छत्तीसगढ़

ओपीजेयू के मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ने किया ‘इंडस्ट्री 4.0 पर पोस्ट

कोविड -19 का प्रभाव' विषय पर वेबिनार का आयोजन

(‘इंडस्ट्री 4.0 को पहले विभिन्न उद्योग चरणों अपना रहे थे, लेकिन अब कंपनियां उद्योगों के लिए तैयार व्यापार प्लेटफॉर्म्स के साथ आ गई हैं, जिससे यह एक बार में लागू किया जा सकता है।’- सब्यसाची बिस्वास, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, आईबीएम – कोलकाता)

रायगढ़: ओपी जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ के स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ने ‘इंडस्ट्री 4.0 पर पोस्ट कोविड -19 का प्रभाव’ विषय पर वेबिनार का आयोजन 16 मई को किया। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एन्ड हेड- डॉ. सिद्धार्थ एस. चक्रवर्ती ने वेबिनार के आयोजन के पीछे प्रमुख उद्देश्यों की चर्चा करते हुए बताया की ‘कोविड -19’ से पहले ‘इंडस्ट्री 4.0’ दुनिया भर में निर्माताओं के लिए कई विशाल संभावित लाभों के साथ बहुत रुचि का क्षेत्र था और इसे व्यापक रूप से “सकारात्मक” और भविष्य के सोच विषय के रूप में माना जाता था।

कोविड -19 ने लोगों के व्यवसाय व्यावसायिक जीवन दोनों में बहुत सारे बदलाव लाए 

कोविड -19 ने लोगों के व्यवसाय और व्यावसायिक जीवन दोनों में बहुत सारे बदलाव लाए हैं। आज इसने दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियों को लगभग ठप्प कर दिया है लेकिन लोगों का ध्यान अभी सर्वाइवल पर है न की नुक्सान पर। कोविड -19 के बाद की परिस्थितियां बिलकुल अलग होंगी, इंडस्ट्री का कार्य स्वरुप अलग होगा; और इन्ही सब बातों तथा आगे किस तरह बढ़ा जाय पर विशेष चर्चा करने के लिए इस वेबिनार का आयोजन किया गया जिसमे सब्यसाची बिस्वास, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, आईबीएम – कोलकाता मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

वेबिनार के दौरान सब्यसाची बिस्वास ने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन के माध्यम से पोस्ट कोविड -19 परिदृश्य में होने वाले प्रमुख परिवर्तनों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ‘इंडस्ट्री 4.0’ निश्चित रूप से अधिक महत्व प्राप्त करेगा और आने वाले दिनों में पहले की तरह तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि इंटरप्राइजेज के लिए पोस्ट कोविड -19 परिदृश्य एक “न्यू नार्मल” होगा और जिसमे वर्चुअल कम्युनिकेशन्स, रियल टाइम डाटा तथा डेटा संचालित निर्णय लेना शामिल होगा।

जब मशीनें न केवल डेटा एकत्र करेंगी बल्कि सीखेंगी और लागू भी करेंगी

 

उन्होंने इस तथ्य पर दबाव डाला कि ‘इंडस्ट्री 4.0′ के बुनियादी घटक जैसे IOT, 5G, ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी, एज़ कंप्यूटिंग आदि बहुत तेजी से बदलेंगे और, यह तब होगा जब मशीनें न केवल डेटा एकत्र करेंगी बल्कि सीखेंगी और लागू भी करेंगी। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री 4.0’ को इस परिदृश्य में विशेष रूप से चिकित्सा क्षेत्र और बड़े पैमाने पर उद्योगों में लाना होगा। सबसे बड़ा अंतर जो पोस्ट कोविड -19 परिदृश्य में देखा जाएगा, वह उस तरीके से होगा की जिस ‘इंडस्ट्री 4.0’ को पहले विभिन्न उद्योग चरणों अपना रहे थे, लेकिन अब कंपनियां उद्योगों के लिए तैयार व्यापार प्लेटफार्मों के साथ आ गई हैं, जिससे यह एक बार में लागू किया जा सकता है।

इस्पात उद्योग में ‘इंडस्ट्री 4.0’ को अपनाने से संबंधित सवालों में से एक का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इस्पात उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती इसका आकार और सोर्सिंग है। इसके अलावा कोविड -19 के बाद की जियो-पॉलिटिकल शिफ्ट भी इसे सीधे प्रभावित करने वाली है। उन्होंने साइबर सुरक्षा पर अपनी चिंता व्यक्त की क्योंकि यह ‘इंडस्ट्री 4.0’ के साथ जुड़ा सबसे बड़ा जोखिम है।

भारत में ‘इंडस्ट्री 4.0’ को अपनाने के लिए कुशल कार्यबल की आवश्यकता से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि युवा इंजीनियरों को प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग भाग जैसे, IoT, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग आदि पर ध्यान देना चाहिए और शैक्षणिक संस्थानों को इसे बढ़ावा देने के लिए उद्योगों के साथ साझेदारी करना चाहिए। चर्चा के अंत में उन्होंने ‘अटल इनोवेशन कम्युनिटी सेंटर’ की स्थापना की स्वीकृति तथा इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ओपी जिंदल विश्वविद्यालय के प्रबंधन के प्रयासों की सराहना की।

वेबिनार में लगभग 120 प्रतिभागियों ने भाग लिया

ओपी जिंदल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ आर. डी. पाटीदार ने वेबिनार के सफल आयोजन के लिए मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग और आयोजकों को बधाई देते हुए उनके अथक प्रयासों की सराहना की। वेबिनार में लगभग 120 प्रतिभागियों ने भाग लिया और वेबिनार के अंत में प्रो. आकाश पांडेय ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों को सूचनात्मक एवं परिणाममूलक चर्चा का हिस्सा बनने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

Tags
Back to top button