असम की भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने मेरे खिलाफ निराधार आरोप लगाए : अखिल गोगोई

गोगोई ने केंद्र सरकार के हिंदू बांग्लादेशी लोगों को नागरिकता देने के लिए नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 को पारित करने के खिलाफ बड़े स्तर पर आंदोलन करने की बात कही.

गुवाहाटी: असम के किसान नेता व आरटीआई कार्यकर्ता अखिल गोगोई बुधवार को जिला जेल से जमानत पर रिहा हो गए. गोगोई ने केंद्र सरकार के हिंदू बांग्लादेशी लोगों को नागरिकता देने के लिए नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 को पारित करने के खिलाफ बड़े स्तर पर आंदोलन करने की बात कही.

गोगोई ने गोलपाड़ा जिला जेल के बाहर इंतजार कर रहे मीडिया से कहा, ‘मैं आज जेल से बाहर आकर खुश हूं. असम की भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने मेरे खिलाफ निराधार आरोप लगाए थे और इसी वजह से गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत के आदेश को खारिज कर दिया.’

मोरन में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करने के बाद असम पुलिस ने गोगोई को राजद्रोह के आरोप में 23 सितंबर को गिरफ्तार किया था. गोगोई पर 24 सितंबर को रासुका के तहत मामला दर्ज किया गया.

गोगोई किसानों की संस्था कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के प्रमुख हैं. केएमएसएस ने रासुका के तहत हिरासत के आदेश को चुनौती दी थी और गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने गोगोई के वकील द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद हिरासत के आदेश को खारिज कर दिया.

हालांकि, उच्च न्यायालय के आदेश के तुरंत बाद गोलपाड़ा पुलिस ने गोगोई को गिरफ्तार कर लिया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया. गोलपाड़ा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने मंगलवार को मामले की सुनवाई के बाद गोगोई को जमानत दे दी.

उन्होंने कहा, ‘असम सरकार ने मुझ पर उल्फा व माओवादियों से संबंध होने का आरोप लगाया व मुझे रासुका के तहत फंसाया गया.

हालांकि, वे यह अदालत में साबित करने में नाकामयाब रहे और इसलिए अदालत ने मुझे बरी कर दिया.’ अखिल ने कहा, ‘हम संसद में नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 पारित करने के कदम का विरोध करने जा रहे हैं.’

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