मोदी के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के लिए फंड नहीं!

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के पास अब स्वच्छ भारत अभियान के लिए फंड नहीं है। यही कारण है कि सरकार ने सभी कंपनियों को चिट्ठी लिखकर सीएसआर यानी कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिल्टी फंड का 7 फीसदी हिस्सा स्वच्छ भारत कोष में जमा करने का सुझाव दिया है।

यह पहली बार है, जब सरकार की तरफ से कंपनियों को सीएसआर फंड का एक हिस्सा सीधे सरकारी कोष में जमा कराने का सुझाव दिया गया है।

 

कंपनियों को लिखा पत्र

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने सभी कंपनियों को पत्र लिख सीएसआर फंड का 7 फीसदी हिस्सा स्वच्छ भारत कोष में जमा कराने का सुझाव दिया है।

इसके साथ ही कंपनियां कर्मचारियों को स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दें और ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत सफाई के संदेश वाली होर्डिंग्स लगाएं।

कॉर्पोरेट मंत्रालय के सूत्रों का कहना है, ‘यह सुझाव मात्र है, कोई निर्देश नहीं। हमने सभी कंपनियों, चाहे वह सरकारी हो या निजी, सबसे सीएसआर को कुछ फीसदी स्वच्छ भारत फंड में देने को कहा है।

यह कंपनियों की इच्छा पर निर्भर है। वे चाहें तो दे सकती हैं।’ इससे पहले सरकार सभी सरकारी कंपनियों को ज्यादा लाभांश देने का निर्देश जारी कर चुकी है।

 

आखिर जरूरत क्यों?

 

सूत्रों के अनुसार, सरकार स्वच्छ भारत अभियान में तेजी लाना चाहती है। वह चाहती है कि इस अभियान के जो लक्ष्य तय किए गए थे, उसको लोकसभा चुनाव से पहले हासिल कर लिया जाए।

इसके लिए उसे अब भारी फंड की जरूरत है। गौरतलब है कि 2 अक्टूबर 2014 को लॉन्च हुए स्वच्छ भारत अभियान के तहत 2019 तक देश में 11 करोड़ शौचालय बनाने का लक्ष्य तय किया था, ताकि खुले में शौच की मजबूरी को खत्म किया जा सके।

हालांकि 2015 में इस अभियान के तहत सिर्फ 49 लाख शौचालय ही बनाए जा सके। 2016 में इस अभियान की रफ्तार काफी सुस्त रही।

एक अनुमान के अनुसार, इस दौरान भी 40 से 50 लाख ही शौचालय बनाए जा सके। सरकार 2017 और 2018 के दौरान कम से कम 2-2 करोड़ शौचालय बनाना चाहती है।

 

कॉर्पोरेट से अपील

सरकार ने कॉर्पोरेट से अपील की है कि वह स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांवों को गोद लें और सफाईकर्मियों के प्रशिक्षण में सहयोग दें। इसके साथ ही सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालें।

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