सिर्फ मशीन लगाने से उपचार नहीं होता : हाईकोर्ट

बिलासपुर।

हाईकोर्ट ने किडनी रोगियों के उपचार के लिए गरियाबंद जिला अस्पताल में डायलिसिस मशीन लगाने को अपर्याप्त बताया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ मशीन लगाने से उपचार नहीं होता है। इसके लिए विशेषज्ञ कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। कोर्ट ने सरकार को शपथ पत्र में यह बताने के लिए कहा कि मशीन से उपचार कब तक शुरू होगा। मामले में अगली सुनवाई 13 दिसंबर को होगी।

गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र के ग्राम सुपाबेड़ा में प्रदूषित पानी के कारण क्षेत्र के डेढ़ सौ से अधिक लोग किडनी के बीमारी से पीड़ित हो गए हैं। इसे लेकर देवाशीष तिवारी ने पर्सन इन पीटिशन याचिका दाखिल की। इस कोर्ट ने अधिवक्ता सुनील ओटवानी को न्याय मित्र नियुक्त कर जांच रिपोर्ट मांगी थी।

न्याय मित्र ने अपनी रिपोर्ट बताया कि गांव के पानी में रसायन की मात्रा अधिक होने के कारण अधिकांश लोगों किडनी रोग से पीड़ित हो गए है। इसके अलावा यहां शुद्घ पानी सप्लाई की व्यवस्था नहीं है। शासन ने भी स्वीकार किया गया कि गांव में किडनी पीड़ितों की संख्या अधिक है।

इस बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता लाई जा रही है। साफ पानी सप्लाई की व्यवस्था हो रही है। इसी प्रकार डायलिसिस मशीन लगाई जानी है। मामले को सुनवाई के लिए मंगलवार को चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी व जस्टिस पीपी साहू की डीबी में रखा गया।

सुनवाई के दौरान शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत कर कहा गया कि जिला अस्पताल में पीड़ितों के उपचार के लिए डायलिसिस मशीन लगा दी गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि सिर्फ मशीन लगाने से उपचार नहीं होता है। इसके लिए विशेषज्ञ स्टाफ होना जरूरी है। इसकी क्या व्यवस्था है। कोर्ट ने सभी कमियों को दूर कर मशीन कब तक शुरू कर दिया जाएगा, इस पर शपथ पत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

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