एनएमडीसी ने देश में पेश की एक नई मिसाल : बैजेन्द्र

रायपुर: छत्तीसगढ़ में एनएमडीसी ने एक नई मिसाल पेश की है। एनएमडीसी ने गांवों में शिक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली की समस्याओं से ग्रामीणों को मुक्ति दिलाई है। इन समस्याओं के निराकण के लिए एनएमडीसी संकल्पित है। 

एनएमडीसी के चेयर मैन एन बैजेन्द्र कुमार ने कहा कि, सभी साथियों के योगदान से आज एनएमडीसी ने देश में एक मिसाल पेश की है। उन्होंने कहा कि, सार्वजानिक क्षेत्र के किसी भी औद्योगिक इकाई का यह अहम दयित्व होता है कि, वह समाजोपयोगी कार्यों के प्रति अपनी सहभागिता से अपनी रचनात्मकता को साबित करें। इस लिहाज से अपने कार्यों से नैगम सामाजिक दायित्वों का निर्वाह भी करना होता है, जिसके लिए उसे एक प्रारूप निर्धारित करने की जहां आवश्यकता होती है। वही अपनी आय का एक निश्चित लभांश सामाजिक ढ़ांचा निर्माण के नाम व्यय करने के लिए भी तत्परता दिखलानी होती है। 

इस दृष्टि से राष्ट्रीय खनिज विकास निगम ने न केवल परियोजना क्षेत्र अथवा (उत्खनन क्षेत्र से संबंद गांवो व लोगों के सामाजिक तथा आर्थिक उत्थान) के प्रति सकारात्मक भूमिका निभाई है। परियोजना क्षेत्र से परे पूरे जिले व क्षेत्र की आकांक्षाओं के अनुरूप सामाजिक गतिविधियों को आकासर देकर लोगों को एक बेहतर जीवन एक सुखद भविष्य और एक आश्वस्तिपूर्ण वातारण उपलब्ध कराने में अपना अविस्मरणीय योगदान दिया है। 

एनएमडीसी के गिनाये योगदान : 

अध्यक्ष एनएमडीसी ने कहा कि, जीवन की प्राथमिक आवश्यकताओं मूलभूत सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाना और उनकी बाधाओं को दूर कर एक सहज स्थिति निर्मित करना है। इसमें क्षेत्र के गरीब से गरीब तबके के लोग अपने व अपने परिवार बच्चों का एक सुखद भविष्य की दिशा में अग्रसर कर पाने में समर्थ हो सके। बस्तर संभाग के सभी जिलों में जनजातिय समाज में शिक्षा की समस्या एक ऐसी समस्या है जो सदा उनके और क्षेत्र की विकास की मुख्य बाधा के रूप में चिन्हित की जाती रही है। 

एनएमडीसी ने क्षेत्र की इस अहम समस्या को पूरी गंभीरता से लिया है और उसके निराकरण का बीडा उठाया है। फलत: एनएमडीसी बस्तर संभाग के सभी जिले जनजातिय समाज के छात्र-छात्राओं के शैक्षिक विकास के अन्तर्गत छात्रवृति दे रही है। 
इसके साथ ही एनएमडीसी छात्राओं का निर्माण भी सर्वसुविधा युक्त उपलब्ध कराया है। ताकि जनजातिय बच्चे अपने परिवार की अर्थगत विंसगतियों से उपर उठकर अपनी लिए एक बेहतर भविष्य का ढांचा अपनी मंशा के अनुरुप गढ़ सकें। इसी क्रम में निगम ने शालाओं का निर्माण स्वयं के स्त्रोतों से करत हुए उसमें और भी नवीन निर्माणों को समाहित किया है। 

खनिज निगम ने गीदम क्षेत्र के अनाथ बच्चों के लिए शासन स्तर पर अपेक्षित आवासी विद्यलय की स्थापना भी है। वहीं कुआकोंडा में बालिका शिक्षा के उन्न्यन हेतु 24 करोड़ की लगत से एक आवासी विद्यालय निर्माण किया है। 
क्षेत्र के युवकों के निगम में कार्य का व रोजगार का अवसर सुलभ कराने हेतु भांसी में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था संस्थापित कर 5 ट्रेड में युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 

50 करोड़ की लगत से 80 सीटों वाली आवासीय शाला : 

निगम में जगदलपुर में मेडिकल कालेज की स्थापना में 50 करोड़ की सहायता मुहैय्या कराने की वचन बद्धता दिखलाई है, जिसमें ओर अब इसी कड़ी में नगरनार इस्पात संयंत्र क्षेत्र में प्रभावित ग्रामीणों के बच्चों व क्षेत्र के अन्य प्रतिभाशाली बच्चों के लिए एक 80 सीटों वाले आवासी शाला का शुभारंभ भी किया है। जहां प्रभावित गांवो के गैर छात्रावासी बच्चों के लिए भी शिक्षा की व्यवस्था सुलभ कराई जा रही है। वर्तमान में छात्रावास में उसी कक्षा तक के छात्रों को स्थान दिया गया है, जो कालानार में हायर सेकेण्डरी के रुप में योजनान्तर्गत विकसित किया जाएगा।

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