अब अंतरिक्ष में होगा प्रसव, ‘स्पेस लाइफ ओरिजिन’ कर रहा तैयारी

मिशन के लिए चुनी जाएंगी 25 महिलाएं

लंदन

नीदरलैंड स्थित ‘स्पेस लाइफ ओरिजिन’ आपका सपना साकार करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी ने ‘मिशन क्रैडल’ के तहत आने वाले छह वर्षों में अंतरिक्ष में प्रसव कराने की योजना बनाई है।

इसका मकसद पृथ्वी से इतर दूसरे ग्रहों पर मानव कालोनियां बसाने की कोशिशों को पंख लगाना है। 2024 में अनुभवी चिकित्सकों की टीम एक गर्भवती महिला को लेकर अंतरिक्ष रवाना होगी।

-‘मिशन क्रैडल’ के अंतरगत कोई भी संपन्न महिला अंतरिक्ष में मां बनने की अर्जी दे सकेगी, बशर्ते वह दो बार बिना किसी परेशानी के प्राकृतिक रूप से न सिर्फ गर्भधारण, बल्कि बच्चा भी पैदा कर चुकी हो। 36 घंटे के इस मिशन के तहत अनुभवी चिकित्सकों की टीम महिला को धरती से 250 मील (लगभग 402 किलोमीटर) की ऊंचाई पर ले जाकर उसका प्रसव कराएगी।

-‘स्पेस लाइफ ओरिजिन’ के सीईओ कीस मल्डर ने बताया कि ‘मिशन क्रैडल’ के लिए आवेदन साल 2022 में शुरू होंगे। कंपनी 25 महिलाओं का चयन कर उन्हें कुछ इस तरह से गर्भधारण कराएगी

कि प्रसव की तिथि मिशन के आसपास पड़े। जिस महिला को अंतरिक्ष में उड़ान भरने के लिए तय तिथि पर प्रसव पीड़ा उठने की सं‌भावना सबसे ज्यादा रहेगी, उसे स्पेस रवाना किया जाएगा।

जच्चा-बच्चा की सुरक्षा का पूरा ख्याल :

-‘मिशन क्रैडल’ के तहत बच्चे के जन्म के लिए अंतरिक्ष की ऐसी कक्षा चुनी जाएगी, जिसमें विकिरणों का स्तर सबसे कम हो। यही नहीं, स्वस्थ प्रसव के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों और संसाधनों से लैस ऐसा अंतरिक्ष यान तैयार किया जाएगा, जो शून्य गुरुत्वाकर्षण के दुष्प्रभावों से बचाए।

मल्डर के मुताबिक मिशन पर भेजने से पहले महिला को अंतरिक्ष सरीखे वातावरण में रखा जाएगा, ताकि वह खुद को उसमें ढाल सके। चिकित्सकीय जांच में पास होने के बाद ही उसे स्पेस में उड़ान भरने की अनुमति दी जाएगी।

योजना

-2024 में अंतरिक्ष में उड़ान भरेगी एक गर्भवती महिला
-402 किलोमीटर की ऊंचाई पर प्रसव कराने की योजना
-36 घंटे का होगा मिशन, 2022 से लिए जाएंगे आवेदन
-2 बार बिना किसी परेशानी के मां बन चुकी महिला दे सकेगी अर्जी

दूसरी दुनिया में जीवन की उत्पत्ति की संभावनाएं
-अंतरिक्ष विज्ञानी कहते हैं कि स्पेस में शुक्राणुओं और अंडाणुओं के बीच निषेचन की सामान्य प्रक्रिया में यूं तो कोई बाधा नहीं
-हालांकि भारी मात्रा में निकलने वाली विकिरणें पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या घटाती हैं, जिससे गर्भधारण में परेशानी आती है
-शून्य गुरुत्वाकर्ण भी प्रजनन में विघ्न पैदा करता है, पृथ्वी पर ऐसा वातावरण तैयार कर प्रसव कराने की कोशिशों में जुटे वैज्ञानिक

भ्रूण विकसित करने की पहल

1.मिशन लोटस
-साल : 2021
-मनुष्य के शुक्राणुओं और अंडाणुओं से लैस इंक्युबेटर एक यान के जरिये अंतरिक्ष रवाना होगा
-शून्य गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से अछूता रहेगा, निषेचन की प्रक्रिया से भ्रूण तैयार होने के बाद लौटेगा

2.मिशन आर्क

-साल : 2020

-अंतरिक्ष में पुरुषों और महिलाओं के प्रजनन अंगों से मिलता-जुलता वातावरण प्रदान करने वाले टेस्ट-ट्यूब भेजे जाएंगे
-इनमें मनुष्य की प्रजनन कोशिकाएं सहेजकर देखा जाएगा कि भविष्य में उनसे गर्भधारण की संभावनाएं बनी रहती हैं या नहीं

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