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देशभर में कोरोना के सामुदायिक प्रसार के कोई सबूत नहीं : AIIMS

यह जानकारी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने दी.

नई दिल्‍ली: एम्‍स ने देश में विकसित कोविड-19 के टीके ‘कोवैक्सीन’ के मानव परीक्षण के लिए सोमवार को वालंटियर्स की भर्ती शुरू कर दी. यह जानकारी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने दी. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कोविड-19 के सामुदायिक प्रसार को लेकर कोई अधिक साक्ष्य नहीं हैं लेकिन ”हॉटस्पॉट हैं, उन शहरों में भी जहां मामलों में वृद्धि हो रही है, ऐसी संभावना है कि उन क्षेत्रों में स्थानीय प्रसार हो रहा है.”

यह पूछे जाने पर कि क्या भारत में कोविड-19 के मामले चरम पर पहुंच गए हैं, गुलेरिया ने कहा, ”मेरा मानना है कि कुछ क्षेत्रों में ये चरम पर पहुंच गए हैं. दिल्ली में ऐसा प्रतीत होता है क्योंकि मामलों में महत्वपूर्ण ढंग से कमी आने लगी है. लेकिन कुछ क्षेत्रों में अभी इसे चरम पर पहुंचना बाकी है.” गुलेरिया ने कहा कि कुछ राज्यों में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, वे थोड़ा बाद में चरम पर पहुंचेंगे. दक्षिण में कुछ राज्यों, मध्य मुंबई और अहमदाबाद में कुछ स्थानों पर मामलों में कमी की शुरुआत प्रतीत होती है.

उन्होंने कहा, ”लेकिन चरम पर पहुंचने और फिर कमी शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि आप अपने प्रयासों में ढिलाई बरतने लगें. भारत के बाहर कई शहरों में, खासकर अमेरिका में जब लोगों को लगा कि मामलों के चरम पर पहुंचने की स्थिति खत्म हो गई है, उन्होंने भौतिक दूरी, मास्क पहनने के नियमों का उल्लंघन शुरू कर दिया और मामले फिर से बढ़ गए.”

मानव परीक्षण की अनुमति

‘कोवैक्सीन’ आईसीएमआर और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के सहयोग से हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा विकसित किया जा रहा है. भारत के औषधि महानियंत्रक ने हाल में टीके के मानव परीक्षण की अनुमति दे दी थी. यह पूछे जाने पर कि टीका कब उपलब्ध होगा, गुलेरिया ने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हर चीज सही ढंग से काम करे. उन्होंने कहा, ”संभव है कि हम कहें कि टीका सुरक्षित है और फिर हमें पता चले कि यह ज्यादा प्रभाव नहीं दे रहा तो हमें कुछ और अधिक करना होगा जिसमें कुछ महीने लग सकते हैं.”

गुलेरिया ने कहा, ”इसलिए टीका उपलब्ध होने का सही समय बताना मुश्किल काम है. यदि हर चीज ठीक से काम करती है तो साल के अंत तक या अगले साल के शुरू में हम यह कहने की स्थिति में हो सकते हैं कि हम टीके का निर्माण शुरू कर सकते हैं.” गुलेरिया ने कहा, ”मानव परीक्षण का चरण शुरू हो चुका है और यह बहुत ही प्रशंसनीय है क्योंकि यह स्वदेशी टीका है. भारत में हम अनुसंधान और विकास नहीं करते.”

उन्होंने कहा कि नया टीका बनाना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है ”और अब हम अनुसंधान तथा विकास के क्षेत्र में हैं, अपना स्वयं का टीका बना रहे हैं और फिर इसका व्यापक उत्पादन करने में सफल हो रहे हैं.” गुलेरिया ने कहा, ”व्यापक उत्पादन में हमारी स्थिति बहुत अच्छी है. कोई भी टीका यदि विश्व के किसी भी हिस्से से आता है तो भारत इसके उत्पादन में शामिल होगा क्योंकि विश्व के 60 प्रतिशत या इससे अधिक टीकों का निर्माण भारत में हो रहा है.”

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