हथनीकला और गीधा में विधिक सहायता एवं सलाह शिविर आयोजित

- मनीष शर्मा

मुंगेली: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुंगेली द्वारा ग्राम हथनीकला और गीधा में 23 जून को विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसके जायसवाल ने कहा कि मोबाईल का उपयोग करें दुरूपयोग न करें। यदि आप मोबाइल का दुरूपयोग करते है तो गूगल में स्टोर हो जाता है। उन्होने धारा 125 के तहत पति-पत्नी विवाद को समझाया और गांव के एक दम्पत्ति को समझाइश दी।

जिसका मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। उसको समझाया गया कि अपनी बच्ची का भविष्य देखते हुए पति-पत्नी विवाद को राजीनामा के आधार पर निपटायें। उसके बाद उन्होने बाल यौन शोषण के संबंध में बताया कि यौन शोषण के शिकार बच्चों की सबसे ज्यादा संख्या हमारे देश में है घर के बाहर और घर के अंदर भी बच्चों के साथ ऐसी घटनाएं होती है।

उन्होने ग्रामवासियों से कहा कि इस बात से सहमत होंगे कि यौन शोषण बच्चों के अधिकारों का सबसे भीषण उल्लंघन है। इससे पीड़ितों और उनके परिवारों पर दीर्घकालिक दुष्परिणाम होते है। सच यह है कि यौन शोषण की आशंका लड़कियों के सामने ज्यादा रहती है, लेकिन प्रचलित मान्यता के विपरीत लड़के भी इस खतरे का सामना करते है। मानसिक और शारीरिक निशक्तता वाले बच्चों के साथ यह खतरा और भी अधिक होता है।

यौन शोषण का अपराधी बच्चे का परिचित भी हो सकता है और अजनबी भी। 30 प्रतिशत मामलों में अपराधी व्यक्ति बच्चे का परिचित और विश्वास पात्र पाया जाता है। ऐसा व्यक्ति आम तौर पर भरोसे के संबंधों का फायदा उठाता है और अपनी ताकत का दुरूपयोग करके बच्चों को अपना शिकार बनाता है। बहुत सारे मामलों में तो अपराधी व्यक्ति बच्चे का कोई घनिष्ठ संबंधी होता है।

जब अपराधी व्यक्ति परिवार का सदस्य होता है तो इस तरह की घटना को कौटम्बिक व्यभिचार कहा जाता है यौन शोषण या यौन कृत्य की घटना के बारे में बच्चे किसी को कुछ भी बताने को डरते है। इसके बाद उन्होने मोटरयान अधिनियम के संबंध में जानकारी दी। न्यायालय बाल कल्याण समिति के सदस्य एसएम शमीम ने कहा कि बाल यौन शोषण क्या होता है।

अगर किसी बच्चे के साथ किसी तरह का यौन संबंध बनाया जाता है या उसे इस काम के लिए उपयोग किया जाता है या उसे अश्लील सामग्री दिखाई जाती है तो यह बाल यौन शोषण कहलाता है। इससे बच्चे की सहमति हो या न हो चाहे अपराधी व्यक्ति अपनी यौन संतुष्टि के लिए ऐसा कर रहा हो या किसी और की यौन संतुष्टि के लिए इस तरह के कृत्य को बाल यौन शोषण कहा जाता है।

आम धारणा यह है कि जब बच्चे के साथ बलात्कार होता है तो वहीं बाल यौन शोषण कहलाता है यह सोच गलत है। अगर बलात्कार नहीं हुआ तो भी बच्चा यौन शोषण का शिकार हो सकता है। बाल यौन शोषण के कई रूप है जैसे कि यौन छेड़छाड़, बच्चे को सहलाकर, थपथपाकर चूमना, आपस में मैथून करना, अश्लील बाते करना, अश्लील इशारे करना इस श्रेणी में आते है।

टीआई मुंगेली एलपी पटेल ने 26 जून को अपने ग्राम में अंतर्राष्ट्रीय नशा उन्मूलन दिवस मनाने और वन अधिनियम के तहत हरा-भरा पेड़ नही काटने कहा। उन्होने गांव के तालाब, गोठान के आसपास वृक्षारोपण एवं उसकी सुरक्षा करने के लिए ग्रामीणों को समझाइश दी। सरपंच द्वारा आभार व्यक्त किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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