छत्तीसगढ़

वाड्रफनगर विकासखंड के ग्राम बसंतपुर में फिर एक बार एक माह के बच्चे के मौत

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा/ संवाददाता : शिव कुमार चौरसिया

बलरामपुर/वाड्रफनगर: जिले के वाड्रफनगर विकाशखण्ड के ग्राम बसंतपुर में फिर एक बार एक माह के बच्चे के मौत का मामला प्रकाश में आया।मृतक बालक का वजन 1किलो 6 सौ ग्राम है और वह पंडो समाज से आता है।वही शासन प्रशासन का दावा है।उसके परिवार को शासन के सभी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।लेकिन गौर करने वाली बात है कि मृतक बच्चे को जन्म देने वाली मां अभी नाबालिग है।और उसका प्रशव भी नौ माह के बजाए सात माह में ही हो गया था।शायद यही कारण है कि उसका बच्चा कुपोषित जन्म लिया और आसमयिक उसकी मौत भी हो गई।

मृतक बच्चे की माँ को अगर बालिका कहा जाए तो अतिशयोक्ति नही होगी क्योंकि अभी वह बालिक नही हुई है।शासन प्रशासन ऐसे बच्चे औऱ बछियों के देख रेख तथा संरक्षण हेतु कई योजनों के माध्यम से करोङो खर्च कर रही है।लेकिन क्या कारण है की सरकार के द्वारा तय की गई उम्र को पूर्ण किये बगैर बालिकायें मा बन जा रही है।और उनसे जन्म लिए बच्चे काल के गाल में समा रहे है।

आपको बता दे कि घटना की जानकारी मिलते है महिला बाल विकास की टीम और अनुविभागीय अधिकारी घटना स्थल पहुचे और विभाग पर किसी प्रकार का आरोप प्रत्यारोप न आये इसके लिए ग्रामीणों के समक्ष पंचनामा बनाकर चलते बने।

इस संबंध में महिला बाल विकास अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मृतक बच्चे की माँ को विभाग द्वारा मातृत्व आहार,रेडी टू इट,दिया जाता है समय पर टीकारण भी किया गया है।लेकिन अधिकारी के इस बयान को ग़ैरजिमेदाराना समझा जाये क्योकि बच्चे का जन्म केवल सात माह में होने के कारण तो उसकी मृतु तो हो गई लेकिन उसकी मां अभी नाबालिक है उसे भी देख रेख या संरक्षण की जरूरत है।लेकिन विभाग का इस ओर ध्यान नही गया।बल्कि पूरे दिन विभाग अपने आप को बचाने में लगा रहा।

परिजनों में है जागरूकता की कमी—एसडीएम विशाल महाराणा

इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी विशाल महाराणा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मृतक बच्चे में कुपोषण के लक्षण नही थे बल्कि सात में ही पैदा हो जाने के कारण उसकी मौत हो गई।उन्होंने बताया कि बच्चे को सास लेने में परेशानी हो रही थी जिसके बाद उसे वाड्रफनगर हॉस्पिटल लाया गया था डाक्टरो ने उसे अम्बिकापुर रिफर किया था।और रास्ते मे मौत हो गई।नाबालिकता कि स्थिति मा बनने को लेकर उन्होंने बताया कि उनके परिवार में जागरूकता की कमी है।

चाइल्ड लाइन,बाल संरक्षण,बाल कल्याण समिति के कार्यो पर सवालिया निशान—-

आपको बता दे कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों में ऐसे समितियों का गठन सासन स्तर पर किया गया है जो विशेष देख रेख वाले बच्चो के संरक्षण ,और सुरक्षा हेतु कार्य करती है और जागरूक भी इसमें विशेष योगदान चाइल्ड लाइन (1098 टोल फ्री ) की होती है।जिनका संचालन प्राइवेट संस्था करती है लेकिन इनकी निष्क्रियता नजर आ रही है।

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