एक अरब युवाओं पर मंडरा रहा हियरिंग डैमेज का खंतरा: रिपोर्ट

एक अरब से ज्यादा युवाओं पर स्मार्टफोन और ऑडियो डिवाइसेज का इस्तेमाल करते हैं

नई दिल्ली

एक अरब से ज्यादा युवाओं पर स्मार्टफोन और ऑडियो डिवाइसेज का इस्तेमाल करते हैं। इससे उन पर हियरिंग डैमेज का खतरा मंडरा रहा है।

यूएन ने मंगलवार को इससे जुड़ी एक वार्निंग दी है। उन्होंने सेफ वॉल्यूम लेवल्स के नए सेफ्टी स्टैंडर्ड्स प्रस्तावित किए हैं। तेज आवाज में म्यूजिक सुनने की वजह से करोड़ों लोगों पर सुनने की क्षमता खोने के खतरे का जिक्र किया है।

डबल्यूएचओ ने इंटरनैशनल टेलिकम्युनेकेशंस यूनियन के साथ मिलकर एक नॉन-बाइंडिंग इंटरनैशनल स्टैंडर्ड ऑडियो डिवाइसेज की मैन्युफैक्चरिंग और यूज के लिए जारी किया है।

0-युवाओं पर मंडरा रहा खतरा

ऑडियो डिवाइसेज से सुनने की क्षमता खोने का खतरा सबसे ज्यादा युवाओं पर हैं। 12 से 35 साल तक की आयु के करीब पचास प्रतिशत लोग शामिल है।

1.1 अरब स्मार्टफोन यूजर्स तेज आवाज के ज्यादा संपर्क में रहने या फिर तेज आवाज में म्यूजिक सुनने की वजह से रिस्क पर हैं।

यूएन हेल्थ एजेंसी ने कहा है कि ऑडियो डिवाइसेज का इसमें बड़ा रोल है। डब्ल्यूएचओ चीफ टेड्रोस ऐडनॉम गेब्रेयिसस ने कहा कि दुनिया में हियरिंग लॉस के बचाव से जुड़ी जानकारी वैसे भी बहुत कम है।

0-हियरिंग डैमेज का ना ही इलाज,जिससे श्रवण क्षमता खोने का खंतरा

म्यूजिक सुनने की वजह से हियरिंग डैमेज का सामना न करना पड़े, इसके लिए नए स्टैंडर्ड्स बनाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि एक बार सुनने की क्षमता चली गई तो दोबारा वापस नहीं आ सकती।

ज्यादातर लोग इसे हल्के में लेते हैं और हियरिंग डैमेज के बाद इलाज करवाने की स्थिति में भी नहीं बचते और श्रवण क्षमता खो देते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने कहा कि इसमें सुधार की आवश्यकता है।

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