ग्लैमर नहीं, ज्ञान को देखकर आईए – आलोक मेहता

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के सत्रारंभ कार्यक्रम समारोह का समापन

भोपाल : वरिष्ठ पत्रकार पद्मआलोक मेहता ने कहा कि मीडिया में जाने वाले विद्यार्थियों को ग्लैमर देख कर के इस क्षेत्र में नहीं जाना चाहिए। बल्कि ज्ञान को ध्यान में रखकर आना चाहिए। टीवी, रेडियो और प्रिंट मीडिया एक-दूसरे के प्रतियोगी नहीं है, बल्कि पूरक हैं। मीडिया में हर समय चुनौती रही है, आगे भी रहेगी।

मेहता माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सत्रारंभ कार्यक्रम के समापन सत्र में ‘प्रिंट मीडिया का भविष्य’ विषय पर विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे। उन्होंने कहा प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का सबसे बड़ा खतरा नक़ल की होड़ है। प्रिंट मीडिया का भविष्य असुरक्षित नहीं है। जब टेलीविजन आया उस समय भी इस तरह के सवाल उठे लेकिन आज भी मुद्रित माध्यमों को पढ़ा और पसंद किया जा रहा है। हमारे सामने चुनौतियां ज़रूर हैं। आर्थिक संकट भी है लेकिन निराशा की ज़रूरत नहीं है।

पत्रकारिता के छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा प्रिंट के अच्छे भविष्य के लिए बेहतर विज्ञापन कॉपी लिखना सीखना चाहिए। आज कई विदेशी कम्पनियां देश में निवेश कर रही हैं, उन्हें हिंदी में विज्ञापन की ज़रूरत है। पत्रकारिता के विद्यार्थियों को विज्ञापन कॉपी लिखना भी आना चाहिए।

समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति जगदीश उपासने कहा कि पत्रकारिता में जाने के लिए मानसिक और शारीरिक तैयारी दोनों आवश्यक है। हमको 18 घंटे काम करने की क्षमता पैदा करनी पड़ेगी। आज आवश्यकता है कि हम इंट्रेस्टेड, पेशनेट, स्किल्ड और कनेक्टेड रहें। समाज से हमें रियल टाइम और लाइव कनेक्टेड रहना पड़ेगा। मंच पर कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा भी उपस्थित थे। कुलपति उपासने ने शॉल,श्रीफल भेंटकर मेहता को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी ने किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित मीडिया नवचिंतन पत्रिका के नवीन अंक, मीडिया प्रबंधन विभाग द्वारा अटल प्रबंधन वाणी, सत्रारंभ पर केन्द्रित आंतरिक समाचार पत्र सत्रारंभ-2018 का विमोचन किया गया।

सृजनात्मक लेखन के लिए संवेदनशीलता, भिन्न दृष्टिकोण जरूरी- ज्ञान चतुर्वेदी

लेखन में सृजनात्मकता तभी संभव है जब हम अपने वातावरण को विभिन्न दृष्टिकोण से देखें। संवेदनशील बनें। किताबी परिभाषाएं पढ़कर सृजन संभव नहीं है. अगर हमें जीवन के बारे में लिखना है तो जीवन में उतरना होगा, उसको आत्मसात करना होगा। इसके लिए एक सृजनात्मक लेखक में परकायाप्रवेश और भावप्रवेश की कला होनी चाहिए।

चतुर्वेदी ने यह बात सत्रारंभ कार्यक्रम के द्वितीय दिवस को ‘सृजनात्मक लेखन’ विषय पर चर्चा करते हुए कही। चतुर्वेदी ने कहा कि गंगा की गहराई को समझने के लिए हमें गंगा में उतरना होगा। पुल पर खड़े होकर हम गंगा की गहराई नहीं माप सकते। लेखन के लिए हम अपनी प्राथमिकता तय करें। रचनात्मक लेखन में सौन्दर्य तभी डाला जा सकता है जब हम मनसा, वाचा, कर्मणा लेखन में डूब जाएं। सिर्फ शब्दों का मायाजाल पसारकर सार्थक लेखन संभव नहीं है. लेखन में जान तभी आती है जब उसकी संवेदना को आत्मसात किया जाए।

उन्होंने कहा कि भाषा गहनें है वे शरीर नहीं है, इसलिए विचार महत्वपूर्ण है। स्वयं लेखन को ही तय करना होता है कि उसके लेख के लिए कौन-सी भाषा उपयुक्त होगी। लेखन के लिए मुमुक्षा होना आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विभागाध्यक्ष प्रो. श्रीकांत सिंह ने किया।

