टिकट वितरण के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा में दिखने लगा विरोध

कांकेर, रायगढ़ और जांजगीर में पार्टी नेताओं की बगावत

रायपुर। अभी छत्तीसगढ़ से भाजपा ने सिर्फ 5 नामों का ऐलान किया है लेकिन इन नामों के ऐलान के बाद ही पार्टी नेताओं में हड़कंप पैदा हो गया है। जिन सांसदों को टिकट कटा है वहां से विरोध और बगावत के सुर सुनाई देने लगे हैं। जांजगीर में सांसद के बेटे ने मोर्चा खोला है, तो वहीं कांकेर में पूर्व विधायक ने बागी बनकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। चुनाव के ठीक पहले पार्टी के अंदर मचे इस घमासान ने बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी है।

आपको बता दें कि आज सुबह जांजगीर की सांसद कमला पाटले के बेटे ने प्रत्याशी चयन पर सवाल उठाया था और पार्टी नेतृत्व को आड़े हाथों लिया था। उसके थोड़े देर बाद कांकेर से खबर आयी की पूर्व विधायक सुमित्रा मारकोले पार्टी के खिलाफ खड़ी हो गई है। नाराज सुमित्रा ने निर्दलीय नामांकन फार्म भी खरीद लिया है और पार्टी के खिलाफ बागी बनकर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर दिया है।

सुमित्रा ने कहा कि पार्टी ने ऐसे प्रत्याशी को टिकट दिया है, जिसने आज तक पार्टी का झंडा तक नहीं उठाया है। मुझे कार्यकर्ताओं ने चुनाव लड़ने के लिए कहा है, मैं जरूर चुनाव लड़ूंगी, मैंने आज नामांकन फार्म भी खरीद लिया है।

उन्होंने आगे कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता लोगों की भावनाओं के आधार पर चुनाव लड़ रही हूँ, क्योंकि यहां पार्टी में जो काम कर रहे हैं, उसकी कोई इज्जत नहीं है। वर्षों से काम करते आ रहे हैं कि अब अवसर मिलेगा, लेकिन बाहर से लाकर चुनाव लड़वाएगें तो कहां से पार्टी के लोग काम करेगें। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी के द्वारा जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है।

जशपुर में भी भाजपा में बगावत

रायगढ़ लोकसभा से गोमती साय को टिकट मिलने के बाद जशपुर में भी भाजपा में बगावत के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं।ख़बर आ रही है कि 2013 के चुबाव में पार्टी से बगावत करने के कारण 5 सालों तक बनवास काटकर 8स बार भाजपा में फिर से शामिल होने वाले जनजातीय समाज के दिग्गज नेता पूर्व मंत्री गणेश राम भगत दुबारा भाजपा को अलविदा कहने वाले हैं बल्कि जनजातीय समुदाय की थीम पर नई पार्टी का गठन भी करेंगे।

सोशल मीडिया के हवाले से आ रही खबरों के मुताविक गणेश राम भगत को टिकट नही ढिये जाने से भगत समर्थकों में काफी नाराजगी है और इनके समर्थक इन पर पार्टी से इस्तीफा देने का दबाव बना रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि भगत ने लोकसभा के लिए टिकट की मांग नही की थी स्वयं पार्टी के नेताओं ने इन्हें टिकट देने का भरोसा देने से लेकर चुनाव की तैयारी करने के भी संकेत दे दिए थे लेकिन इनका नाम काट दिया गया।

नयी पार्टी की घोषणा होने के भी संकेत

इनके समर्थकों ने जल्द ही नयी पार्टी की घोषणा होने के भी संकेत दे रहे हैं। बहरहाल गणेशराम भगत की ओर से अब तक ऐसे कोई संकेत नही मिले हैं न ही उन्होंने मीडिया को ऐसा कोई बयान दिया है। गणेशराम भगत 5 साल बाद भाजपा में वापस आये हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में जशपुर विधानसभा सीट की टिकट के साथ भाजपा में इनकी वापसी की खूब चर्चा हुई थी लेकिन टिकट की बात चर्चा में ही खत्म हो गयी हांलाकि टिकट की घोषणा के बाद उन्हें पार्टी में वापस ले लिया गया।

गणेशराम भगत जनजातीय समुदाय के बड़े नेता माने जाते है और इनके समर्थकों की लम्बी चौड़ी फेहरिस्त है। मिशनरीज के खिलाफ लगातार बयानबाजी के कारण इनकी कट्टर हिंदूवादी नेता की छवि के चलते एक बड़ा हिन्दू आदिवासी तबका इनके साथ है। ऐसे में इनकी नाराजगी या पार्टी से अलग हो जाना भाजपा के लिए शुभ संकेत नही है।

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