छत्तीसगढ़

बटमूल आश्रम महाविद्यालय महापल्ली में संगोष्ठी का आयोजन

रायगढ़ : रायगढ़ पूर्वांचल विचार मंच द्रारा बटमूल आश्रम महाविद्यालय महापल्ली जिला रायगढ़ में आरक्षण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. स्वागत अभिन्दन पश्चात एन आर प्रधान ने आरक्षण पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हजारों साल से कुछ जातियों को शिक्षा से वंचित कर उनका आर्थिक सामाजिक शोषण किया गया. इस शोषित दलित वर्ग के विकास के लिए हमारे देश में आजादी के पश्चात विभिन्न क्षेत्रों में आरक्षण दिया गया. यह तत्कालीन आवश्यकता थी.

मानवीयता थी लेकिन इस आरक्षण व्यवस्था से प्रतिभा कुंठित हो रही है. दोश की प्रतिभा का बहुत नुकसान हो रहा है. आरक्षित वर्ग के प्रति अनारक्षित वर्ग का विद्वेश भाव बढ़ रहा है. जो हमारे देश समाज के हित में नहीं है. अब तक उन जातियों का सामाजिक आर्थिक सुधार कुछ हद तक हो चुका है. अब हर तरह का आरक्षण बंद होना चाहिए.

राजनैतिक दलों को चाहिए कुर्सी का मोह त्याग कर इस आरक्षण को खतमलकरने का साहस करें. आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग के विकास के लिए शासन द्वारा उन्हें हर तरह की सुविधाएं देकर आर्थिक सहयोग करना चाहिए. उनके ल्ए छात्रवृति, कोचिंग क्लास, नाइट क्लास, आवासीय छात्रावास, बस आदि की व्यवस्था करनी चाहिए. आरक्षण हर हालत में बंद होना चाहिए.

जागेश्वर गुप्ता सेवा निवृत शिक्षक विजयपुर रायगढ़ ने वर्तमान आरक्षण व्यवस्था को बदलने के लिए जोर देते हुए कहा कि जाति आधार पर नहीं आर्थिक आधार पर आरक्षण देना चाहिए. गरीब तथा पिछड़े या शिक्षा से वंचित वर्गों में शिक्षा का प्रसार कर हर क्षेत्र में उन्हें सुविधा देनी चाहिए. उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहिए अंतिम पंक्ति अंतिम पंक्ति को भी मुख्यधारा में जोड़ना चाहिए.

वीथिका के सचिव श्री आनंद प्रधान सेवा निवृत शिक्षक लोइंग ने कहा कि आज के संदर्भ में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को उत्थान का अवसर देना चाहिए. उन्हें ही ट आरक्षण देना चाहिए, चाहे वह किसी भी जाति का हो.

प्पदोन्नति में आरक्षण बिल्कुल नहीं होना चाहिए. साथ ही प्रतिभा का सम्मान होना चाहिए. किसी प्रकार का सामाजिक भेदभाव उचित नहीं कहा जा सकता. किसी भी व्यक्ति को आरक्षण केवल एक बार दिया जाना चाहिए. आर्थिक आधार पर ही आरक्षण देना उचित है` जाति आधार पर आरक्षण बंद किया जाना चाहिए.

रचनाकार श्री पी एम पंडा सेवा निवृत बैंक मेनेजर महापल्ली ने कहा कि यह ठीक है कि तत्कालीन समय में जातिगत आरक्षण दिया गया था उस समय इसकी आवश्यकता थी. क्योंकि आज सामाजिक परिवर्तन हो चुका है.

किसी भी वर्ग को किसी भी कार्य के लिए प्रतिबंध नहीं होना चाहिए. अब आरक्षण केवल आर्थिक आधार पर एवं शारीरिक विकलांगता की स्थिति में दिया जाना चाहिए. शिक्षा तथा चिकित्सा के क्षेत्र में किसी भी हालत में आरक्षण नहीं देना चाहिए. कमजोर वर्ग को शिक्षा एवं आहार हेतु उचित सुविधा दी जानी चाहिए.

साहित्यकार श्री टीका राम प्रधान जनपद पंचायत सदस्य महापल्ली ने कहा कि दरअसल स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात देश के संविधान में लागू की गई आरक्षण की व्यवस्था तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था में स्थापित विसंगतियों तथा पारंपरिक जातियों में बंटे समाज की असमानता और सहिष्णुता का प्रमाणित दस्तावेज है.

आरक्षण मूलतः दो वर्गों के बीच की खाई को पाटने की दिशा में उठाया गया एक दूरदर्शी कदम था और उसका सकारात्मक परिणाम भी सामने आया है. निम्न वर्गों के प्रति पारंपरिक रूप से घृणा द्वेष व शोषण के भाव में कमी आई है. अवसरों की प्राप्ति से उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है किंतु वर्तमान में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करना समाज की जरूरत है तथा समीक्षा उपरांत आरक्षण व्यवस्था के स्वरुप में बदलाव करना चाहिए. दुर्भाग्य से आरक्षण व्यवस्था के साथ जुड़ा राजनीतिक नफा-नुकसान का गणित इसके बीच में रोड़ा बना हुआ है.

