छत्तीसगढ़

रायगढ़ पूर्वांचल विचार मंच महापल्ली द्वारा गोष्ठी का आयोजित

रायगढ़ पूर्वांचल विचार मंच महापल्ली द्वारा बटमूल आश्रम महाविद्यालय महापल्ली जिला रायगढ़ में आयोजित गोष्ठी में मंच के संस्थापक एन आर प्रधान ने सबके स्वागत अभिनंदन किया । गोष्ठी में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई । डाॅ सर्वेश शरण गुप्ता लोइंग ने प्रश्न किया क्या कारण है आज अधिकतर सरकारी स्कूलों में सभी सुविधाएं, पूरा स्टाफ होने के बावजूद भी पढ़ाई की स्थिति प्राइवेट स्कूलों की अपेक्षा खराब है। डाॅ पी एल पटेल प्राचार्य ने कहा कि पालक अपने बच्चों को इंटेलिजेंट बनाना चाहते हैं आई ए एस, आई पी एस, डाॅक्टर इंजिनियर बनाना बनाना चाहते हैं इसलिए ज्यादा फीस पटाकर नीजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। श्री आनंद प्रधान सेवा निवृत्त शिक्षक ने कहा कि अपने बच्चों की शिक्षा के लिए जागरूक और धनी और पढ़े लिखे पालक प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को भेज रहे हैं। शेष बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं । स्वाभाविक है सरकारी स्कूलों की स्थिति अच्छी नहीं रहेगी । श्री रामावतार अग्रवाल सचिव शिक्षा समिति बटमूल काॅलेज ने कहा शासन की गलत नीति प्राथमिक तथा पूर्व माध्यमिक कक्षाओं में बिना परीक्षा कक्षोन्नति के कारण सरकारी स्कूलों की हालत खराब है। आगे कहा कि प्राथमिक पूर्व माध्यमिक कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम बनाने वाले उच्च अधिकारियों को फिल्ड का कोई अनुभव नहीं है । उन्हें इन कक्षाओं पढ़ाने का अनुभव ही नहीं है। वे कैसे बेहतर पाठ्यक्रम बनाएंगे? श्री टीका राम प्रधान जनपद पंचायत सदस्य ने बताया कि वे हमारे रायगढ़ पूर्वांचल के तीन मिडिल स्कूलों के कक्षा आठवीं में गणित का एक छोटा प्रश्न हल करने के लिए कहा । दो बटे तीन धन तीन बटे चार? लेकिन किसी विद्यार्थी ने सही सही हल नहीं किया । यह प्रश्न कक्षा चौथी का है।

अब किसे दोष दें? सरकार, शिक्षक, पालक या विद्यार्थी? कौन जिम्मेदार है? उन्होंने आगे कहा अपने बच्चों को घर में कुछ समय पढाना चाहिए । ज़रूरी नहीं कि कोई शिक्षक ही पढ़ा सकता है। पढ़ा लिखा व्यक्ति प्राथमिक कक्षा के बच्चे को तो पढ़ा ही सकता है। पूर्व सरपंच श्री टेक चंद गुप्ता जी ने कहा कि सरकारी स्कूल के विद्यार्थी भी नाम रोशन कर रहे हैं । अनपढ़ घर के बच्चे भी मेरिट में आ रहे हैं । श्री भीष्म देव भोय “शशि” महापल्ली ने कहा शिक्षकों को स्कूल में अपनी डयूटी इमानदारी से करनी चाहिए । आफिस काम लिखा पढ़ी करने के बहाने क्लास नहीं छोड़ना चाहिए । शिक्षकों को पाठ्यक्रम के अलावा भी पढ़ते रहना चाहिए । अपना ज्ञान अपडेट करते रहना चाहिए । सेवा निवृत्त शिक्षक एन आर प्रधान पंडरीपानी ने कहा कि आजकल गांवों में पहले जैसा पढ़ाई का आम माहौल नहीं है। पढ़ाई का माहौल बनाने के लिए हर गांव में रविवार को पढ़े लिखे लोगों के द्वारा विद्यार्थियों को पढ़ाना चाहिए । जिस गांव में पले बढ़े उस गांव के के बच्चों की नींव बनाने के लिए थोड़ा समय दान करना चाहिए । महापल्ली के श्री भीष्म देव भोय तथा श्री टीका राम प्रधान ने कहा कि वे भी अपने गांव में रविवार को अध्ययन अध्यापन केंद्र के संचालन के लिए कोशिश करेंगे ।

विचार मंच के संरक्षक बटमूल महाविद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष श्री अस डी पंडा जी ने प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाई के लिए पहले चला रहे सामाख्या योजना की जानकारी देकर कहा कि उसे अब बंद कर देना स्कूल की पढ़ाई के हित में ठीक नहीं हुआ । खेल खेल में व्यवहारिक ज्ञान दिया जाता था। विद्यार्थी उससे सरलता पूर्वक भाषा, गणित, विज्ञान समझ जाते थे। आगे कहा कि विद्यालयों में ज्ञानार्थ प्रवेश सेवार्थ प्रस्थान होना चाहिए । उन्होंने लार्ड मोकाले की शिक्षा पद्धति की आलोचना करते हुए व्यवहारिक शिक्षा पर बल दिया । महाविद्यालय के प्राचार्य तथा विचार मंच के पदेन संरक्षक डाॅ पद्म लोचन पटेल जी ने कहा कि शिक्षा कैसी हो? यह प्रश्न हमेशा बना रहेगा । यह कभी खत्म न होने वाला प्रश्न है।
शिक्षा पद्धति में परिर्वतन होते रहेंगे । आम जन और शासन के उच्चाधिकारी इस पर विचार करते रहेंगे । आगे कहा कि विद्यार्थी अपने शिक्षक की बात को बहुत महत्व देते हैं। आंख बंद कर मानते हैं । शिक्षक को आदर्श होना चाहिए । विद्यार्थी के लिए तभी वे सम्माननीय होंगे । गुरू होंगें। अंत में उन्होंने सबको धन्यवाद दिया । कहा कि इसी तरह गोष्ठी में आप आइये तथा अपने मित्रों को भी आमंत्रित कीजिये ।
मंच संचालन संयोजक श्री भीष्म देव जी ने किया ।.

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रायगढ़ पूर्वांचल
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