“अपराध के बढ़ते नये आयाम: फोरेंसिक साइंस के लिए चुनौती” विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन

फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन एजेंसी बिलासपुर के द्वारा "अपराध के बढ़ते नये आयाम: फोरेंसिक साइंस के लिए चुनौती" विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया

ब्यूरो चीफ :- विपुल मिश्रा
रिपोर्टर :-प्रणव कुमार

बिलासपुर दिनांक-11/05/2021  : फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन एजेंसी बिलासपुर के द्वारा “अपराध के बढ़ते नये आयाम: फोरेंसिक साइंस के लिए चुनौती” विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया जिसमे मुख्य वक्ता सुंदरराज पी ने कहा कि फोरेंसिक साइंस का क्राइम इन्वेस्टिगेशन एक महत्वपूर्ण रोल होता है। जैसे जो भी घटना घटित होती है उसके बाद उसका सही तरीके साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन करके न्यायालय के समक्ष जितने अच्छे से प्रस्तुत करेंगे उसी आधार पर न्यायलय अपराध में कौन आरोपी है और कौन दोषी उसका निर्णय करता है जिससे न्याय प्रणाली में मदद मिलती है।फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन एजेंसी बिलासपुर के द्वारा "अपराध के बढ़ते नये आयाम: फोरेंसिक साइंस के लिए चुनौती" विषय पर एक दिवसीय वेबिनार

न्यायालय साक्ष्य के आधार पर ही संबंधित प्रकरण की सुनवाई करती है इसीलिए क्राइम सीन का बारीकी से निरीक्षण करना अति आवश्यक है ताकि न्यायालय को बेहतर फैसला लेने में मदद मिल सके। साथ ही फोरेंसिक टीम के सहयोग से पुलिस क्राइम सीन में अब सही तरीके से साक्ष्यों का संकलन करती है जिससे केस मजबूत होता है और हमारा सजा का दर (Conviction rate) बढ़ता जा रहा है।

उदाहरण देते हुए उन्होंने दुर्ग जिले के बहुचर्चित अभिषेक मिश्रा हत्याकांड के बारे में बताया कि पुलिस बारीक से बारीक साक्ष्यों की सहायता से संबंधित प्रकरण को मजबूती से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जिससे पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी। कई बार जानकारी के आभाव में जनता या पुलिस क्राइम सीन को बिगाड़ डालती थी लेकिन अब पुलिस आम जनता को इसके लिए कार्यक्रम के माध्यम से जागरूक कर रही है और साथ ही पुलिस के जवानों एवं अधिकारियों को भी फोरेंसिक एक्सपर्ट के माध्यम से ट्रेन किया जा रहा है।

 सुन्दरराज पी ने कहा कि अपराध पर लगाम लगाने के लिए हमें दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर काम करने की जरूरत है।

1. आम जनता को जागरूक करना।

2. साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन को बढ़ावा देना।

सर ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 10 साल पहले 15 अगस्त के दिन बस्तर जिला मुख्यालय के करीब एक व्यक्ति कि सिर कटी लाश जंगल में मिली जिसमें क्षेत्र में काफी सनसनी फैल गई थी। उस घटना स्थल पर जब मै अपनी टीम से साथ निरीक्षण पहुंचा जहां हमने देखा कि लाश के बगल में एक बैग पड़ा है जिसमें से एक पहचान पत्र मिला जो एक सीआरपीएफ जवान का था और उसी बैग मै एक पर्चा भी मिला जिसमें लिखा था कि सुरक्षा बल के कैंप को बस्तर से हटा देना चाहिए।

फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम

जबकि फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम सर्विस रिकॉर्ड में मिली जानकारी के अनुसार घटना स्थल पर मिली हुई लाश को उस जवान की नहीं है का रहे थे। क्योंकि उस सर्विस रिकॉर्ड में जवान का हाइट 5 फीट 8 इंच लिखा है जबकि घटना स्थल पर मिली लाश की हाइट लगभग 5 फीट 4 इंच थी। फिर बाद में और पुख्ता सबूत जुटाने के लिए लाश का डीएनए टेस्ट कराया गया जिसमें उस लाश से डीएनए सेंपल लिए और उनके परिजन से भी सेंपल लिए जब डीएनए रिपोर्ट आया तब पता चला कि दोनों अलग अलग है।

जिससे यह साबित हुआ कि घटना स्थल पर मिली लाश उस जवान की नहीं थी। बावजूद पुलिस अपनी तहकीकात करती रही और बहुत ही कम समय में मुख्य अपराधी तक पहुंचने में सफलता मिल ही गई। जिसे हत्या के जुर्म में गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है। इससे यह बात तो साफ है कि अपराधी गुमराह करने के लिए कई तरह के पैंतरे भले ही अपना ले लेकिन किसी भी हाल में पुलिस और फोरेंसिक टीम के चंगुल से बच के नहीं जा सकते।

फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन एजेंसी

आईजी ने फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के सभी टीम मेंबर्स को शुभकमनाए देते हुए कहा कि फोरेंसिक जांच की मांग आने वाले समय में बढ़ते ही जाएगी जिसके लिए हम सबको मिलकर काम करने की जरूरत है।

एजेंसी के डायरेक्टर एवं फोरेंसिक एक्सपर्ट दिपेन्द्र बारमते ने बताया कि हमारी एजेंसी वैज्ञानिक अन्वेषण के माध्यम से अपराधियों को कठोर सजा एवं पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने हेतु प्रयासरत है इसी संदर्भ में हमारी एजेंसी प्रभावी रूप से आगे आ रही है। ताकि माननीय न्यायालय को बेहतर निर्णय देने में सुविधा हो।

कार्यक्रम में एफ एस एल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी पी एस भगत, फोरेंसिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सुधीर यादव, कोनी थाना प्रभारी रविन्द्र यादव, मीडिया प्रभारी प्रतिभा जे मिश्रा, एडवोकेट मनमोहन कश्यप, प्रोग्राम कॉर्डिनेटर रात्रि लहरी, विनय सोनवानी, अनुराग कुजूर एजेंसी के सभी टीम मेंबर्स एवं फोरेंसिक विभाग से समस्त छात्रगढ़ उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में फोरेंसिक स्टूडेंट एसोसिएशन का भी सहयोग रहा।

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