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नहीं मिले ताबूत उठाने वाले, मृत पारसी व्यक्ति को नहीं मिल सकी रिवाजों के साथ विदाई

कोलकाता के रहने वाले एक पारसी व्यक्ति का उसके परिवार की इच्छा के बावजूद मौत के बाद पारंपरिक तरीके से अंतिम संस्कार नहीं हो सका।

ताबूत उठाने वाले नहीं मिलने से पारसी समुदाय के द्वारा सदियों से उल्लास से मनाए जाने वाली विदाई रस्म की बजाय मृतक का शवदाह किया गया।

55 साल के मानेकशॉ भेसानिया की मौत 4 अक्टूबर को हो गई थी। उनके परिजन उनका अंतिम संस्कार बेलियाघाटा स्थित टॉवर ऑफ साइलेंस में करना चाहते थे।

लेकिन ताबूत उठाने के लिए 24 घंटे के अंदर पारसी समुदाय के युवकों के नहीं मिलने से किओराताला में उनका शवदाह करना पड़ा।

इस खबर से पारसी समुदाय में काफी आक्रोश है। इस वजह से कोलकाता के पारसी समुदाय के धार्मिक और चैरिटी फंड (CZCRCF) को इसके लिए असहायता का हवाला देते हुए माफी मांगनी पड़ी।

कोलकाता में एक समय अच्छी खासी तादाद में मौजूद पारसी समुदाय की संख्या घटकर 500 से भी कम ही रह गई है।

रिवाज के अनुसार अंतिम विदाई के लिए शरीर को टॉवर ऑफ साइलेंस में ले जाने से पहले रावनगाह में ही गैर-पारसी को जाने की अनुमति है।

लेकिन एक बार शरीर के धुल जाने के बाद केवल पारसी ही मृतक के चेहरे को देख सकता है।

इस पर पारसी समुदाय के लोगों में रोष है। समुदाय के ही सीनियर व्यक्ति मेहर एच मेहता ने कहा, ‘यह बहुत ही खराब बात है।

जो कारण बताए जा रहे हैं, वो बहुत ही अटपटे से हैं। इसपर ध्यान दिया जाना चाहिए, केवल चिंता जाहिर कर देने से ही बात नहीं बनेगी।

इससे समुदाय के लोगों में निश्चित तौर पर गुस्सा है। मृतक की मां पर क्या बीत रही होगा, जिसके बेटे को रिवाज के अनुसार अंतिम विदाई भी नहीं मिल सकी।’

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