21 से ज्यादा विपक्षी दलों की इस याचिका पर चुनाव आयोग को मिला नोटिस

यह याचिका विपक्षी दलों की ओर से दायर की गई थी

नई दिल्ली: आगामी लोकसभा चुनाव 2019 से पहले 50% वोटों का मिलान वोटर्स वेरीफाइड पेपर्स ट्रेल (वीवीपैट) की पर्ची से कराने की मांग को लेकर 21 से ज्यादा विपक्षी दलों की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस मिला। यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिया।

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका तेदेपा, तृणमूल कांग्रेस, सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी समेत विपक्षी दलों की ओर से दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग को निर्देश दे कि कुल इस्तेमाल की जा रही ईवीएम में 50 फीसदी दर्ज मतों का वीवीपैट में मौजूद पर्चियों से मिलान करे।

याचिकाकर्ताओं में एनसीपी के शरद पवार, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, तृणमूल के डेरेक ओ. ब्रायन, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, सपा के अखिलेश यादव, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, द्रमुक के एमके स्टालिन, सीपीएम के टीके रंगराजन, राजद के मनोज कुमार झा, एनसी के फारुख अब्दुल्ला, सीपीआई के एसएस रेड्डी, जेडीएस के दानिश अली, रालोद के अजीत सिंह, एआईडीयूएफ के मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल, हम के जीतन राम मांझी, प्रो. अशोक कुमार सिंह, तेदेपा, ‘आप’ आदि शामिल हैं।

इससे पूर्व इन दलों ने गत माह 5 फरवरी को चुनाव आयोग से यह मांग की थी, लेकिन आयोग ने गत सप्ताह चुनावों की घोषणा करते हुए वीवीपैट मिलान का प्रतिशत बढ़ाने से आदेश देने से इनकार कर दिया था। आयोग ने कहा था कि इस बारे में भारतीय सांख्यिकी संस्थान से राय ली जा रही है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।

आयोग ने यह भी कहा था कि इस संबंध में मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। चुनावों में फिलहाल एक विधानसभा सीट पर एक ईवीएम के मतों का वीवीपैट पर्चियों से मिलान किया जाता है।

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