पद का नही कोई गुरुर, मानवता की मिसाल बना छुरा का थानेदार

- हितेश दीक्षित

गरियाबंद/छुरा: भीषण गर्मी ने सबको परेशान कर रखा है। सूर्य की तेज किरणें और आग उगल रही है जिसके कारण धरती का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार चल रहा है। दोपहर में गर्म हवाओं के कारण परेशानी और बढ़ रही है। भीषण गर्मी की स्थिति रही। धूप में निकला हर शख्स पसीना पोछता नजर आ रहा है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोगों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। मनुष्य के साथ पशु-पक्षियों की हालत भी खराब होने लगी है। तेज गर्मी के कारण चिड़ियों के मरने की भी खबर मिल रही है।

तो दूसरी तरफ पानी की तलाश में जंगली जानवर भी भटक रहे जिले के जंगल क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था नहीं है। गर्मी के कारण जंगल क्षेत्र के प्राकृतिक जलस्रोत सूख गए हैं। ऐसे में पानी की तलाश में जंगली-जानवरों को भटककर नगर कस्वे तक आना पड़ रहा है। मनुष्य को प्यास लगती है तो वह कहीं भी मांग कर पी लेता है, लेकिन मूक पशु पक्षियों को प्यास में तड़पना पड़ता है, हालांकि जब वे प्यासे होते हैं तो घरों के सामने दरवाजे पर आकर खड़े हो जाते हैं। कुछ लोग पानी पिला देते हैं तो कुछ लोग भगा भी देते है। इस गर्मी में पशु पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए लोगों को प्रयास करना चाहिए बताना लाजमी होगा कि

पुलिसकर्मियों के प्रति आम लोगों की सोच सकारात्मक नहीं रहती लोग पुलिस और थाने से हमेशा दूर रहने के लिए भगवान् से भी दुआएं करते हैं लेकिन छुरा पुलिस थाना में जब से युवा थानेदार के के वर्मा ने पदभार ग्रहण किया है तब से आम लोगों के मन में पुलिस के प्रति अब सकारात्मक सोच पैदा होने लगा है इस भीषण गर्मी में पुलिस स्टाफ राहगीरों को पानी पिलाने का काम शुरू किया है। थानेदार ने मानव के साथ साथ जीव जन्तुओं को पानी पिलाने के लिए भी हेण्डपम्प से पानी पिलाते है ऐसे पुण्य कार्य के लिये तीन स्टार की वर्दी का भी गुरुर नहीं रहता ब्लाक मुख्याल य के थाना छुरा में राहगीरों एवं नागरिको के लिए इस भीषण गर्मी में प्यास बुझाने के लिए थाना प्रभारी के के वर्मा एवं समस्त थाना स्टाफ के सहयोग से प्याऊ घर खोला गया है ।

आने जाने वालों के लिए प्यास बुझाने का यह एक अच्छी पहल है । राहगीर आते जाते इस प्याऊ घर से अपनी प्यास बुझाते नजर आते हैं इतना ही नही पशुओं की भी प्यास बुझाने में के के वर्मा और उनका पूरा पुलिस महकमा अपना गरियाबंद से छुरा मार्ग पर भगवान कचना धूर्बा मंदिर स्थित है जंहा इस भीषण गर्मी में जंगली जानवरों के लिये गरियाबंद आते जाते समय थानेदार के के वर्मा व अन्य छुरा पुलिसकर्मियों द्वारा मंदिर स्थित पानी टंकी में खुद बोरिंग से पानी भर देते है जिससे कई जीव व वन्य प्राणियों की प्यास बुझती है युवा थानेदार छुरा क्षेत्र के लिये एक प्रेरणा का स्रोत भी बनते जा रहे है लोगो मे चर्चा का विषय है कि मानवता कोई सीखे तो के के वर्मा से जो अपने बड़े पद पर आसीन होने पर भी सरल है। ज्ञात हो कि गर्मियों में कई परिंदों व पशुओं की मौत पानी की कमी के कारण हो जाती है। लोगों का थोड़ा सा प्रयास घरों के आस पास उड़ने वाले परिंदों की प्यास बुझाकर उनकी जिंदगी बचा सकता है।

