अब कानन का विशेष वाहन शुतुरमुर्ग को लाने जाएगा रांची

नईम खान :

बिलासपुर : रांची जू से नर शुतुरमुर्ग लेने के लिए कानन पेंडारी जू के विशेष वाहन को लेकर दल जाएगा। यह तैयारी परिवहन के दौरान नर शुतुरमुर्ग के होने वाले खतरे को देखते की जा रही है।

वहीं बुधवार को मृत नर शुतुरमुर्ग का गुरुवार जू में पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद सीसीएफ वाइल्ड लाइफ व डीएफओ की उपस्थित में उसका अंतिम संस्कार किया गया।

पिछले दिनों रांची जू से तीन शुतुरमुर्ग लेकर लाए गए थे। इन्हीं में एक नर की बुधवार शाम मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उसके पंख और जांघ के पास चोट थी। इसका कारण परिवहन को बताया जा रहा है।

दरअसल रांची जू प्रबंधन जिस वाहन से लेकर पहुंचा था उसकी क्षमता इतनी नहीं थी कि तीनों को एक साथ रखा जा सके। ऊपर से जर्जर सड़क के कारण शुतुरमुर्ग को चोंटें आई।

इस प्रजाति में नर शुतुरमुर्ग मादा की अपेक्षा ज्यादा संवेदनशील होता है। अधिक दूरी की परिवहन में इस तरह की दिक्कत आती है। हालांकि मौत के बाद रांची जू ने दूसरा शुतुरमुर्ग देने पर राजी हो गया है।

कानन जू की ओर से अब परिवहन में किसी तरह की लापरवाही नहीं बतरने का निर्णय लिया गया है। यही वजह है कि दल कानन में उपस्थित विशेष वन्यप्राणी परिवहन को लेकर जाएगा।

मालूम हो कि इस वाहन को खासतौर पर जबलपुर से मोडीफाई कराया गया है। परिवहन के दौरान जिस केज में वन्यप्राणी रहते हैंए उसे खासतौर पर आरामदायक बनाया गया है। इसके चारों तरफ एक इंच मोटा गद्दा लगा हुआ। इसके कारण धक्का लगने या गिरने पर चोट नहीं आती है।

रांची जू प्रबंधन पर जताई नाराजगी

मामले में जब रांची जू प्रबंधन से चर्चा की गई तो उनके जवाब पर जू प्रबंधन ने नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना था कि नर शुतुरमुर्ग ज्यादा दूरी का परिवहन नहीं कर सकता है। इसका खामियाजा वे भुगत चुके हैं।

कुछ साल पहले जब चेन्नई से जब इस प्रजाति को लेकर आए थे तो एक नर शुतुरमुर्ग की मौत हो गई थी। इस जानकारी के बाद कानन प्रबंधन का कहना था कि पहले यदि इसकी जानकारी दे दी जाती तो परिवहन के दौरान बेहतर व्यवस्था की जाती।

एक लापरवाही यह भी

65 प्रजाति से अधिक वन्यप्राणियों के इस चिड़ियाघर में मेडिकल एक्सपर्ट की कमी है। केवल एक डॉक्टर पीके चंदन ही जानकार हैं। उनका कोई दूसरा विकल्प नहीं है। किसी कारणवश यदि वे बाहर रहते हैं तो इसके बाद वन्यप्राणी पूरी तरह असुरक्षित हो जाते हैं। अभी वे बाहर ही है।

इसकी वजह से पोस्टमार्टम के लिए डॉ. पीयूष को बुलाया गया था। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने स्पष्ट निर्देश देकर एक और चिकित्सकए बायोलाजिस्ट की नियुक्ति करने के लिए कहा है। दो साल गुजर गए लेकिन स्थिति जस की तस ही है।

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