छत्तीसगढ़

कोरोना महामारी में दवा नहीं दारू आपके द्वार तक पहुंचाएगी सरकार..!

एक सेल्समेन आया कोरोना की चपेट में

हिमालय मुखर्जी ब्यूरो चीफ रायगढ़

घर-घर दारू पहुंचाने पर उठ रहे सवाल, 1 सेल्समेन आया पॉजिटिव राज्य में शराबबंदी का आवाज बुलंद कर के सत्ता में आई कांग्रेस पार्टी अपने डेढ़ साल के कार्यकाल के बाद भी अगर शराबबंदी नहीं कर पा रही है तो इसे छलावा कहेंगे या फिर बस एक कार्यकाल की सरकार।

कोरोना संक्रमण के दौर में जहां सिर्फ जरूरत की चीजों को नियत समय में ही बेचने का फरमान है। जब इन जरूरत की चीजों में शराब भी शामिल हो तो सरकार की मंशा पर सवाल जायज है।

अनलॉक में रविवार लॉकडाउन था फिर भी शराब दुकानों पर बिकी जबकि सामान्य दवा दुकानें बंद थी। अफरशाही खामोश है क्योंकि राजशाही हावी है। पैसा कैसे भी कमाना है फिर वो जान ही क्यों न बेचना हो।

अब जब 7 दिनों का लॉकडाउन लगा है तब भी शराब बिक रही है ऑनलाइन डिलीवरी यानी शराब आपके द्वार सिर्फ प्रति ऑर्डर ५0 रूपये प्रति बोतल ज्यादा दीजिए औऱ मनमानिफ दारू 4 बोतल तक हाजिर है। आबकारी विभाग के अधिकारी सभी पत्रकारों से आग्रह कर रहे हैं कि शराब बिक रही है बंद नहीं है सिर्फ ऑनलाइन, नौसिखियों को सिखाने के लिए बाकायदा यू-ट्यूब लिंक भी दे रहे हैं। सवाल यह है कि महामारी के समय में दारू की बिक्री करवाने वाला यह पब्लिसिटी स्टंट किसकी उपज है आलाकमान की या फिर जिला आबकारी विभाग की।

एक सेल्समेन आया कोरोना की चपेट में

इसी लॉक डाऊन के दूसरे दिन सरकारी शराब दुकान का एक कर्मचारी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुका है। इस खबर से ही शराब दुकानों के दूसरे सेल्समेन सकते में आ गये हैं। एक तो उन्हें सही समय पर वेतन का भुगतान नहीं मिलता, दूसरे होम डिलीवरी जैसे अतिरिक्त कार्य के लिये भी उन्हें कुछ नहीं दिया जाता। ऐसी स्थिति में आखिर क्यों अपनी जान हथेली में लेकर लोगों के घरों तक दो चार बोतल शराब पहुंचाने की जोखिम लेंगे। फिलहाल वे खुलकर कुछ भले ही न कह पा रहे हो, लेकिन उनके भीतर ही भीतर असंतोष की आग सुलगने लगी है।

दो प्रतिशत बिक्री और कई जिंदगियां दांव पर

इस लॉक डाऊन में पहले और दूसरे दिन ऑनलाईन शराब बिक्री के आंकड़े पर नजर डाले तो पता चलता है कि जिन दुकानों से आम समय में 10 लाख से अधिक की बिक्री होती थी वहां बमुश्किल 15-20 हजार रुपये का ऑडर निकल पा रहा है। ऐसे में सिर्फ 02 प्रतिशत शराब बेचकर सरकार कई जिंदगियों को महामारी के खतरे में जानबूझ कर डाल रही है। सभी सरकारी शराब दुकानों के सेल्समेन डरे हुए हैं कि कब उन्हें कोरोना अपने आगोश में ले ले।

महज 10-15 हजार रुपये की बिक्री के लिये सरकार अपने ही कर्मचारियों की जिंदगी दांव पर लगाकर आखिर क्या जाहिर करना चाहती है। क्या ऑनलाईन डिलीवरी जरूरी है, कि उसके लिये कई जिंदगियां दाव पर लगा दी जायें। सवाल यह उठता है कि शराबबंदी के वादे के साथ सत्ता पर आई मौजूदा सरकार के लिये शराब इतनी जरूरी चीज हो गई है कि उसे घर-घर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही हैं।

रायगढ़ में जिस तरह कोरोना का संक्रमण फैल रहा है उसे देखते हुए होम डिलीवरी के लिये लोगों के घर जाने वाले शराब दुकानों के सेल्समेन क्या इस राज्य के नागरिक नहीं हैं? क्या शराब से सरकार को मिलने वाले मुनाफे से भी उनकी जान सस्ती है? इन सवालों का जवाब कौन देगा? जिला प्रशासन या छत्तीसगढ़ शासन।

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