किसी चमत्कार से कम नहीं – अलौकिक हैं ज्योतिषीय उपाय

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव

जगत में हर वस्तु जैसे धरती, जल, वायु, कीड़े-मकौड़े, पतंगा, जानवर, पत्थर, स्फटिक और धातु व रंग, खुशबू, आकार, गति, ग्रह व तारों में ऊर्जा होती है जो चमत्कार कर सकती है। चमत्कार आलौकिक या अस्वाभाविक नहीं बल्कि यह कुछ अलग, बहुत स्वाभाविक लेकिन प्रकृति से परे होता है। चमत्कार एक रत्न की तरह स्वाभाविक है और उतना ही सच्चा है जितने कि हम, हमारी सांसें और सूर्य जैसा शक्तिशाली। किसी खास समस्या के समाधान के लिए हम रत्न, रुद्राक्ष, मंत्र, यंत्र, तंत्र, यज्ञ, अनुष्ठान, स्तुति पाठ, शंख, ताबीज, अंगूठी, लाकेट, स्फटिक, पिरामिड या सिक्के का प्रयोग कर सकते हैं।

रत्न

रत्नों के चमत्कार का अर्थ है शक्ति का विकल्प के परिवर्तन के लिए प्रयोग। अब हम समझ सकते हैं कि रत्नों में गुप्त शक्तियां, किरणपात व ऊर्जा होती है। विभिन्न प्रकार के रत्नों में विभिन्न प्रकार की ऊर्जाएं होती है जो कि हमारे जीवन में बदलाव उत्पन्न करने में सक्षम हैं। रत्नों में अपने से संबंधित ग्रहों की रश्मियों, चुम्बकत्व शक्ति को खींचने की शक्ति के साथ-साथ उसे परावर्तित कर देने की भी शक्ति होती है। रत्न की इसी शक्ति के उपयोग के लिए इन्हें प्रयोग में लाया जाता है।

रुद्राक्ष

हमारे रत्नों के कोष हमारी जिस तरह से सहायता करते हैं, उसी तरह रुद्राक्ष में विद्युत चुंबकीय गुण होते हैं जो शरीर क्रिया विज्ञान पर प्रभाव डालते हैं। रुद्राक्ष कवच सबसे शक्तिशाली प्रतिकारक यंत्र होता
है क्योंकि यह व्यक्ति के सकारात्मक गुणों में वृद्धि करता है और हर नकारात्मक पक्ष को मिटाता है।

यंत्र

यंत्रों में गूढ़ शक्तियां होती है और ये हमारी रक्षा एक कवच की तरह करते हैं। महर्षि दत्तात्रेय को यंत्र का जनक माना जाता है जिन्होंने शिल्पकला और ज्यामितीय रेखांकन के द्वारा वृŸा, त्रिकोण, चाप, चतुष्कोण तथा षट्कोण को आधार मानकर बीज मंत्रों द्वारा इष्ट शक्ति को रेखांकित करके अति विशिष्ट दैवीय यंत्रों का आविष्कार किया। यंत्र इष्ट शक्ति को आबद्ध करने की सर्वोच्च विधि है। अतः यंत्र की पूजा-अर्चना से देवता शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं।

मंत्र

मंत्रोच्चारण हमारे अंदर ऊर्जा पैदा करता है और हमारे व्यक्तित्व व बुद्धि का विकास करता है। मंत्र का शाब्दिक अर्थ ‘‘म’’ से मन ‘‘त्र’’ से त्राण अर्थात् ‘‘मननात् त्रायतेति मंत्रः’’ मनन के द्वारा प्राणों
की रक्षा करने वाला। भारतीय हिंदू शास्त्रों में मंत्रों का बहुत महत्व बताया गया है।

मंत्र क्या है?

व्यक्ति की प्रसुप्त या विलुप्त शक्ति को जगाकर उसका दैवी शक्ति से सामंजस्य कराने वाला गूढ़ ज्ञान मंत्र कहलाता है। सद्गुरु की कृपा एवं मन को एकाग्र कर जब इसको जान लिया जाता है। तब यह साधक की मनोकामनाओं को पूरा करता है।

पद्धति

किसी विशिष्ट देवी देवता को समर्पित यंत्र के विभिन्न आवरणों के पूजा की संपूर्ण प्रक्रिया को पद्धति कहा जाता है। प्रत्येक देवी-देवता के नाम कोई न कोई विशेष यंत्र समर्पित है तथा इनके पूजा की प्रक्रिया के पहलू अति सूक्ष्म हैं जिसमें अत्यधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होती है। किसी यंत्र की विधिवत पूजा करने की सबसे पहली अर्हता है कि गुरु के द्वारा दिये गये मंत्र का कम से कम एक लाख 25 हजार जप किया जाय। यंत्र पूजा के द्वारा संदर्भित देवी-देवता की कृपा प्राप्त करने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है।

कवच

कवच का शाब्दिक अर्थ होता है सुरक्षा आवरण। इसके अंतर्गत किसी देवी अथवा देवता से संबंधित श्लोकों के द्वारा उस देवी देवता का आह्वान किया जाता है तथा कठिनाई के समय ये जातक को सुरक्षा प्रदान करते हैं।

सहस्रनाम

अपने इष्ट देवता के 1000 नामों का जप सहस्रनाम कहा जाता है। इस प्रकार के साहित्य हमें विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलते जिसमें कि श्लोकों एवं कविताओं के माध्यम से ईश्वर के नामों के जाप एवं स्मरण की ऐसी पद्धति हो जिसके अर्थ काफी गूढ़ महिमामयी एवं आकर्षक हों तथा जिसमें काव्यगत विशेषताओं को नजर अंदाज किया गया। इन स्तोत्रों के लयबद्ध स्वर सुनने में इतने मनभावन होते हैं कि इन्हें अवश्य सुनना चाहिए तथा इनका अनुभव प्राप्त करना चाहिए।

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