अब पीएचडी में धांधली पर लगेगी रोक

राजभवन से जारी हुआ ये नया निर्देश

रायपुर.

पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में अब पीएचडी में धांधली पर रोक लगेगी। राजभवन से जारी निर्देश के बाद विवि में पीएचडी उपाधि के लिए जमा किए जाने वाले थीसिस और प्रेजेंटेशन कैमरे की निगरानी में रहेंगे। इसके अतिरिक्त विवि की पीएचडी विंग द्वारा आयोजित की जाने वाली आरडीसी (रिसर्च डिग्री कमेटी) की बैठक उठने वाले मुद्दों सहित छात्रों की समस्याएं भी सामने नहीं आया करती थीं।

ऐसे में पीएचडी थिसिस सहित वायवा की कैमरे से निगरानी से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ लगने वाले आरोपों के निपटारे में भी आसानी होगी।

विवि के जनसंपर्क अधिकारी सुपर्ण सेनगुप्ता ने बताया कि कई बार उपाधि प्रक्रिया में सांठगांठ से छात्रों को उपाधि देने संबंधी सवाल उठा करते थे और शिकायतकर्ता बिना किसी ठोस आधार के ही शिकायत दर्ज करा दिया करते थे।

जिससे विवि की छवि धूमिल होती थी, साथ ही पैनल के पास ठोस प्रमाण के रूप में सिर्फ थिसिस ही हुआ करते थे। ऐसे में इस रिकार्डिंग से प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और किसी प्रकार की विवाद की स्थिति से निपटने में सहूलियत होगी।

सालाना 100 से अधिक उपाधि

अधिकारियों के मुताबिक विवि से प्रतिवर्ष लगभग 100 से अधिक रिसर्च स्कॉलर और नेट क्वालीफाई छात्र पीएचडी पूरी करते हैं।
वहीं, प्रवेश परीक्षा कठिन होने की वजह से इस सत्र 1127 छात्रों में से महज 175 ने ही क्वालीफाई किया है। वहीं, आंकड़ों और गाइडों की संख्या के अनुसार विवि सहित संबद्ध कॉलेजों में पीएचडी की 865 सीटें हैं। जिनमें गाइडों के खाली नहीं होने की वजह से सभी सीटों पर प्रवेश देना संभव नहीं है।

सभी विश्वविद्यालयों में होगा लागू

अफसरों के मुताबिक पीएचडी प्रक्रिया में धांधली की राजभवन में शिकायत सिर्फ रविवि की ही नहीं, बल्कि अन्य विवि से आती रहती हैं। जिसे देखते हुए विगत दिनों आयोजित बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा के बाद इसे प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में लागू करने का निर्णय लिया गया है।

रविवि जनसंपर्क अधिकारी सुपर्ण सेनगुप्ता ने कहा कि पीएचडी प्रक्रिया में मिल रही शिकायतों को देखते हुए थिसिस और प्रेजेंटेशन सहित वायवा की कैमरे से रिकार्डिंग करने के निर्देश राजभवन से मिले थे। जिसे देखते हुए प्रबंधन ने इसे लागू किया है।

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