थम नहीं रहा अतिक्रमण, वन अधिकार मान्यता से बढ़ी मुसीबत, नींद में वन विभाग

राज शार्दूल:

विश्रामपुरी: वन भूमि पर अतिक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है अतिक्रमण कारी जंगल के साल एवं अन्य बेशकीमती भारी-भरकम इमारती वृक्षों को भी सुनियोजित तरीके से काटने में लगे हैं। प्रति वर्ष सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा हो रहा है जिसके चलते कई जगहों पर वनभूमि वीरान दिखाई दे रहा है। गश्त के नाम पर वन विभाग के अधिकारी चार पहिया वाहनों से सड़कों पर निकलते हैं।

सड़क किनारे के जंगल तो सुरक्षित होने के कारण ठीक है किन्तु अंदरूनी क्षेत्रों में हालात कुछ और ही है। जिले के कोण्डागांव एवं केशकाल वन मंडल के कुछ परिक्षेत्र अतिक्रमण एवं अवैध कटाई के लिए हमेशा ही चर्चा में रहते हैं। जिसमें कोंडागांव अनुमंडल के अमरावती, माकड़ी, मर्दापाल, दहिकोंगा एवं केशकाल वन मंडल का बडेराजपुर अतिक्रमण के लिए जाना जाता है।

खानापूर्ति में लगा रहता है वन विभाग

एक तरफ सैकड़ों एकड़ वन भूमि अतिक्रमणकारियों के कब्जे में चला जाता है वहीं वन विभाग कुछ एकड़ वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने का दावा करते हुए कागजी खानापूर्ति में जुटा रहता है।

वन विभाग एवं अतिक्रमणकारियों के बीच आंख मिचौली

अतिक्रमण कारी ग्रामीणों को वन भूमि से हटाने में वन विभाग के पसीने छूटते हैं वन ग्रामीणों की मानें तो अतिक्रमण के लिए वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी भी कम जिम्मेदार नहीं हैं वन विभाग के निचले कर्मचारियों के मिलीभगत के चलते ही अतिक्रमण बढ़ रहा है।

जब ग्रामीण जंगल में वृक्षों को काटकर वन भूमि को मरहान में बदलने की कवायद में लगा रहता है तब तक वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी खामोश रहते हैं किंतु कहीं मामला गरमाता है तभी वन कर्मियों की नींद खुलती है। तब तक ग्रामीणों से बरसों का अपना कब्जा बताकर जमीन खाली करना नहीं चाहता फिर वन कर्मियों एवं ग्रामीणों के बीच रस्साकशी शुरू हो जाती है।

आग के हवाले कर देते हैं हरे भरे वृक्ष

वन अधिकार पट्टा के चलते ग्रामीण इमारती लकड़ियों की भी बलि चढ़ा देते हैं। ग्रामीण साल, वीजा, सागौन आदि के कीमती वृक्षों को काटकर टुकड़े-टुकड़े कर देते हैं तथा कहीं-कहीं जला भी देते हैं। भारी भरकम वृक्षों को काटने एवं तनों को हटाने में काफी समय लग जाता है जिससे बचने के लिए ग्रामीण पेड़ के निचले भाग में जड़ के पास आग लगाकर हरे भरे वृक्षों को आग के हवाले कर देते हैं जो धीरे-धीरे सुलगता रहता है तथा बाद में वृक्ष धराशाई हो जाता है फिर बड़े हिस्सों को पुनः जला दिया जाता है या तना को काटकर ग्रामीण या तो अपने घर ले जाते हैं या किसी को बेच देते हैं।

माकड़ी परीक्षेत्र अन्तर्गत माकड़ी से गम्हरी के बीच मुख्य मार्ग पर सड़क से लगे हुए जंगल में ऐसे दृश्य देखे जा सकते हैं। जब सड़क के किनारे ही ऐसी स्थिति है तो जंगल के अंदरूनी हिस्सों की क्या स्थिति होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जंगल के अंदर कुछ दूर तक जाने पर वन विभाग की कलई खुल जाती है।

मुख्यालय में नहीं रहते वन परिक्षेत्र अधिकारी

कोंडा गांव दक्षिण वन मंडल के अंतर्गत 7 वन परिक्षेत्र आते हैं जिसमें सभी परिक्षेत्र अधिकारी अपने परिक्षेत्र को छोड़कर कोंडागांव जिला मुख्यालय को ही अपना मुख्यालय बनाकर अपनी सुविधानुसार रह रहे हैं। वन परिक्षेत्राधिकारी जंगल को भगवान भरोसे छोड़ दिए हैं यही कारण है कि वन विभाग के निचले स्तर के कर्मचारी लापरवाह दिखाई देते हैं। वन परिक्षेत्र अधिकारियों की लापरवाही के चलते ही अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है तथा वनों की अवैध कटाई नहीं रुक पा रही है।

अतिक्रमण के खिलाफ कागजी कार्यवाही

अतिक्रमण सैकड़ों एकड़ में होता है किंतु वन विभाग के अधिकारी इसे कुछ एकड़ में अतिक्रमण बता कर शासन को गुमराह कर कागजी खानापूर्ति करते हैं दक्षिण कोंडागांव वनमंडल में सन 2017 में कुल 9.970 हेक्टेयर में अतिक्रमण बताया गया जिसमें 36 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए। वहीं सन 2018 में 37 प्रकरणों में 75 व्यक्तियों के खिलाफ अतिक्रमण का प्रकरण दर्ज किया गया जिसमें 4.28 हेक्टेयर मैं कुल अतिक्रमण पाया गया। अतिक्रमण से बेदखली हेतु अब तक कुल 854 प्रकरण दर्ज किए गए हैं जिसका रकबा 2434.669 हेक्टेयर है जहां और 4483 व्यक्तियों को बेदखल किया जाना है।

जिले में प्रथम एवं द्वितीय चरण मे वितरित वन आधिकार मान्यता पत्र 05 जनवरी 2019 तक की स्थिति में

कुल आवेदन 19438, कुल रकबा 14512.686 हेक्टेयर

कुल मान्य आवेदन 9186, रकबा 11942 .84हेक्टेयर

अमान्य आवेदन की संख्या 10212 एवं अमान्यआवेदन का कुल रकबा 9953.507 हेक्टेयर

कुल 9186 व्यक्तियों को वन अधिकार मान्यता पत्र दिया गया। जिसका कुल रकबा 11942.84 हेक्टेयर था।

इसी प्रकार सामुदायिक अधिकार पट्टा के लिए कुल 489 आवेदन प्राप्त हुए थे जिसका रकबा 19453.90 हेक्टेयर के लिए सामुदायिक अधिकार पट्टा प्रदान किया गया।

अतिक्रमण के खिलाफ सतत कार्यवाही चलती रहती है: डीएफओ

कोण्डागांव वन मंडल के वन मंडलाधिकारी बीएस ठाकुर के अनुसार वन अधिकार पट्टा सिर्फ उन्हीं लोगों को दिया जाता है जो 13 दिसंबर 2005 से पहले वन भूमि पर काबिज हैं। अवैध रूप से वन भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ निरंतर कार्यवाही चलती रहती है।

ठाकुर ने यह भी कहा कि विभागीय अमला अतिक्रमण एवं अवैध कटाई रोकने का पूरा प्रयास करता है किंतु कई जगह भौगोलिक एवं स्थानीय परिस्थितियों के चलते विषम परिस्थिति का भी सामना करना पड़ता है किन्तु वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी पूरी ताकत के साथ जुटे रहते हैं।

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