तीन मूर्ति भवन से जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड हटाने का नोटिस

सोनिया गांधी हैं चेयरपर्सन, 1967 से है कब्जा

नई दिल्ली :

देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु की यादों को देश ने आज तक सहेजकर रखा है। लेकिन अब केन्द्र की मोदी सरकार ने जवाहरलाल नेहरु मेमोरियल फंड पर अपनी आंखें टेढ़ी कर ली हैं।

बता दें कि सरकार ने जवाहरलाल नेहरु मेमोरियल फंड , जो कि नेहरु मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी की इमारत से संचालित होता है, उसे जगह खाली करने का नोटिस दे दिया है।

बता दें कि जवाहरलाल नेहरु मेमोरियल फंड की मौजूदा चेयरपर्सन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं। 11 सितंबर को आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने जेएनएमएफ को 24 सितंबर तक बिल्डिंग खाली करने का नोटिस दिया था।

नोटिस में जेएनएमएफ के प्रशासनिक सचिव डॉ. बालकृष्णनन को संबोधित करते हुए कहा गया है कि जेएनएमएफ ने अनाधिकृत रूप से तीन मूर्ति भवन के एक हिस्से पर साल 1967 से कब्जा किया हुआ है।

वहीं जेएनएमएफ सचिव सुमन दूबे का कहना कि तीन मूर्ति भवन में हमने अवैध रूप से कब्जा नहीं जमाया है, बल्कि 51 साल पहले नेहरु मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी ने हमें प्रक्रिया के तहत तीन मूर्ति भवन में हमें जगह दी थी। हम आधी सदी तक नेहरु मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के सहयोगी रहे हैं। यह कोई एकतरफा संबंध नहीं है।

उल्लेखनीय है कि बीती 6 जून को नेहरु मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी की एक एग्जीक्यूटिव मीटिंग हुई थी, जिसमें नेहरु मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के निदेशक शक्ति सिन्हा ने तीन मूर्ति भवन में जेएनएमएफ के अनाधिकृत कब्जे का मुद्दा उठाया था।

उन्होंने नेहरु मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के लिए जगह की कमी बताई थी। इसके बाद 14 जून को सिन्हा ने आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर तीन मूर्ति भवन से अनाधिकृत कब्जा हटाने की मांग की थी।

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