नगर निगम द्वारा दायर रिट अपील पर हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर शपथ पत्र प्रस्तुत करने का दिया आदेश

नगर निगम राजनांदगांव अपने अधिवक्ता संदीप दुबे द्वारा उच्च न्यायालय में सिंगल जज के आदेश के विरुद्ध रिट अपील प्रस्तुत की थी,

बिलासपुर : नगर निगम राजनांदगांव अपने अधिवक्ता संदीप दुबे द्वारा उच्च न्यायालय में सिंगल जज के आदेश के विरुद्ध रिट अपील प्रस्तुत की थी,जिस पर आज डिवीज़न बेंच न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव एवं न्यायधीश विमला कपूर के यहाँ सुनवाई हुई और सुनवाई के पश्चात रश्मि गौरी भोजानी सहित नगरीय निकाय को शपथ पत्र दायर करने का आदेश दिया है,और शपथ पत्र में स्पष्ठ करने कहा है कि क्या रिट याचिका की सुनवाई के समय तक निगम ने जमीन अधिग्रहण कर ली थी।

प्रकरण इस प्रकार है कि रश्मि भोजानी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि नगर निगम राजनांदगांव ने उनकी जमीन को जबरदस्ती अधिग्रहण कर लिया है और मुआवजा भी नही दे रहे है। तब उच्च न्यायालय के एकल पीठ ने बिना नगर निगम को सुनवाई के अवसर दिए, बिना नोटिस जारी किए एक तरफा सुनवाई करते हुए राज्य को आदेश जारी किया कि याचिकाकर्ता रश्मि भोजानी और उनके परिवार की जबरदस्ती ली गयी है

कारण न्यायालय अवमानना का प्रकरण 

उन्हें उनका करीब 4 करोड़ का मुआवजा 12 प्रतिशत ब्याज सहित देवे। उसके पश्चात एकल पीठ ने नगरीय सचिव और आयुक्त निगम के खिलाफ मुआवजा नही देने के कारण न्यायालय अवमानना का प्रकरण शुरू कर दिया। तब नगर निगम राजनांदगांव ने उच्च न्यायालय के डिवीज़न बेंच में रिट अपील फ़ाइल की और बताया कि याचिकाकर्ता बिना निगम को सुनवाई किये उसके खिलाफ आदेश जारी कर दिया और न्यायालय अवमानना का प्रकरण भी चला दिया।

जबकि याचिकाकर्ता द्वारा झूट बोलकर एकल पीठ से आदेश लिया गया। क्योकि आज तक नगर निगम ने याचिकाकर्ता की जमीन का अधिग्रहण ही नही किया है। निगम ने सिर्फ प्रस्तवित कर राज्य को फण्ड जारी करने का निवेदन किया था, राज्य ने उसे अस्वीकृत कर दिया था कि नगरीय निकाय के पास अधिग्रहण के लिए इस मद में राशि नही है। आज सुनवाई में निगम के वकील संदीप दुबे ने डिवीज़न बेंच को बताया कि याचिकाकर्ता ने झूट बोलकर एकल पीठ से आदेश लिया है

जबकि उसकी जमीन को आज तक निगम ने अधिग्रहण नही किया है ना ही सड़क निर्माण किया है। सुनवाई के पश्चात डिवीज़न बेंच ने नोटिस जारी कर रश्मि भोजानी और अन्य से शपथ पत्र देने कहा है कि क्या अब भी अधिग्रहण निगम द्वारा की गई है या नहिं। और यह भी कहा कि क्या सुनवाई से पूर्व नगर निगम को सुनवाई का अवसर दिया जाना था कि नही।

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