नहीं रहे बांग्ला कवि नीरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती, 94 साल के उम्र में निधन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दुख व्यक्त किया

कोलकाता: 1974 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित मशहूर बंगाली कवि नीरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती अब नहीं रहे. सांस लेने में तकलीफ सहित उम्र संबंधी बीमारियों के चलते 94 साल के बंगला कवि का अस्पताल में सोमवार देर रात निधन हो गया.

चक्रवर्ती के परिवार में उनकी दो बेटियां हैं. उनके पत्नी का इस साल जनवरी में निधन हो गया था. अविभाजित बंगाल के फरीदपुर में 1924 को जन्मे चक्रवर्ती आधुनिक बंगाली साहित्य के क्षेत्र में एक प्रमुख व्यक्ति थे.

कविता की उनकी पहली पुस्तक ‘नील निर्जन’ 1954 में उस समय प्रकाशित हुई थी जब वह 30 साल के थे. सामाजिक ताने-बाने का मखौल बनाने वाली उनकी कविता ‘उलंगा राजा’ (नंगा राजा) के लिए उन्हें 1974 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

चक्रवर्ती ने 47 से अधिक पुस्तक लिखी थी जिसमें से अधिकांश बच्चों की थी. इसके अलावा उन्होंने 12 उपन्यास और विभिन्न मुद्दों पर कई आलेख लिखे थे. उनके निधन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दुख व्यक्त किया है.

राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने भी दिग्गज कवि को श्रद्धांजलि दी है. कवि सुबोध सरकार ने चक्रवर्ती के निधन को एक ‘बड़ी व्यक्तिगत क्षति’ करार दिया.

जाने-माने लेखक शिरशेंदु मुखोपाध्याय ने याद किया है कि कैसे चक्रवर्ती ने बच्चों की एक पत्रिका के संपादक के तौर पर उन्हें गल्प लिखने के लिए प्रेरित किया. मुखोपाध्याय ने उनके निधन से ‘शून्य पैदा’ होने की बात कही है.

लोगों के अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए चक्रवर्ती का पार्थिव शरीर यहां रविन्द्र सदन में शाम तक रखा जाएगा. उनके निधन पर लेखक नवनीता देव सेन और कवि शंखा घोष ने भी शोक व्यक्त किया.

मंत्री ने कहा कि इसके बाद उनका शव कुछ देर के लिए उनके आवास पर रखा जाएगा और इसके बाद तोप की सलामी के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

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