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पितृ पक्ष और शारदीय नवरात्र के बीच एक महीने का अंतर, ऐसे बन रहा संयोग

1 सितंबर से शुरू होकर 17 सिंतबर तक चलेगा इस साल पितृपक्ष 2020

हर साल पितृ पक्ष के समापन के अगले दिन से नवरात्र का आरंभ हो जाता है. यानी, पितृ अमावस्‍या के अगले दिन से प्रतिपदा के साथ शारदीय नवरात्र का आरंभ हो जाता है. लेकिन, इस बार श्राद्ध पक्ष समाप्‍त होते ही अधिमास लग जायेगा.

इस साल पितृपक्ष 2020 1 सितंबर से शुरू होकर 17 सिंतबर तक चलेगा. सभी श्राद्ध कर्मकांड इस दौरान किए जाएंगे और पितरों को तर्पण भी किया जाएगा. लोग अपने-अपने पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण, हवन और अन्न दान इस दौरान करते हैं ताकि पितरों का आशीर्वाद उन पर बना रहे.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। पितृ पक्ष समाप्त होते ही अगले दिन नवरात्र की शुरुआत हो जाती है. इसके बाद 9 दिन तक मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा होती है. हालांकि इस साल ऐसा नहीं होने जा रहा है. इस बार पृत पक्ष और शारदीय नवरात्र के बीच एक महीने का अंतर आ गया है. इस साल श्राद्ध के अगले ही दिन से नवरात्र शुरू होने की बजाए एक महीना देरी से आएंगे.

अधिमास समाप्त होने के बाद 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी. ज्योतिषविदों का कहना है कि 165 साल बाद यह अजब संयोग बनने जा रहा है. ज्योतिषविदों ने इसके पीछे का कारण भी बताया है.क्यों देरी से शुरू हो रहे नवरात्र?

ज्योतिर्विदों का कहना है कि लीप ईयर की वजह से यह संयोग बन रहा है. इस बार अधिमास और लीप ईयर एक ही वर्ष में पड़ रहे हैं. इस कारण चातुर्मास जो हर साल चार महीने का रहता है, वो इस बार पांच महीने का होगा. चातुर्मास लगने के कारण इस दौरान शुभ कार्य और मांगलिक कार्य संपन्न नहीं होंगे.शुभ कार्य होंगे वर्जित

शनिवार, 17 अक्टूबर को शुरू होंगे इस बार शारदीय नवरात्र

इस बार शारदीय नवरात्र शनिवार, 17 अक्टूबर को शुरू होंगे और 24 अक्टूबर को राम नवमी मनाई जाएगी. 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी होगी. जिसके साथ ही चातुर्मास समाप्त होंगे. इसके बाद ही विवाह, मुंडन आदि मंगल कार्य शुरू होंगे.

हिन्दू पंचांग में बारह मास होते हैं. यह सूर्य की संक्रांति और चन्द्रमा पर आधारित होते हैं. हर वर्ष सूर्य और चन्द्र मास में लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. तीन वर्ष में यह अंतर लगभग एक माह का हो जाता है इसलिए हर तीसरे वर्ष अधिक मास आ जाता है. इसको लोकाचार में मलमास भी कहा जाता है. अधिमास में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं.

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