रायगढ़ पूर्वांचल की साहित्यिक संस्था वीथिका के अध्यक्ष श्री शेष चरण गुप्ता पत्रकार महापल्ली ने वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में परिवर्तन की जरूरत बताते हुए कहा कि एक दौर था जब वर्ण व्यवस्था के तहत निम्न जाति के लोगों को हेय दृष्टि से देखा जाता था. समाज में इनकी स्थिति दयनीय थी.

उन्हें आगे उठाने के लिए आजादी के बाद भारतीय संविधान में आरक्षण देकर उन्हें ऊपर उठाने की दिशा में पहल हुई . किंतु आज आजादी के सत्तर साल बाद भी वह आरक्षण बकरार रखा गया है. नौकरी, पढ़ाई व अन्य गतिविधियों में सरकार की ओर से दलित वर्ग को दी गई आरक्षण से आज भी इस वर्ग विशेष का उत्थान नहीं हो पाया. कारण है उस वर्ग को आज भी अशिक्षित रखा गया है.

उन्हें प्रलोभन देकर सरकार वोट बैंक बना कर रखा है. किसी वर्ग विशेष को नौकरी के आरक्षण में देते आने से प्रतिभाओं को आगे बढ़ने में बाधा बन गई है . इसी आरक्षण नीति के कारण जातिवाद पनप रहा है. आरक्षण जाति आधार पर न होकर आर्थिक आधार पर होना चाहिए. सभी वर्ग के गरीब व्यक्ति का सामाजिक उत्थान के साथ आर्थिक सुधार भी हो सकेगा.

एकता परिषद के जिला अध्यक्ष रघुवीर प्रधान जुर्डा ने कहा आरक्षण का प्रावधान आजादी के बाद सीमित अवधि के लिए रखा गया था . उसे निर्धारित समय तक ही रखा जाना था किंतु राजनेताओं ने इस मुद्दे को वोट बैंक बनाए रखने के लिए अभी तक जारी रखा है. वर्तमान में भी राष्ट्रीय स्तर पर मूल मुद्दों से आम जनता का ध्यान हटाने के लिए, आगामी विधानसभा तथा लोकसभा चुनाव को दृष्टि में रखकर अपने स्वार्थ के लिए आरक्षण के मुद्दे को हवा दे रहे हैं जो समाज के लिए खतरा है. आरक्षित व अनारक्षित दो वर्गों में देश का विभाजन करना अनैतिक है.

के एन प्रधान सेवानिवृत्त ब्रांच मैनेजर रायगढ़ ने कहा आज आरक्षण विषय को लेकर देश जल रहा है. समाज अशांत है. संविधान में दस साल के लिए अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण की व्यवस्था रखी गई थी. राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के कारण, अपनी सत्ता अपने बनाए रखने के लिए आरक्षण को बार-बार आगे बढ़ाते रहे. आज आर्थिक आधार पर आरक्षण प्रासंगिक नहीं है वर्तमान में आरक्षण आर्थिक आधार पर ही होना चाहिए.

किसी भी वर्ग का नागरिक हो अपनी प्रतिभा के उपयोग से वंचित किया जाना कतई उचित नहीं है. सरदार पटेल जी के संविधान निर्माता अंबेडकर जी जी से कहा था कि इसे प्रावधान में रखा जाना उचित नहीं है परंतु उनकी बात नहीं मानी गई . फलस्वरूप आज भी देश जूझ रहा है. आरक्षण जाति के आधार पर ना होकर आर्थिक स्थिति के आधार पर ही होना चाहिए.

रचनाकार बी आर साहू शिक्षक महापल्ली ने कहा कि देश में शिक्षा प्रसार पर अधिक जोर देना चाहिए. समाज का अंतिम वर्ग का व्यक्ति भी शिक्षित होकर स्वावलंबी बने. आगे कहा कि परिवर्तन संसार का नियम है. परिवर्तन ही गति है. परंपराओं नियम कानून में आवश्कतानुसार संशोधन परिवर्तन होना चाहिए.

बटमूल कॉलेज महापल्ली शिक्षा समिति के सचिव रामावतार अग्रवाल महापल्ली ने एस सी एस टी एक्ट 1989 पर अपना विचार व्यक्त किया. कहा कि इस एक्ट का बहुत दुरुपयोग हो रहा था. बिना किसी जांच पड़ताल किए जेल दाखिल करने के प्रावधान होने के कारण निर्दोष लोगों को परेशान किया जा रहा था.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा समीक्षा किए जाने पर यह पाया गया कि इस एक्ट के तहत चलने वाले बहुत से मामले फर्जी पाए गए. इसलिए न्यायालय ने समीक्षा उपरांत इसमें संशोधन की आवश्यकता महसूस की. अब बिना जांच पड़ताल के किसी को जेल दाखिल नहीं किया जा सकता.

लेकिन एससी एसटी वर्ग द्वारा बहुत विरोध किए जाने के कारण सरकार द्वारा पुनर्विचार हेतु न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है. उन्होंने आगे कहा कि कोई भी वर्ग अनावश्यक प्रताड़ित नहीं होना चाहिए. न्यायपालिका के फैसले का हमें सम्मान करना चाहिए.

विचार मंच के संस्थापक एन आर प्रधान ने सबको धन्यवाद देकर आभार प्रकट किया. मंच संचालन बी आर साहू ने किया.

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