फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन एजेंसी द्वारा “रोल ऑफ बायोलॉजिकल एविडेंसेस इन क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन” विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन

डॉक्टर पल्लव ने बताया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम के धारा 45 तहत यह भी प्रावधान है की कोई भी फोरेंसिक विशेषज्ञ न्यायालय में अपना मत दे सकता है जिसको आधार मानकर ही न्यायलय संबंधित घटना में आगे की सुनवाई करती है।

ब्यूरो चीफ:- विपुल मिश्रा

फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के द्वारा “रोल ऑफ बायोलॉजिकल एविडेंसेस इन क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन” विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया था।

जिसमे मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. अभिषेक पल्लव, पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा, ने फोरेंसिक साइंस के छात्रों को घटना स्थल निरीक्षण के समय मिलने वाले बायोलॉजिकल एविडेंस के महत्व को बताया उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान हमें ब्लड, सीमेन, सलाइवा, हेयर मुख्यतः मिलते ही है जिसको हमें सावधानीपूर्वक एकत्र करना चाहिए। उसके बाद परीक्षण हेतु फोरेंसिक लैब भेजना चाहिए ताकि उसका परिणाम सही सही मिल सके।

सर ने कहा कि एक अच्छा फोरेंसिक एक्सपर्ट वहीं होता है जो घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण कर यह बता सके कि वास्तव में किस तरह की घटना घटित हुई है जिससे हम कम समय में मुख्य अपराधी तक पहुंच सकते है।फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन एजेंसी द्वारा "रोल ऑफ बायोलॉजिकल एविडेंसेस इन क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन" विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन

डॉक्टर पल्लव ने बताया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम के धारा 45 तहत यह भी प्रावधान है की कोई भी फोरेंसिक विशेषज्ञ न्यायालय में अपना मत दे सकता है जिसको आधार मानकर ही न्यायलय संबंधित घटना में आगे की सुनवाई करती है।

डॉक्टर पल्लव ने बताया कि अगर फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम घटना स्थल पर समय के साथ पहुंचती है तो साक्ष्य मिलने की संभावना और भी बढ़ जाती है उन्होंने कहा कि घटना स्थल पर मिले ब्लड से यह भी पता लग जाता है कि वह ब्लड व्यक्ति के मरने से पहले का है या व्यक्ति के मरने के बाद का है क्योंकि अगर व्यक्ति जिंदा होता है तो घटना स्थल पर मिलने वाला ब्लड बिल्कुल फ्रेश होता है और किसी को पहले से मारने के बाद दूसरी जगह पर लाश को ठिकाने लगाया गया है तो वहां पर मिलने वाला ब्लड पॉवडर फार्म में रहता है।

डॉ पल्लव ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया 

साथ ही डॉ पल्लव ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक बार दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने एक यात्री बस को आग के हवाले कर दिया जिसमे एक व्यक्ति का शरीर पूर्णतः जल गया था और घटना स्थल से पुलिस को सिर्फ हड्डी ही मिल पाया। ठीक उसी समय एक महिलना अपने पति के गुम जाने की शिकायत दर्ज कराई थी तभी डॉक्टर पल्लव ने अपने अनुभव का परिचय देते हुए उस हड्डी को डीएनए टेस्ट के लिए फोरेंसिक लैब भेजा था जहां से रिपोर्ट आया जो मृत व्यक्ति के बेटे से मिल गया ।फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन एजेंसी द्वारा "रोल ऑफ बायोलॉजिकल एविडेंसेस इन क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन" विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन

एजेंसी के डायरेक्टर दिपेन्द्र बारमते ने बताया कि घटना स्थल निरीक्षण में फोरेंसिक एक्सपर्ट और पुलिस दोनों के सहयोग से संदिग्ध मामले में जुटाए हुए साक्ष्यों के आधार पर एक नियत समय में मामले कि तह तक जा सकते है। कार्यक्रम में फोरेंसिक विभाग के विभागध्यक्ष, विनय सोनवानी, नितेश साहू, मुकेश साहू, फोरेंसिक साइंस के समस्त छात्रगढ़ एवं सभी टीम सदस्य उपस्थित रहे।फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन एजेंसी द्वारा "रोल ऑफ बायोलॉजिकल एविडेंसेस इन क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन" विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन

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