छत्तीसगढ़

पिता का डर”आखिर निधि जिन्दा वापस आएगी या नहीं”

9 जून 2017 को न्यूजर्सी समरसेट स्थित सुपीरियर कोर्ट ने एक आदेश जारी कर निधि व उसके बेटे के देश छोड़ने पर रोक लगा दी

बिलासपुर की रहने वाली निधि परदेश में न्याय पाने के लिए दर-दर भटक रही है. वीजा समाप्त हो जाने की वजह से उसके पास नौकरी नहीं है और अब न्यूजर्सी समरसेट स्थित सुपीरियर कोर्ट ने निधि के देश छोड़कर जाने पर रोक लगा दी है. निधि के पिता बैंककर्मी डीएन राव बेटी की घर वापसी के लिए हर जगह गुहार लगा चुके हैं पर अभी तक उन्हें निराशा ही हाथ लगी है.

डीएन राव ने बाते कि पति द्वारा घर से निकाले जाने के बाद निधि के पास आर्थिक समस्या खड़ी हो गई, उसके पास खाने के लिए भी पैसे नहीं बचे थे. यहां से जो रुपये भेज रहा हूं, उसी से उसका जीवन चल रहा है. इस मामले को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज को ट्वीट किया है और मदद की गुहार लगे है. पर विदेश मंत्रालय और पीएमओ से अब तक कोई जवाब नहीं आया है. डरे हुए पिता को अब ये अंदेशा भी हो रहा है की निधि अमेरिका से जिंदा वापस नहीं आ पायेगी या नहीं?

क्या है मामला
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर निवासी निधि राव की शादी वर्ष 2012 में विशाखापट्टनम के डी रविशंकर के साथ हुई थी. रविशंकर अमेरिका के बाल्टीमोर शहर में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है. वह और उसका पूरा परिवार वहीं बस गया है, वह यूएस ग्रीनकार्डधारी भी है. अप्रैल 2013 में निधि ने पुत्र को जन्म दिया. पुत्र के जन्म के बाद से ही रविशंकर और निधि के बीच किसी बात को लेकर विवाद होने लगा. इसकी जानकारी निधि ने अपनी मां को दी। पिता से रहा नहीं गया. वह अमेरिका गए और बेटी व नाती साकेत को लेकर बिलासपुर आ गए. निधि के भारत आते ही न्यूजर्सी कोर्ट ने ई-मेल संदेश भेजकर साकेत को एक महीने के भीतर भारत से वापस अमेरिका लाने का फरमान जारी किया था. निधि और साकेत के वहां पहुंचने पर पति रविशंकर ने दोनों को घर से निकाल दिया. तब से लेकर आजतक निधि अपने बेटे के साथ अलग रह रही है.
अकेला छोड़कर भारत लौट आया
राव ने बताया कि बैंक से दो महीने की छुट्टी लेकर वह अपनी बेटी के पास भी गए थे. इस दौरान बेटी को वापस भारत लाने वहां स्थित भारतीय दूतावास को 23 जनवरी को ईमेल से पूरी जानकारी दी. मेल मिलने के बाद अफसरों ने उनसे फोन पर बात की और मानवीय नामक स्वयंसेवी संस्था से संपर्क करने कहा. इसके बाद उच्चायुक्त के अफसरों ने दोबारा न तो फोन किया और न ही निधि की कोई सुध ही ली. स्वयंसेवी संस्था उन्हें वहां लॉ कॉम ऑफिस ले गए. यहां उन्हें एक वकील से मिलवाया गया. बकौल राव, कोर्ट में मामला दायर करने के एवज मैंने वकील को पांच हजार डॉलर दिए. पूरी फीस लेने के बाद भी वकील की तरफ से हमें कोई मदद नहीं मिली. वीजा अवधि खत्म होने के कारण मैं बीमार बेटी को वहां अकेला छोड़कर भारत लौट आया.
देश न छोड़ने का फरमान
नौ जून 2017 को न्यूजर्सी समरसेट स्थित सुपीरियर कोर्ट ने एक आदेश जारी कर निधि व उसके बेटे के देश छोड़ने पर रोक लगा दी. कोर्ट के आदेश के बाद कानूनी सहायता के लिए निधि ने एंबेसी से संपर्क किया पर उसे कोई कानूनी सहायता नहीं मिली.

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