चन्द्रमा महादशा फल पर:-

आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया ज्योतिष विशेषज्ञ:- किसी भी प्रकार की समस्या समाधान के लिए सम्पर्क कर सकते हो, सम्पर्क सूत्र:- 9131366453

चंद्रमा किसी भी जातक की कुंडली मे किस किस लग्न में लाभ प्रदान करता है।

(1) चन्द्रमा कर्क लग्न में लग्नेश:- मीन लग्न में पंचमेष वृश्चिक लग्न में नवमेश बनकर शुभ फल करता है।

(2) चन्द्रमा मिथुन लग्न में द्वतीयस- सिंह लग्न में द्वदशेष -धनुलग्न में अष्टमेश बनकर अपनी दशा में सम फल करता है।

(3)वृष लग्न ने तृतीयेष – कुम्भ लग्न में सष्ठेस – कन्या लग्न में लाभेश – मेष लग्न में चतुर्थेश -मकर लग्न में सप्तमेश — तुला लग्न में दशमेश होकर खराब फल देता है।

(4) शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा- से दशमी- तिथि तक चन्द्रमा मध्य बलि होता है इसके बाद– दस दिन अति बलवान ओर शुभ फल करता होता है ! अंतिम- दश दिन चन्द्रमा बलहीन होता है!

चन्द्रमा महा दशा फल:-

चन्द्रमा की उत्तम दशा में माता का सुख – ग्रह – लक्ष्मी -वाहन — यश की प्राप्ति होती है।

चन्द्रमा की पाप दशा में धन की हानि -, कृपण – बुद्धि – द्रव्य की हानि व माता को कष्ट होता है।

यदि जातक की कुंडली मे चन्द्रमा अपनी उच्च राशि मे होकर व केंद्र या त्रिकोण में हो व शुभ ग्रह से युक्त हो और शुक्ल पक्षीय हो ओर बली हो तो —

जातक को जीवन मे सभी सुख सुविधा – भाग्यवान व धन संपदा का स्वामी होता है घर मे शुभ कार्य – वाहन लाभ – धन की सम्रद्धि होती है।

यदि जातक की कुंडली मे शुभ अवस्था मे है चन्द्रमा के दशा में है तो पुत्र लाभ और विद्या लाभ होता है

यदि चन्द्रमा जातक के कुंडली मे नीच राशि मे है व निर्बल है तो ऐसे चन्द्रमा के दशा में धन हानि – शाररिक व मानसिक कष्ट – माता को कष्ट होता है !

मन में घबराहट रहती है, किसी अनहोनी का डर बना रहता है ।
टेंशन, डिप्रेशन बढ़ जाता है ।

ह्रदय रोग हो सकता है। ह्रदय में ब्लड की सप्लाई में बाधा आती है।

मकान, वाहन, जमीन सम्बन्धी मामलों से परेशानी बढ़ती है।
माता के सुख में कमी आती है।
माता का स्वास्थ्य खराब रह सकता है।

किसी भी प्रकार की समस्या समाधान के लिए आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) जी से सीधे संपर्क करें = 9131366453
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