने में भी योगदान देगा. वहीं डाकेश्वर वर्मा ने अपने शोध में स्टील आयरन में होने वाले संक्षारण को रोकने के लिए प्राकृतिक उत्पादों जैसे पत्ती, तना एवं फूल का उपयोग कर जंग रोधक विलयन तैयार किया है, जो आसपास के पर्यावरण और जीवों को बगैर नुकसान पहुचाएं उपयोग में लाया जा सकता हैं. इन शोधों के बारे में उन्होंने विस्तार से चर्चा की.

नाम- राहुल कुमार चौरसिया
शोध का विषय और निर्माण – मस्तिष्क कंप्यूटर इंटरफ़ेस के लिए देवनागरी लिपि पर आधारित एक दक्ष P 300 स्पेलर का निर्माण.
राहुल चौरसिया ने अपने शोध में देवनागरी लिपि आधारित P 300 स्पेलर का निर्माण किया है. देवनागरी लिपि का चयन इस बात से प्रेरित हैं कि वह हिंदी, मराठी, संस्कृत, नेपाली, पाली, कोंकणी, बोडों, सिन्धी, और मैथली आदि भाषाओँ को लिखने की लिपि है और यह भारत में विशेष महत्व रखता है. राहुल ने बताया कि देवनागरी लिपि में P 300 स्पेलर का निर्माण अधिक कठिन है क्योंकि इसमें मात्राओं व अक्षरों की उपलबधता कम है. P300 स्पेलर की मदद से वर्णमाला के अक्षरों एवं अंकों को एक-एक करके कंप्यूटर स्क्रीन पर स्पेल कराया जा सकता है. अंग्रेजी वर्णमाला के लिए P 300 स्पेलर पर शोध कुछ वर्षो से जारी है पर हिंदी में संचार के लिए ऐसा कोई स्पेलर अब तक उपलब्ध नहीं था. शोध में राहुल चौरसिया ने देवनागरी लिपि में पहले ऐसे P 300 स्पेलर का निर्माण किया है जो न केवल पैटर्न – क्लासीफिकेशन विधि की मदद से अक्षरों को स्पेल कर पाता है बल्कि ऑटो करेक्ट करके एक सटीक एवं पूर्ण हिंदी शब्द और वाक्य लिखता है. राहुल ने अपने शोध के लिए प्रारंभिक डेटा की रिकॉर्डिंग भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलौर में की थी. बाद में शोध को ध्यान में रखते हुए ईईजी रिकॉर्डिंग मशीन खरीदने के लिए भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग ने 27 लाख रूपए का प्रोजेक्ट अनुदान दिया. राहुल चौरसिया का कहना है कि अब यह शोध आगे भी जारी रखेंगे और P300 स्पेलर का उपयोग कर स्मार्ट होम कंट्रोल पर काम करेंगे.
क्या हैं P 300 स्पेलर
P 300 स्पेलर मानव-मस्तिष्क और कंप्यूटर के बीच एक संचार उपलब्ध कराता हैं. इस स्पेलर की मदद से हम बिना लिखे, बिना टाइप किये, बिना बोले या फिर बिना इशारे के केवल अपने मस्तिष्क से निकलने वाली ईईजी विद्युतीय तरंगों को रिकॉर्ड करके कंप्यूटर से संपर्क कर सकते हैं. यह एक तरह का ब्रेन कंप्यूटर इंटरफ़ेस तकनीक हैं जो कंप्यूटर से संचार या उसे कमांड देने के लिए किया जाता है.
नाम- डाकेश्वर वर्मा
शोध का विषय और निर्माण- स्टील आयरन में होने वाले संक्षारण को रोकने हेतु प्रयुक्त प्राकृतिक जंग अवरोधक का विस्तृत अध्ययन
डाकेश्वर वर्मा ने अपने शोध में बताया हैं कि ओद्योगिकीकरण के इस दौर में धातुओं का प्रयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है, जिसमें लोहा, एल्युमीनियम एवं तांबा प्रमुख धातुओं में से है. चूँकि इन धातुओं में संक्षारण होना सामान्य प्रक्रिया है जिसके कारण अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक दृष्टिकोण से कई तरह की हानियाँ होती हैं. रिपोर्ट के अनुसार संक्षारण से होने वाली कुल हानि किसी देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में  3 से 4 प्रतिशत तक योगदान देती है. ये धातुएं पर्यावरण, पीने का पानी तथा खाद्य पदार्थों में अगर सीमित मात्र से अधिक हो तो कई तरह दुष्परिणाम होते हैं. धातुओं को संक्षारण से रोकने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्बनिक एवं अकार्बनिक यौगिकों का उपयोग किया जाता है जो या तो स्वभाव से ही जहरीले या पर्यावरण प्रतिकूल होते हैं. डाकेश्वर वर्मा ने अपने शोध में प्राकृतिक उत्पादों जैसे पत्ती, तना एवं फूल का उपयोग कर जंगरोधक विलयन तैयार किया है, जो आसपास के पर्यावरण और जीवों को बगैर नुकसान पहुचाएं उपयोग में लाया जा सकता है.

ये विलयन पर्यावरण के अनुकूल सस्ता और बायोडिग्रेबल हैं. वर्मा ने इस सन्दर्भ में कुल 16 अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शोध पत्रिका प्रकाशित की है. 3 अंतर्राष्ट्रीय एवं 3 राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी में पत्रिका को प्रदर्शित कर चुके हैं.

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