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चपरासी ने BJD को चंदे में दिए एक करोड़ रुपये, उठे सवाल

राजनीतिक दलों को मिलने वाला चंदा एक बार फिर सवालों के घेरे में है और इस बार कठघरे में है बीजू जनता दल (BJD)। हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी को बेनामी स्रोतों से करोड़ों रुपये संदिग्ध तरीके से चंदे के रूप में मिले। खास बात यह है कि पार्टी के खाते में करोड़ों रुपये जमा कराने वाले एक चपरासी है। हालांकि बीजेडी ने इस आरोप को निराधार और रिपोर्ट को फर्जी करार दिया है।

रिपोर्ट में बैंक के दस्तावेजों के हवाले से बताया गया है कि बीजेडी मुख्यालय में काम करने वाले पूर्ण चंद्र पाढी नाम के चपरासी ने पार्टी के खाते में एक करोड़ रुपये का चंदा जमा कराया। रिपोर्ट के अनुसार, पाढी ने बताया कि उसने पार्टी फंड के लिए इकट्ठा किए गए पैसों को पार्टी के खाते में जमा कराया है।

2009 के बाद से ओडिशा के इस सत्ताधारी दल ने अपने खर्च के ब्योरे से संबंधित वार्षिक तक रिपोर्ट जारी नहीं की है, जबकि जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत ऐसा करना जरूरी होता है। उधर पार्टी प्रवक्ता प्रताप देब ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा, ‘इस घिसेपिटे मुद्दे पर पिछले साल ओडिशा विधानसभा में चर्चा हुई थी।

बीजेपी और कांग्रेस के विधायकों ने भी चर्चा में हिस्सा लिया था। किसी तरह का कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन नहीं किया गया है।’

उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट का मकसद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की छवि को खराब करना है। देब ने कहा, ‘सभी दस्वातेज सार्वजनिक हैं। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। यह रिपोर्ट प्रायोजित है।’ बता दें कि मई 2016 में विपक्ष के नेता निरसिंघा मिश्रा ने चपरासी द्वारा करोड़ों का चंदा दिए जाने का यह मामला उठाया था। उस वक्त उन्होंने बताया था कि गंजम जिले के रहने वाले इस चपरासी ने बीजेडी के एसबीआई अकाउंट में एक दिन में 8 करोड़ रुपये जमा कराए। मिश्रा ने इसे लेकर सरकार से जवाब मांगा था।

उस वक्त इन आरोपों पर सफाई देते हुए कानून मंत्री अरुण साहू ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि जिस अकाउंट में 8 करोड़ रुपये जमा कराए गए, वह पार्टी का ही है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया था कि पैसे आए कहां से थे, लेकिन यह जरूर दावा किया था कि ट्रांजैक्शन में कोई गड़बड़ी नहीं की गई है।

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