शिशु एवं मातृ पोषण की गुणवत्ता में सुधार को लेकर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

पटना : अलाइव एंड थराइव के सहयोग से महावीर वात्सल्य अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं नर्सों की मातृ, शिशु एवं छोटे बच्चों के पोषण पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गयी . कार्यशाला के माध्यम से मातृत्व के प्रथम 1000 दिनों की महत्ता पर बल देते हुए मातृ, शिशु एवं छोटे बच्चों के पोषण में सुधार लाने के लिए जरुरी प्रोटोकॉल पर विस्तार से जानकारी दी गयी. अस्पतालों में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के साथ इसके लिए जरुरी परामर्श की भूमिका पर भी चर्चा की गयी.

इस अवसर पर महावीर वात्सल्य अस्पताल के निदेशक डॉ. शिव शंकर झा ने कार्यशाला का शुभारम्भ करते हुए कहा कि मातृ, शिशु एवं छोटे बच्चों के पोषण में सुधार लाने के लिए चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आवश्यक है. इसके लिए इस तरह की प्रशिक्षण कार्यशाला गुणवत्ता सुधार में सहायक साबित होगी. उन्होंने अलाइव एंड थराइव को ध्न्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए शिशु मैत्री अस्पतालों को पहल करनी चाहिए. उन्होंने वैश्विक स्तर पर तय किए गए लक्ष्यों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु पोषण की गुणवत्ता में सुधार के लिए एनीमिया, दुबलापन एवं बौनेपन जैसी बुनियादी कुपोषण की समस्याओं से निज़ात पाना आवश्यक होगा.

इसके लिए मातृत्व के प्रथम 1000 दिनों के दौरान मातृ एवं शिशु पोषण पर ध्यान देने के साथ छोटे बच्चों के पोषण में भी सुधार की जरूरत होगी. वरीय तकनीकी सलाहकार अलाइव एंड थराइव डॉ. शैलेंद्र जगताप ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला में पटना के तीन महत्वपूर्ण निजी अस्पतालों (कुर्जी हॉस्पिटल ,त्रिपोलिया सोशल सर्विस हॉस्पिटल और महावीर वात्सल्य अस्पताल) के विशेषज्ञ चिकित्सक (स्त्री एवं शिशु रोग विशेषज्ञ), परामर्श दाताओं एवं नर्सों के शामिल होने से चिकित्सकीय सुविधा के साथ बेहतर पोषण परामर्श की गुणवत्ता में सुधार का रास्ता प्रशस्त होगा. उन्होंने बताया कि गर्भवती महिला का सही पोषण उसके गर्भ में पल रहे शिशु के जीवन पर दूरगामी प्रभाव डालता है. इसलिए महिला के गर्भवती होने के बाद ही उनके पोषण का ख्याल रखा जाना अनिवार्य होता है.

शिशु जन्म से लेकर शिशु के दो वर्ष तक समय शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अहम होता है. शिशु जन्म के शुरूआती 1 घंटे के भीतर स्तनपान एवं 6 माह तक केवल स्तनपान शिशु के रोग प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत कर उसे आगे भी स्वस्थ रखने में मददगार होता है. उन्होंने अस्पताल में शिशु मित्रवत माहौल बनाने पर भी बल दिया. साथ ही अस्पताल में ओपीडी में प्रसव पूर्व जाँच के लिए आने वाली माताओं को उनके पोषण के साथ गर्भस्थ शिशु के बेहतर पोषण के सम्पूर्ण परामर्श प्रदान किए जाने की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी.

इस दौरान डॉ. मुकेश यादव, शिशु रोग विशेषज्ञ संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल-न्यू दिल्ली ने शुरूआती 1 घंटे के स्तनपान एवं 6 माह तक केवल स्तनपान से होने वाले फायदों के विषय में प्रेजेंटेशन एवं विडियो के माध्यम से जानकारी देते हुये समाज में स्तनपान को लेकर फैली हुई भ्रान्तियों के बारे में चर्चा कर इसे बेहतर परामर्श के माध्यम से दूर करने की जानकारी दी. साथ ही स्तनपान कराने में होने वाली कठिनाईयों को दूर करने के लिए सटीक विधि के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गयी.

उन्होने प्रसव के उपरांत माताओं को शिशु एवं छोटे बच्चों के पोषण पर दी जाने वाली परामर्श की गुणवत्ता पर भी प्रकाश डालते हुए विस्तार से चर्चा किया. इस दौरान महावीर वात्सल्य अस्पताल के उप निदेशक डॉ लखिन्द्र प्रसाद , अलाइव एंड थराइव की जयिता दाशगुप्ता और कुर्जी हॉस्पिटल ,त्रिपोलिया सोशल सर्विस हॉस्पिटल और महावीर वात्सल्य अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ ,शिशु रोग विशेषज्ञ , परामर्श दाता एवं नर्स उपस्थित थे.

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