देसंविवि में खुला विश्व का प्रथम ताई ची केन्द्र

योग व ताई ची के संयुक्त पाठ्यक्रम का शुभारंभ शीघ्र : डॉ. चिन्मय पण्ड्या

हरिद्वार : देवसंस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार एवं चीन की यूनान मिंजू विश्वविद्यालय के बीच एमओयू हुआ। यह एमओयू विश्व की दो पुरातन विधाओं को नजदीक लायेगा। भारतीय विधा योग और चीन की ताई ची मिलकर विद्यार्थियों में एक नई विधा का प्रारंभ होगा। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय और यूनान विश्वविद्यालय मिलकर एक नये पाठ्यक्रम की शुरुआत देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में करने जा रहे हैं। ताई ची एक चीनी मार्शल आर्ट की पद्धति है जो यिंग और यांग को आधार मानकर मानवीय क्षमताओं को असरकारक बनाती हैं। वहीं योग मनुष्य के आंतरिक क्षमताओं को जगाकर श्रेष्ठता की ओर अग्रसर करता है।

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चीन से आये प्रतिनिधि समूह और देवसंस्कृति विश्वविद्यालय ने मिलकर ताई ची के केन्द्र का अनावरण किया। इस अनावरण में चीन से आये प्रतिनिधि मंडल ने विश्वविद्यालय के विविध कायक्रमों को जाना व उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत और चीन मिलकर विश्व को परंपरागत विशेषताओं का तोहफ़ा प्रदान कर सकते हैं । इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने भारत और चीन की ऐतिहासिक परंपराओं की विशेषता बताते हुए कहा कि ताई ची शारीरिक स्वास्थ्य की संपदाओं से परिपूर्ण है तो योग मानसिक और आत्मिक संपदाओं का भांडागार है। दोनों के अभ्यास से मनुष्य संपूर्ण स्वास्थ्य का उपहार नि:संदेह प्राप्त कर सकेगा। अनावरण के अवसर पर यूनानी मिंजू विश्वविद्यालय चीन से आए प्रतिनिधियों ने ताई ची पद्धति का प्रदर्शन भी किया।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा पिछले एक वर्ष से यूनानी मिंजू विश्वविद्यालय चीन के विद्यार्थियों को योग सिखाने के लिए यहाँ से शिक्षक जे जा रहे हैं, उसी तरह चीन से ताई ची का प्रशिक्षण देने हेतु शिक्षक देसंविवि आयेंगे ।

इस अवसर पर यूनानी मिंजू विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष लियो हैबिन, डीन प्रो जिओ जिंगडांग तथा निदेशक यू एक्सीनील, प्रोफेसर यूफैग सहित देसंविवि के प्रो. सुरेश, प्रो. सुखनन्दर, डॉ. अरुणेश, श्री दुर्गेश द्विवेदी, डॉ. संगीता कुमारी तथा कावेरी बाली सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे।

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