मीडिया उद्यम के लिए कंटेंट विशेषज्ञ होना आवश्यक – राच

‘मीडिया उद्यमिता’ विषय पर हेतल राच ने कहा कि मीडिया उद्यम में सफलता के लिए कंटेंट का विशेषज्ञ होना आवश्यक है। जो डाटा तीन साल पहले अत्यंत महंगा था वो आज एक जीबी डाटा प्रतिदिन सस्ते में मिल रहा है। नए उद्यमी को केवल उस डाटा में अपना हिस्सा तय करना है। नए ग्राहक तलाशने की जरूरत है। इसी सत्र में अद्वितीया सिन्हा ने ‘सोशल मीडिया शोध’ को लेकर के विद्यार्थियों को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर लोगों के द्वारा पोस्ट किये जा रहे संदेशों का विश्लेषण किया जा सकता है, इसके लिए ऑनलाइन टूल उपलब्ध है। उन्होंने ट्वीटर की केस स्टडी के माध्यम से बताया कि किस तरह से सोशल मीडिया के ट्वीट्स पर सेंटीमेंटल ऐनालिसिस किया जा सकता है।

सभी सोशल मीडिया माध्यम हमारी इस निजी जानकारी का विश्लेषण करते हैं और रुचि के अनुरूप हमें ऑनलाइन विज्ञापन दिखाते हैं। सत्र का संचालन प्रो. अनुराग सीठा ने किया।

उद्यम के लिए अवसर तलाशें – गर्ग

‘मीडिया उद्यमिता और युवा’ विषय पर प्रबंधन विशेषज्ञ अभिषेक गर्ग ने बताया कि उद्यमिता और व्यापार के बीच में बड़ा अंतर है। उद्यमिता में उद्यमिता केल्क्युलेटेड रिस्क लेता है, उद्यम करने वाला व्यक्ति हमेशा अवसर देखता है। आज सभी उद्यमी वेल्यू क्रियेशन का कार्य कर रहे हैं, उन्हें बहुत बड़ा लाभ भले ही न हो। कई कंपनियों ने स्टार्टअप के लिए फंड बनाये हुए हैं और वे उसे देते भी हैं। सत्र का संचालन प्रो. मनीष माहेश्वरी ने किया।

रैगिंग से दूर रहें – प्रो. श्रीवास्तव

सत्रारंभ के छठवें सत्र में ‘प्रवेश, अनुशासन और रैगिंग’ विषय पर विज्ञापन एवं जनसम्पर्क विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ पवित्र श्रीवास्तव ने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा पारदर्शी है। आज हम सर्टिफिकेट कोर्स से लेकर डॉक्टरेट तक के कोर्स चला रहे है। रैंगिग पर बोलते हुए कहा कि हमारे परिसर में इस तरह का कोई माहौल नही है। फ़िर भी सभी छात्रों को इसके बारे में जानकारी जरूरी है। किसी छात्र को डराना, धमकाना, परिचय के नाम पर कक्षा में बाध्यता पैदा करना, यौन व शारीरिक शोषण, मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न, आत्मविश्वास को तोड़ना जैसी सभी गतिविधियाँ रैंगिग के दायरे में आती है जिनसे छात्रों को सावधान व दूर रहना है।

विद्यार्थी का सम्पूर्ण विकास ही हमारा उद्देश्य – प्रो. द्विवेदी

सत्रारंभ सत्र के द्वितीय दिवस में कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी ने नव प्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के इतिहास से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी का सम्पूर्ण विकास करना ही विश्वविद्यालय का उद्देश्य है। नीति आयोग के सहयोग से देश का पहला इन्क्यूबेशन सेंटर विश्वविद्यालय में स्थापित किया गया है। भोपाल के बिशनखेड़ी में 50 एकड़ भूमि पर विश्वविद्यालय का आधुनिक तकनीक से युक्त शैक्षणिक एवं आवासीय परिसर का निर्माण किया जा रहा है। इसी सत्र में ‘पारस्परिक संबंध’ विषय पर पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. राखी तिवारी ने कहा कि आज युवाओं के सामने ज्यादा चुनौतियां हैं। इस कारण संबंधों को लेकर के प्रतिबद्धता का अभाव है। उन्होंने एक सर्वे का उल्लेख करते हुए कहा कि मन, वाणी और कर्म से यदि हम पारदर्शिता और ईमानदारी रखेंगे तो पारस्परिक संबंध हमेशा ठीक रहेंगे। ‘परीक्षा’ विषय को लेकर परीक्षा नियंत्रक, डॉ. राजेश पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रदेश में पहला ऐसा विश्वविद्यालय है, जिसने पहला राष्ट्रीय अकादमिक डिपॉजिटरी के लिए पंजीयन शुरू कर दिये हैं। सभी विद्यार्थियों को इसमें अपना पंजीयन कराना आवश्यक है।

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