स्कंद षष्ठी पर करें विधी-विधान से पूजा,सूनी गोद हो जाएगी हरी

स्कंद षष्ठी की उपासना से च्यवन ऋषि को आंखों की ज्योति प्राप्त

आज गुरुवार को सावन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर स्कंद षष्ठी का पर्व मनाया जाएगा। यह छठ श्रावण स्कंद षष्ठी कहलाती है। यह पर्व भगवान शंकर व भगवती पार्वती के पुत्र का

कार्तिकेय अर्थात भगवान स्कंद को समर्पित है।

शास्त्र निर्णयामृत के अनुसार शुक्ल षष्ठी को दक्षिणापथ में भगवान कार्तिकेय के दर्शन मात्र से ब्रह्महत्या जैसे पापों से मुक्ति मिलती है।

पौराणिक कथा के अनुसार स्कंद षष्ठी की उपासना से च्यवन ऋषि को आंखों की ज्योति प्राप्त हुई थी। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार भगवान स्कंद की कृपा से प्रियव्रत का मृत
शिशु जीवित हो उठा था।

महादेव के तेज से उत्पन्न स्कंद को छह कृतिकाओं ने स्तनपान करवाकर रक्षा की थी। स्कंद की उत्पत्ति अमावास्या को अग्नि से हुई थी, वे चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को प्रत्यक्ष हुए थे।

भगवान कार्तिकेय के छह मुख हैं। इसी कारण इन्हें षडानन कहते हैं। मोर पर आसीन देवसेनापति कुमार कार्तिकेय की आराधना दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा होती है।

यहां पर यह ‘मुरुगन’ नाम से विख्यात हैं। प्रतिष्ठा, विजय, व्यवस्था, अनुशासन सभी कुछ इनकी कृपा से सम्पन्न होते हैं।

स्कन्द पुराण के मूल उपदेष्टा कुमार कार्तिकेय ही हैं तथा यह पुराण सभी पुराणों में सबसे विशाल है। कार्तिकेय देवों के द्वारा सेना नायक बनाए गए थे। इन्होंने तारकासुर का वध किया था।

इनकी पूजा, दीपों, वस्त्रों, अलंकरणों व खिलौनों के रूप में की जाती है। यह युद्ध, शक्ति व ऊर्जा के प्रतीक हैं। शास्त्रों में इस दिन कुमार कार्तिकेय की पूजा संतान के स्वास्थ्य के लिए करने का विधान है।

इस दिन इनकी विधि-विधान से पूजा, व्रत और उपाय करने से सूनी गोद हरी होती है, एजुकेशन फील्ड में सक्सेस मिलती है और झगड़ों का अंत होता है।

स्पेशल पूजन विधि: शिवालय जाकर भगवान कार्तिकेय की विधि-विधान से पूजा करें। घी में केसर मिलाकर दीपक जलाएं, चंदन से धूप करें, पीले कनेर के फूल चढ़ाएं, पीत चंदन चढ़ाएं, केले का फलाहार चढ़ाएं व गुड़ का भोग लगाएं। इस विशेष मंत्र को 108 बार जपें। इसके बाद फल किसी गरीब को बांट दें।

स्पेशल मंत्र: ॐ स्कन्दः शरवणभवाय नमः॥

स्पेशल मुहूर्त: सुबह 08:15 से सुबह 09:15 तक।

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