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चीन ने ही भारत के सैनिक नहीं लौटाए, बल्कि भारत ने भी चीन के सैनिक लौटाए: वीके सिंह

केंद्रीय मंत्री और पूर्व आर्मी चीफ ने किया सनसनीखेज खुलासा

नई दिल्ली: भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बारे में केंद्रीय मंत्री और पूर्व आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने कुछ भारतीय सैनिकों को पकड़ा था और उन्हें लौटाया है। इसी तरह हमने भी चीन के कुछ सैनिकों को पकड़ा था और फिर उन्हें छोड़ दिया गया।‘

झड़प में चीन के दोगुने सैनिक मारे गए

उन्होंने साथ ही कहा इस झड़प में चीन के दोगुने सैनिक मारे गए हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारे 20 शहीद हुए हैं तो चीन के इससे ज्यादा सैनिक मारे गए हैं लेकिन चीन यह नहीं बताएगा। वहां हर चीज को छिपाया जाते हैं। वहां चीन के दोगुने से ज्यादा सैनिक मारे गए हैं। हमारे सैनिकों ने बदला लेकर शहादत दी है।‘

उल्लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख सीमा पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच कई दिनों से जारी तनातनी 15 जून की रात हिंसक झड़प में बदल गई थी। इसमें एक कर्नल समेत भारतीय सेना के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए।

चीन को भी इसमें भारी नुकसान हुआ और उसके 43 सैनिक हताहत हुए। लेकिन चीन ने आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है। इस घटना के बाद से दोनों देशों के बीच सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

झगड़े की जड़ पेट्रोल पॉइंट 14

गलवान घाटी में मौजूदा स्थिति के बारे में पूर्व आर्मी चीफ ने कहा कि गलवान घाटी का जो इलाका भारत के पास था, वो अब भी हमारे पास है। उन्होंने कहा, ‘झगड़े की जड़ पेट्रोल पॉइंट 14 है जो अब भी भारत के नियंत्रण में है। गलवान घाटी का एक हिस्सा उनके पास है और एक हिस्सा अब भी हमारे पास है। चीन 1962 से वहां बैठा है लेकिन हम भी वहां से नहीं हिले हैं।‘

उन्होंने कहा, ‘हम अपनी तरफ थे और वे अपनी तरफ। फिर कोई हमारी तरफ से उधर गया और कोई वहां से इधर आया। हमें यह सब जानकारी साझा करने की जरूरत नहीं है क्योंकि हर किसी को यह जानने की जरूरत नहीं है।‘

चीनी सेना ने गलवान घाटी की ऊंचाई वाले इलाके में एक संकरे पहाड़ी रास्ते पर निगरानी चौकी स्थापित कर ली थी। चीनी सैनिकों ने ऐसा तब किया जब मिलिट्री कमांडर लेवल की मीटिंग में दोनों पक्षों के पीछे हटने पर सहमति बनी थी।

सूत्रों के मुताबिक दिवंगत कर्नल बी संतोष बाबू के नेतृत्व में भारतीय सैनिकों ने गलवान नदी के दक्षिणी तट पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय क्षेत्र में चौकी बनाने पर कड़ी आपत्ति जताई और सोमवार शाम को उसे हटाने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों सेनाओं के बीच झड़प हुई जो पिछले पांच दशक में सबसे बड़े सैन्य टकराव था।

पूर्वी लद्दाख में एलएसी के करीब स्थित गलवान घाटी क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है। इस इलाके में एलएसी पर कोई विवाद नहीं रहा है, लेकिन चीन अब पूरी गलवान घाटी पर अपना दावा जता रहा है।

चीन को आशंका है कि इस इलाके में भारत की मजबूत स्थिति से उसकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। गलवान सेक्टर बेहद संवेदनशील है, क्योंकि एलएसी के नजदीक डीएस-डीबीओ रोड से जुड़ता है।

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