सीआरपीएफ के घायल जवान मनोज सिंह के मामले में जारी किया नोटिस

छत्तीसगढ़ के गृहसचिव से महीने भर में मांगा जवाब

रायपुर। साल 2014 में छत्तीसगढ़ के सुकमा नक्सली मुठभेड़ में घायल सीआरपीएफ के जवान मनोज सिंह तोमर के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने सीधे तौर पर सम्मान पूर्वक जीने के अधिकार और स्वास्थ्य सुविधाओं के हनन का मामला बताते हुए प्रदेश के गृह सचिव से एक महीने में जवाब मांगा है।

एनएचआरसी ने एम्स दिल्ली को भी जवान को उचित इलाज ना देने के लिए मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए राष्ट्रीय कहा है कि अगर सारी न्यूज रिपोर्ट सही है तब ये सीधे तौर पर सम्मान पूर्वक जीने के अधिकार और स्वास्थ्य सुविधाओं के हनन का मामला है। आयोग ने कहा है कि इस तरह की घटनाओं से जवानों का मनोबल कम होगा जो सही नहीं है।

सुकमा में 11 जवान हुए थे शहीद

बता दें कि मुरैना में रहने वाले जवान मनोज सिंह मार्च 2014 में छत्तीसगढ़ के सुकमा नक्सली मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मुठभेड़ में मनोज के पेट में सात गोलियां लगीं थी। उस हमले में 11 जवान शहीद हो गए थे। सिर्फ मनोज ही हमले में बच सके। घायल मनोज की जान तो बचा ली गई, लेकिन वह सामान्य नहीं हो पाए। उनकी आंते पेट से बाहर ही रहीं और एक आंख की रोशनी भी चली गई। मनोज पेट से बाहर निकली आंत पॉलीथिन में लपेटकर जीवन बिताने को मजबूर हैं। मनोज अपनी 16 साल की सेवा अवधी में सीआरपीएफ और एसपीजी कमांडो के काम किया है।

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