टेक्नोलॉजी

यूजर्स के डेटा को लेकर एक बार फिर फेसबुक आरोपों से घिरा

बीतें कुछ समय से फेसबुक पर डेटा लीक के आरोप लग रहें है जिसे लेकर यूर्जस असमंजस में है और अब एक बार फिर फेसबुक नए आरोपों घिर गई है। दरअसल फेसबुक ने कुछ चुनिंदा कंपनियों को यूजर्स के दस्तावेज देखने का अधिकार दिया है इस बात का खुलासा ब्रिटिश संसदीय समिति ने बुधवार को इससे संबंधित ईमेल और अन्य फेसबुक दस्तावेज जारी करके किया है।

इससे साफ होता है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने एयरबेंब, लिफ्ट और नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियों को यूजर्स के डाटा के लिए विशेष पहुंच प्रदान की है।

संसद की मीडिया समिति ने बुधवार को फेसबुक पर आरोप लगाया कि वह विशेष सौदे के तहत कुछ ऐप डेवलॉपर्स को अपने यूजर्स की जानकारी आसनी से पहुंचा रही है वहीं जिन ऐप डेवलॉपर्स को वह अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है उनकी राह में रोड़ अटका रहा है। समिति ने 200 से ज्यादा पन्नों का दस्तावेज जारी किया है जिसमें यूजर्स की निजी जानकारी की कीमत को लेकर फेसबुक की आंतरिक बहस को शामिल किया गया है।

इन दस्तावेजों में वर्ष 2012 से 2015 के बीच के समय का जिक्र किया गया है। उसी वक्त फेसबुक सार्वजनिक मंच बना था। यह दस्तावेज कंपनी के कामकाज और उसने धन कमाने के लिए किस हद तक लोगों के डेटा का उपयोग किया है यह दिखाते हैं। जबकि कंपनी सार्वजनिक रूप से लोगों की निजता की सुरक्षा करने का वादा करती है।

फेसबुक ने दस्तावेजों को गुमराह करने वाला बताते हुए इसे कहानी का हिस्सा करार दिया। कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, दूसरे कारोबारों की तरह हम भी अपने प्लेटफॉर्म के लिये सतत कारोबारी मॉडल को लेकर आंतरिक बातचीत करते हैं।

यह स्पष्ट है कि हमने कभी लोगों का डेटा नहीं बेचा। फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने एक पोस्ट में इन दस्तावेजों का संदर्भ मांगा है। उन्होंने लिखा, बेशक हम हर किसी को अपने प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दे सकते।”

समिति के मुताबिक फेसबुक ने 2015 में अपनी नीति में बदलाव के बावजूद एयरबीएनबी और नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियों को सफेद सूची में रखते हुए अपने उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाए रखनी की इजाजत दी।

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यूजर्स के डेटा को लेकर एक बार फिर फेसबुक आरोपों से घिरा
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