एक ओर मन है तो दूसरी ओर भगवान : शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती

खबरीलाल रिपोर्ट

वाराणसी : द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने आज 18 अगस्त 2018 को श्री शंकराचार्य निवास, वृंदावन में उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए कहा कि एक ओर मन है तो दूसरी ओर भगवान। ज्ञात हो कि महाराजश्री जी का 68 वां चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान वृंदावन धाम में आयोजित है जिसमे उनके शिष्य प्रतिनिधि द्वय दंडी स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज व स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती जी महाराज के साथ साथ दंडी स्वामी अमृतानन्द सरस्वती जी महाराज, दंडी स्वामी सदाशिवेंद्र सरस्वती, ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द जी महाराज, ब्रह्मचारी ब्रह्म विद्यानंद जी महाराज, ब्रह्मचारी कैवल्यानन्द जी महाराज, ब्रह्मचारी रामेश्वरानन्द जी महाराज , ब्रह्मचारी धरानन्द जी महाराज एवं आदि संत ,महात्मा सम्मिलित हुए हैं और चातुर्मास्य व्रत के पालन के साथ साथ स्वाध्याय हो रहे हैं एवं रोजाना सायंकालीन प्रवचन भी हो रही है।

आज के प्रवचन में सर्वप्रथम ज्योतिष पीठ के व्यास जी ने कीर्तन के साथ साथ राम कथा सुनाई तत्पश्चात स्वामिश्री: के सचिव मयंक शेखर मिश्रा, प्रवक्ता प्रशांत त्रिपाठी ने अपनी अपनी बातें रखी जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि से उनके कहे बातों को स्वीकारा।

पूज्य शंकराचार्य महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि मन ही मनुष्य के मोक्ष का कारण है। जब मन विषयों में, रोगों में आसक्त हो जाता है तो वह बन्ध जाता है। जब सभी से छुटकारा मिल जाये तो मोक्ष की प्राप्ति होगी, इसलिए मन को अच्छा भी और बुरा भी माना गया है। महात्मा के मन को जो वस्तु अच्छा लगता है वह भटकाता है और उसे वह महात्मा शीघ्र त्याग कर देता है। महात्मा अपने मन को समझाते हैं कि रहने के लिए यदि मकान न मिले तो पेड़ की छांव में रह लो, खाने के लिए भिक्षा कर लो, प्यास लगे तो नदी का पानी पी लो और शीत से बचने के लिए कुछ नहीं हो तो जो लोग कपड़े फेंक देते हैं उसे उपयोग कर शीत से अपने को बचा लो। श्रीराधा और मुरलीधर का भजन कर अनेकों प्रकार के कष्ट भोगकर महात्मा लोग वृंदावन में रहते हैं।

एक दूसरे कवि ने कहा कि मन को वश में करके रखिये। वही मन यदि वश में हो जाये तो स्वाभाविक है कि परम् ब्रह्म की प्राप्ति हो जाएगी। मन को वश में करने के लिए साधना कि जरूरत है। मन रूपी मुलजिम के लिए अभ्यास और वैराग्य नामक दो पुलिस लगाए जाते हैं। इसलिए एक ओर मन है तो दूसरी ओर भगवान।

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