अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन पर किसान, महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

8 माह पहले भी हुआ था किसान आंदोलन

नई दिल्ली :

हजारों किसान 2 दिवसीय प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार को ठाणे से चला किसानों का मार्च आज मुंबई के आज़ाद मैदान पहुंच रहा है।

किसानों ने सूखे के लिये मुआवजे और आदिवासियों को वन्य अधिकार सौंपे जाने की मांग को लेकर एक बार फिर हजारों किसान महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

30 हजार किसानों ने लिया हिस्सा

मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित एवं भारत के जल पुरुष के नाम से मशहूर डॉ. राजेन्द्र सिंह भी इस मार्च में शामिल हैं। 30 हजार किसानों ने बुधवार दोपहर से पैदल यात्रा शुरू की। मार्च में शामिल एक नेता ने बताया कि

वे आजाद मैदान पहुंचने के बाद और फिर वे विधानभवन के पास प्रदर्शन करेंगे। विधानभवन में अभी राज्य विधानसभा का सत्र चल रहा है। मार्च में हिस्सा लेने वालों में अधिकतर लोग ठाणे, भुसावल और मराठवाड़ा क्षेत्रों से हैं।

प्रदर्शन का आयोजन कर रहे लोक संघर्ष मोर्चे की महासचिव प्रतिभा शिंदे ने कहा कि हमने राज्य सरकार से लगातार कहा है कि वह लंबे समय से चली आ रही हमारी मांगों को पूरा करे लेकिन प्रतिक्रिया उदासीन रही है।

उन्होंने कहा कि हम लोग इस बात का अधिक से अधिक ख्याल रख रहे हैं कि मुंबई के लोगों को कोई परेशानी नहीं हो। इस साल मार्च में वाम संबद्ध ऑल इंडिया किसान सभा के नेतृत्व में हजारों किसानों ने अपनी मांगों को लेकर 180 किलोमीटर लंबे मार्च में हिस्सा लिया था।

क्या है मामला

किसान स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने की मांग कर रहे हैं। स्वामीनाथन रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि जमीन और पानी जैसे संसाधनों तक किसानों की निश्चित रूप से पहुंच और नियंत्रण होना चाहिए।

वे न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और इसे लागू करने के वास्ते न्यायिक तंत्र की भी मांग कर रहे हैं। ये किसान कृषि संकट से निपटने के लिये संघर्ष कर रहे हैं और राज्य में भाजपा नीत सरकार द्वारा पिछले साल घोषित कर्ज माफी पैकेज को उचित तरीके से लागू करने, किसानों के लिये भूमि अधिकार और खेतिहर मजदूरों के लिये मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

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