क्या कहते है छुरा के थानेदार के के वर्मा

स्वयं जीना पशुता है – दूसरों को भी जीने देना ही मानव धर्म है:के. के. वर्मा।

जिओ और जीने दो, और जानवरों की तरह साथ जीते रहना, वैचारिक तथा व्यव्हारिक दृष्टि से एक दूसरे से भिन्न क्रियायें हैं। जानवर अपनी मनोवृति से ही एक दूसरे के साथ जीते रहते हैं और जैसे ही किसी निजि स्वार्थ के कारण उन्हें आवश्यक्ता पड़ती है तो वह अपने साथ रहने वाले जीव को मार के खा भी लेते हैं। धर्म-परायण, सभ्य मानवों ने दूसरों को भी जीने दो का लक्ष्य रख कर स्वेच्छा से कुछ नियम और प्रतिबन्ध अपने ऊपर लागू कर लिये हैं।

अपने शरीर और जीवन को बचाना सभी प्रणियों का स्वभाविक धर्म है। एक केंचुआ भी अपने आप को मृत्यु से बचाना चाहता है। सुशील गाय भी अपने बचाव के लिये सींगों से प्रहार करने को उद्यत हो उठती है। हिंसक पशु भोजन के लिये दूसरे जीवों को खा जाते हैं, यदि उन्हें किसी से भी खतरा होता है तो वह दूसरे जीव को अपने बचाव के लिये मार देते हैं ताकि वह स्वयं जी सकें।मानव भी पहले ऐसा ही था किन्तु धर्म-परायण मानव इस विषय में जानवरों से भिन्न होता गया।

मानव भोजन के लिये किसी जीव की हत्या करने के बजाये या तो भूख बर्दाश्त करने लगे या भोजन के कोई अन्य विकल्प ढूंडने में लग गये। यदि किसी जीव से मानवों को खतरा लगता है तो मानव अपने आप को किसी दूसरे तरीके से बचाने की कोशिश भी करते हैं। सभ्य मानव दूसरों को भी जीने देते हैं। दूसरों के लिये विचार तथा कर्म करना ही सभ्य मानव स्वभाव का मूलमंत्र है। जानवर और मानव में भिन्नता का आधार दूसरों के प्रति संवेदनशीलता और धर्म पालन है।

जियो और जीने दो

जैसे जैसे मानव समाज अधिक सभ्य और संवेदनशील होते गये मानवों ने मांसाहारी भोजन त्याग कर सात्विक तथा शाकाहारी भोजन को स्वेचछा से अपनाना शुरू कर दिया। शाकाहारी भोजन ही जीने दो के मानवी-संकल्प को पालन करने में सक्ष्म है। दूसरों को भी जीने दो का लक्ष्य साकार करने के लिये मानव नें निजि धर्म का निर्माण किया तथा अपने आप को नियम-बद्ध करने की परिक्रिया आरम्भ करी। उन नियमों को ही धर्म कहा गया है।

वैसे तो हमें प्रत्येक जीव के प्रति प्रेम दया भाव रखना चाहिए। मानवता का यही धर्म है। प्राचीनकाल में भी देवी-देवता के साथ किसी किसी पशु पक्षी का संबंध होना पशु संरक्षण का प्रतीक है। हमें पालतू पशुओं के साथ लावारिस पशुओं का भी ध्यान रखना चाहिए।

जानवरों और पक्षियों से इंसान का प्यार कोई नयी बात नहीं है। युगों से इंसान पशु-पक्षियों से प्यार करता रहा है। दुनिया में कई सारे लोग हैं, जो पक्षियों और जानवरों से बेहद प्यार करते हैं। कई लोगों ने कुत्ता, बिल्ली जैसे जानवरों को ऐसे अपना लिया है कि वे उन्हें अपने घर-परिवार का बेहद अहम हिस्सा मानते हैं।

Back to top button