प्रयागराज में 2 फरवरी से 4 फरवरी के बीच शंकराचार्य परिषद का आयोजन

इसके अलावा कई भविष्य के कार्यक्रमों को निर्धारित करना है

नई दिल्‍ली: प्रयागराज के बजरंगदास मार्ग में स्थित पश्चिम शिविर में 2 फरवरी से 4 फरवरी के बीच शंकराचार्य ट्रस्‍ट आगामी शंकराचार्य परिषद का आयोजन होना है. इसके अलावा, समाज को जातिगत जहर से मुक्‍त करने के लिए संत समाज की अगुवाई में भविष्‍य के कार्यक्रमों को निर्धारित करना है.

शंकराचार्य ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी आनन्द स्वरूप के अनुसार, वर्तमान के जातीय और साम्प्रदायिक संघर्ष के युग मे आदिशंकराचार्य का अद्वैतवाद का दर्शन प्रासंगिक हो गया है. उन्होंने बताया कि जन्म से हर व्यक्ति शुद्र होता है.

सनातन धर्म में कहीं भी जन्म से जाति या वर्ण की बात नहीं कही गयी है. सनातन की वास्तविक परंपरा में कर्म के आधार पर वर्ण निर्धारण करने की व्‍यवस्‍था है. यानी, शुद्र भी संस्कार और वेद पढ़ कर ब्राम्हण बन सकता है और ब्राम्हण भी संस्कारहीन होने पर शुद्र हो सकता है.

शंकराचार्य परिषद के संयोजक प्रो. एलके जोशी के अनुसार, हमारे धर्म में आईं विकृति कैसे दूर होगी, इस बाबत चिंतन करने का समय आ गया है. हमें विचार करना होगा कि सनातन धर्म के मूल स्वरूप को किस तरह वापस लाया जाए.

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