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एक तरफ हंगामा तो दूसरी तरफ मूक सहमति, संसद नहीं चलेगी

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण पूरी तरह से हंगामे की भेंट चढ़ता नज़र आ रहा है. सरकार ने फाइनेंस बिल जैसी ज़रूरी और संवैधानिक तौर पर अनिवार्य विधायी कार्यों को बुधवार को शोरगुल के बीच ही निपटाया. विपक्ष ने इस तरीक़े को गुलेटाइन बताते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया.

विपक्षी पार्टियों में जहां कांग्रेस और टीएमसी जैसी पार्टियों ने सबसे अधिक तूल नीरव मोदी और बैंक घोटालों को दिया वहीं सत्ता में सहयोगी रही टीडीपी ने आंध्र प्रदेश को स्पेशल स्टेट का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर सरकार को घेरे रखा. नतीजा हर दिन सुबह ग्यारह बजे लोकसभा शुरू होते ही स्थगित होती रही है. दोपहर बारह बजे फिर कार्यवाही शुरू भी हुई तो वही हाल रहा. पूरे दिन के लिए स्थगित होती रही.

विपक्ष नियम 167 के तहत बहस की मांग पर अड़ा रहा. सरकार 193 के तहत बहस की बात करती रही. लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई. विपक्ष का आरोप ये भी है कि सरकार ने उन तक रीच आउट करने की कोशिश तक नहीं की. जबकि सरकार को लगता रहा है कि विपक्ष को मनाना मुश्किल है इसलिए वह अपील तो करती रही और सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अनौपचारिक बैठक कर मेलमिलाप की कोशिश नहीं हुई.

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