आरसीईपी के कारण छत्तीसगढ़ के किसान बर्बादी के कगार पर: सलाहकार बीजू जानसन

आरसीईपी का देश के किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव पर राष्ट्रीय किसान महासंघ द्वारा एक दिवसीय नेशनल कन्वेंशन का आयोजन किया गया था

रायपुर

केरल के त्रिची में पिछले दिनों आरसीईपी का देश के किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव पर राष्ट्रीय किसान महासंघ द्वारा एक दिवसीय नेशनल कन्वेंशन का आयोजन किया गया था। जिसमें अनेक राज्यों के दो दर्जन से अधिक किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।

कन्वेंशन में छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के सलाहकार बीजू जानसन ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया था।

क्षेत्रीय विस्तृत आर्थिक समझौते ( आरसीईपी) का छत्तीसगढ़ में उत्पादित फसलों और उत्पादक किसानों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का उल्लेख किया। किसान संगठन के सालाहकार बीजू जानसन ने कन्वेंशन में कहा कि समझौते के कारण दलहन और तिलहन की कीमतें आधी से कम हो जाने के कारण फसल लेने वाले लाखों किसान बर्बाद हो गए हैं।

समझौते के बाद दलहन और तिलहन के आयात शुल्क को शून्य कर देने से विदेशों के दलहन तिलहन का आयात सुगम हो गया। जिसका दुष्प्रभाव छत्तीसगढ़ के किसानों को भोगना पड़ा है

छत्तीसगढ़ के लगभग 10 लाख हेक्टेयर रकबे में दलहन और तिलहन फसलों का उपज किसानों द्वारा लिये जाते हैं। इसी प्रकार प्रदेश में लगभग 10 लाख लोग प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से दुग्ध उत्पादन के काम में लगे हुए हैं।

विदेशों में उच्च तकनीक से दलहन, तिलहन, दुग्ध उत्पादन किया जाता है जिसे भारी सरकारी आर्थिक सहयोग भी प्राप्त होता है जिसके कारण छत्तीसगढ़ राज्य की तुलना में उत्पादन लागत लगभग एक तिहाई ही रहता है।

ऐसे में आरसीईपी समझौते के कारण शून्य आयात शुल्क का लाभ उठाते हुए अपने उत्पाद भारत में डम्प करते हैं जिसका मुकाबला करने की स्थिति में छत्तीसगढ़ के किसान नहीं हैं ।

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन ने छत्तीसगढ़ के किसानों के हितों की रक्षा करने के लिये आरसीईपी समझौते से शीघ्र ही बाहर आने की मांग की है।

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