लाभ का पद मामला: राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती देगी APP, आज हाईकोर्ट में दाखिल करेगी याचिका

सोमवार को पार्टी के 6 पूर्व विधायकों ने अयोग्य घोषित करनेवाली सिफारिश के खिलाफ अपनी अर्जियां वापस ले लीं. विधायकों की दलील थी कि सिफारिश को मंजूरी मिल गई, ऐसे में इन अर्जियों का कोई औचित्य नहीं बनता.

नई दिल्ली: लाभ के पद मामले में अयोग्य ठहराए गए आम आदमी पार्टी के सभी 20 पूर्व विधायक मंगलवार को हाइकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे. चुनाव आयोग की सिफारिश पर मुहर लगाने के राष्ट्रपति के फ़ैसले को हाइकोर्ट में चुनौती देंगे.

इस बीच सोमवार को पार्टी के 6 पूर्व विधायकों ने अयोग्य घोषित करनेवाली सिफारिश के खिलाफ अपनी अर्जियां वापस ले लीं. विधायकों की दलील थी कि सिफारिश को मंजूरी मिल गई, ऐसे में इन अर्जियों का कोई औचित्य नहीं बनता.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट में आप जो याचिका दाखिल करेगी उसमें ये तीन मांगे हैं

1) चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रपति को दी गई सिफ़ारिश को रद्द किया जाए.

2) राष्ट्रपति द्वारा जारी किए गए नोटिफ़िकेशन को स्टे किया जाए.

3) दोबारा से लाभ के पद को लेकर सुनवाई हो जिसमें आम आदमी पार्टी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए.

इन विधायकों ने न्यायालय को बताया कि उन्हें अयोग्य करार देने वाली अधिसूचना पर विचार-विमर्श करने के बाद वे न्यायालय में नई अर्जी मंगलवार को दाखिल करेंगे.

उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से राष्ट्रपति को भेजी गई सिफारिश के खिलाफ दायर उनकी अर्जी अब ‘‘अर्थहीन’’ हो गई, क्योंकि राष्ट्रपति ने सिफारिश स्वीकार कर ली है और इस बाबत एक अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है.

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने विधायकों को अपनी अर्जी वापस लेने की इजाजत दे दी और इसे ‘‘वापस लिया’’ हुआ मानकर खारिज कर दिया.

‘आप’ के एक विधायक की तरफ से पेश हुए वकील मनीष वशिष्ट ने न्यायालय को बताया कि उन्हें अयोग्य करार देने की आयोग की सिफारिश राष्ट्रपति की ओर से मंजूर कर लिए जाने के बाद सरकार ने 20 जनवरी को इस बाबत अधिसूचना जारी की.

इस दलील को रिकॉर्ड पर लेते हुए न्यायालय ने जनवरी का अपना वह अंतरिम आदेश जारी रखा, जिसमें इन विधायकों को कोई राहत नहीं दी गई थी.

राष्ट्रपति को भेजी गई अपनी राय में आयोग ने कहा था कि संसदीय सचिव के पद पर रहकर उन्होंने लाभ का पद संभाला और इसी वजह से वे दिल्ली विधानसभा के सदस्य के तौर पर अयोग्य करार दिए जाने लायक हैं.

वकील प्रशांत पटेल ने ‘आप’ के उन 21 विधायकों के खिलाफ चुनाव आयोग में अर्जी दायर की थी, जिन्हें दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया था.

रजौरी गार्डन से विधायक रहे जरनैल सिंह के खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी थी.

जिन 20 विधायकों को अयोग्य करार दिया गया उनमें शामिल हैं – आदर्श शास्त्री (द्वारका), अलका लांबा (चांदनी चौक), अनिल बाजपेयी (गांधी नगर), अवतार सिंह (कालकाजी), कैलाश गहलोत (नजफगढ़), मदन लाल (कस्तूरबा नगर), मनोज कुमार (कोंडली), नरेश यादव (महरौली), नितिन त्यागी (लक्ष्मी नगर),

प्रवीण कुमार (जंगपुरा), राजेश गुप्ता (वजीरपुर), राजेश ऋषि (जनकपुरी), संजीव झा (बुराड़ी), सरिता सिंह (रोहतास नगर), सोम दत्त (सदर बाजार), शरद कुमार (नरेला), शिव चरण गोयल (मोती नगर), सुखबीर सिंह (मुंडका), विजेंदर गर्ग (राजिंदर नगर) और जरनैल सिंह (तिलक नगर).

1
Back to top button